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paperback books

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  • Rahiman Dhaaga Prem Ka (Paperback)
    Malti Joshi
    100

    Item Code: #KGP-7039

    Availability: In stock

    रहिमन धागा प्रेम का
    "पापा, अगर आप सोच रहे है कि जल्दी ही मुझसे पीछा छुडा लेंगे तो आप गलत सोच रहे है । मैं अभी दस-बीस साल शादी करने के मूड में नहीं हूँ। मैं आपके साथ आपके घर में रहूंगी । इसलिए यह घर हमारे लिए बहुत छोटा है । प्लीज़, कोई दूसरा बड़ा-सा देखिए।"
    "तुम शादी भी करोगी और मेरे घर में भी रहोगी, उसके लिए मैं आजकल एक बड़ा-सा घर और एक अच्छा सा घर-जमाई खोज रहा हूँ। रही इस घर की, तो यह तुम्हारी माँ के लिए है । यह जब चाहे यहीं शिफ्ट हो सकती है । शर्त एक ही है-कविराज इस घर में नहीं आएंगे और तुम्हारी माँ के बाद इस घर पर तुम्हारा अधिकार होगा ।"
    अंजू का मन कृतज्ञता स भर उठा । उसने पुलकित स्वर में पूछा, "तो पापा, आपने माँ को माफ कर दिया ?"
    "इसमें माफ करने का सवाल कहाँ आता है ? अग्नि को साक्षी मानकर चार भले आदमियों के सामने मैंने उसका हाथ थामा था, उसके सुख-दुःख का जिम्मा लिया था । जब उसने अपना सुख बाहर तलाशना चाहा, मैंने उसे मनचाही आज़ादी दे दी । अब तुम कह रही हो कि वह दुखी है तो उसके लौटने का मार्ग भी प्रशस्त कर दिया । उसके भरण-पोषण का भार मुझ पर था । गुजारा-भत्ता तो दे ही रहा हूँ अब सिर पर यह छत भी दे दी।"
    [इसी संग्रह की कहानी "रहिमन धागा प्रेम का' से]

  • Path Ke Daavedaar (Paperback)
    Sharat Chandra Chattopadhyaya
    160

    Item Code: #KGP-157

    Availability: In stock


  • Lauhpurush Sardar Vallabhbhai Patel-Jeevan Darshan (Paperback)
    M.A. Sameer
    100

    Item Code: #KGP-1410

    Availability: In stock

    सरदार वल्लभभाई पटेल
    सरदार वल्लभभाई पटेल को भारत के इतिहास में लौहपुरुष के रूप में जाना जाता है, जबकि विदेशी इतिहासकारों ने उनकी तुलना बिस्मार्क से की है। वे कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति थे और परिस्थिति फिर चाहे जैसी भी रही हो, अपने कर्तव्य का निर्वाह करने से नहीं चूके। इस संदर्भ में वह घटना याद आती है, जब वे अदालत में अपने मुवक्किल की पैरवी कर रहे थे कि तभी उन्हें उनकी पत्नी की मृत्यु से संबंधित तार मिला। उन्होंने वह तार पढ़ा और उसे अपनी जेब में रख लिया तथा मनोयोग से अपने कर्तव्यपालन में लगे रहे। उनका विचार था कि यदि वे अपने कर्तव्य का पालन नहीं करते तो एक बेगुनाह को सजा हो जाती।
    सरदार पटेल की सहनशक्ति बड़ी अद्भुत थी। जब उनकी आयु केवल 9 वर्ष थी तो उनकी बगल में एक फोड़ा निकल आया था। फोड़ा पक गया था, जिस कारण उसमें मवाद बन गयी था। इस फोड़े के कारण उन्हें असहनीय पीड़ा होने लगी थी। ऐसे में उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए उस फोड़े को लोहे की गर्म सलाख से फोड़ दिया। इस आयु में इस तरह के साहस व सहनशक्ति के उदाहरण बहुत ही कम देखने को मिलते हैं।
    बाल्यावस्था से ही सरदार पटेल में निर्णय लेने की बड़ी अद्भुत क्षमता थी और उन्होंने जीवन में जो भी निर्णय लिए, उनमें सफलता भी प्राप्त की। पराधीन भारत में उन्होंने किसानों का नेतृत्व किया और उन्हें निडर, साहसी तथा वीर बनने का पाठ पढ़ाया, जबकि स्वतंत्रा भारत में उन्होंने देशी रियासतों को एकीकृत करने का जो गौरवशाली कार्य किया, वह हमारे सामने एकीकरण की आदर्श मिसाल है। 
    प्रस्तुत पुस्तक ‘लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल: जीवन दर्शन’ में सरदार पटेल के जीवन से जुड़ी घटनाओं एवं तथ्यों को सरस, सरल एवं रोचक भाषा में समाहित करने का प्रयास किया गया है।
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Ramdhari Singh Diwakar (Paperback)
    Ramdhari Singh Diwakar
    125

    Item Code: #KGP-7007

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियां : रामधारी सिंह दिवाकर
    रामधारी सिंह दिवाकर की इन कहानियों में गांव का जटिल यथार्थ आद्यन्त उपलब्ध है ।  गाँवों की सम्यक तस्वीर का आधुनिक रूप जो विकास और पिल्लेपन के संयुक्त द्वंद्वों से उत्यन्न अपना है, वही यहाँ चित्रित हुआ है । आर्थिक आधार के मूल में रक्त-संबंधों के बीच गहरे दबावों का वैसा प्रभावपूर्ण चित्रण भा दिवाकर के समकालीन अन्य कहानीकारों में प्राय: नहीं मिलता है । कहा जा सकता है कि ये कहानियां उन हजारों-हज़ार गाँवों की पदचाप और ध्वनियों की खरी रचनाएँ हैं, जो किसी पाठयक्रम के चयन की प्रत्याशी नहीं, बल्कि  आधुनिक ग्राम और ग्रामवासी की आत्मा का अनुपम अंकन  हैं ।
    हिंदी कहानी के वृत्त और प्रयोजन की परिधि को निश्चित ही विस्तार देती इन कहानियों में जहाँ एक और मनुष्य की जिजीविषा का गाढा रंग है तो वहीं दूसरी ओर हमारे तथाकथित 'विकास' पर विशाल प्रश्नचिह्न भी हैं। सामाजिक परिवर्तनों के विकास पर इस कहानीकार की समर्थ पकड़ है तथा कहानियों की कारीगरी इतनी सहज-सरल और मर्मस्पर्शी कि लेखक की कहन चुपचाप पाठक के सुपुर्द हो जाती है । यही चिरपरिचित अंदाज दिवाकर के कहानीकार ने बखूबी अर्जित किया है, जो उन्हें अपने समकालीनों में विशिष्ट बनाता है ।
    रामधारी सिंह दिवाकर द्वारा स्वयं चुनी गई 'दस प्रतिनिधि कहानियाँ हैं—'सरहद के पार','खोई हुई ज़मीन', 'सदियों का पड़ाव', 'शोक-पर्व', 'माटी-पानो', 'मखान पोखर', 'सूखी नदी का पल'. 'गाँठ', 'इस पार के लोग' तथा 'काले दिन' ।
    किताबघर प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की जा रही "दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ में सम्मिलित इस प्रतिनिधि कथा-संग्रह को प्रस्तुत करते हुए हम आशान्वित हैं कि इन कहानियों को लंबे समय तक पाठकों के मन में कभी भी तलाशा जा सकेगा ।
  • She (Paperback)
    Dixy Gandhi
    245 221

    Item Code: #KGP-332

    Availability: In stock

    A first ever collection of stories centered around Women’s lives in Modern Times

    Society in modern times is changing very fast, and so is changing the situation and role of women in facing and dealing with them. With the expansion of education among them, they are taking things with gusto and intelligence, at times coming out with unexpected results. Their understanding is different, approach is different and what they present is also not only engrossing but also enlightening.
    It is time women wrote with themselves at the centre of happenings and here is perhaps the first such collection of exciting stories by the upcoming author Dixy Gandhi who shows great promise and quality.
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Vijay Dan Detha (Paperback)
    Vijaydan Detha
    90

    Item Code: #KGP-7012

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : विजयदान देथा
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार विजयदान देथा ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'लजवन्ती', 'दूजौ कबीर', 'फितरती चोर', 'बडा कौन', 'दूरि, 'सिकन्दर और कौआ', 'राजीनामा', रैनादे का रूसना', 'अनेकों हिटलर' तथा 'हाथी-कांड' । 
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक विजयदान देथा की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Suno Manu (Paperback)
    Vishva Mohan Tiwari
    100

    Item Code: #KGP-1488

    Availability: In stock

    सुनो मनु
    आज का युवा तेज़ी से आगे बढ़ना चाहता है, किंतु अपने माता-पिता या दादा-दादी से उचित सलाह न मिल सकने के कारण उसे शीघ्र ही भोगवादी बाज़ार के दलदल में फँस जाने का खतरा रहता है। 
    एक युवक को ऐसे खतरे से बचाने के लिए एक पिता ने होस्टल में रहने वाले अपने पुत्र को लगातार पत्र लिखे, जिससे न केवल उसे वरन् उसकी मित्रमंडली के समुचित विकास में, उन्हें जीवन में सोच-विचार कर आगे बढ़ने में सहायता मिली। 
    उन पत्रों की सफलता का रहस्य था पुत्रा एवं पिता में मित्रवत् व्यवहार। पिता में एक ओर तो अपनी जड़ों से जुड़े रहने का विवेक है तथा दूसरी ओर आधुनिकता की पर्याप्त समझ है। 
    पत्रों में पुत्र की सामान्य समस्याओं से लेकर जीवन-मूल्य संबंधी प्रश्नों पर आपस में विचार- विमर्श है। 
    इस पुस्तक में युवाओं के लिए वे संदेश हैं, जिनसे उनमें इतनी मानसिक, बौद्धिक, नैतिक शक्ति आ सकेगी कि वे भारत को और इसलिए स्वयं को सचमुच ही विश्व में सम्मानप्रद स्थान दिला सकें। 
  • Kashmkash (Paperback)
    Manoj Singh
    250 225

    Item Code: #KGP-378

    Availability: In stock


  • Krantikaariyon Ke Geet (Paperback)
    Chandrika Prasad Sharma
    120

    Item Code: #KGP-113

    Availability: In stock


  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Kamleshwar (Paperback)
    Kamleshwar
    90

    Item Code: #KGP-1251

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : कमलेश्वर
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार कमलेश्वर ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : "कोहरा', 'राजा निरबंसिया', 'चप्पल', 'गर्मियों के दिन', 'खोई हुई दिशाएँ', 'नीली झील', 'इंतजार', 'दिल्ली में एक मौत' , 'मांस का दरिया' तथा 'बयान' ।
    हमेँ विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक कमलेश्वर की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Doosara Gazal Shatak (Paperback)
    Sher Jung Garg
    100

    Item Code: #KGP-1203

    Availability: In stock

    दूसरा ग़ज़ल  शतक
    इस श्रृंखला की शुरुआत 'हिन्दी गजल शतक' से हुई थी । दुष्यन्त, बलबीर सिंह रंग, चिरंजीत, रामावतार लागी, सूर्यभानु गुल, बालस्वरूप राही, शलभ श्रीराम सिंह, मृदुता अरुण आदि-आदि पच्चीस उल्लेखनीय गज़लकारों की ग़ज़लें इस संकलन में समाविष्ट की गई थीं। इस बार शिवबहादुर सिंह भदौरिया, ओमप्रकाश चतुर्वेदी 'पराग' से लेकर युवा ज्योति शेखर और हरिओम तक 'दूसरा ग़ज़ल शतक' में आए है । कवयित्रियों में रंजना अग्रवाल, सरोज व्यास और विनीता गुप्ता है; लोकप्रिय गीतकारों में कुँअर बेचैन, उर्मिलेश, श्रवण राही हैँ । मानव, उपेन्द्र कुमार, कमलेश भट्ट 'कमल', कमल किशोर भावुक, प्रभात शंकर, योगेन्द्र दत्त शर्मा और लक्ष्मण आदि है । तात्पर्य यह कि 'दूसरा ग़ज़ल शतक में ग़ज़ल से जुडे विभिन्न मूडों, मान्यताओं, संवेदनाओं, सरोकारों, शिल्पों, कथ्यों वाले रचनाकारों का यह संगम हिंदी में लिखी जा रही ग़ज़लों का एक गुलदस्ता है ।
  • Repartee (Paperback)
    Khushwant Singh
    225

    Item Code: #KGP-328

    Availability: In stock

    KHUSHWANT SINGH, India's iconic journalist and writer, whose works secured largest readership in the country, remains an enigma beyond his writings. His immense popularity and connectivity with his readers made him the common man's idol but his real persona remained in wraps. The 'dirty old man' ensconced in a bulb with a wicked grin and a fountain pen in hand was a far cry in real life.
    This collection of interviews and articles attempts to bring to light the real Khushwant as his family and close friends knew him. 
    A man who was constantly surrounded by beautiful women but remained faithfully wedded to his wife Kaval for 62 years  till she passed away, a man who wrote about wine, women and sex, but lived a life more simple and austere than a commoner, a man who was more disciplined in his fitness regime than men even half his age, a person  who wrote more books, articles and columns than any other journalist or writer in this country, and in a language, so simple that the common reader could comprehend. 
    Little do his readers know that the man famous for his jokes, his love for wine and women and his fierce agnosticism, was a great scholar in real life who wrote classics like A History of the Sikhs, taught comparative religion at Princeton University, was a passionate nature lover who wrote books like Nature Watch, was an art critic and had dabbled in sitar and painting at Shantiniketan in his youth.
    Khushwant Singh voiced his opinions openly and spoke his mind fearlessly through his column's for which he was honoured in 1998, with 'Honest Man of the Year Award and later in 2007 with Padma Vibhushan award.
    He remained reticent about his personal life while he lived. It is about time his loyal fans knew who the real Khushwant was.
  • Dushyant Ke Jaane Par Doston Ki Yadein (Paperback)
    Kamleshwar
    90

    Item Code: #KGP-1381

    Availability: In stock


  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Tejendra Sharma (Paperback)
    Tajendra Sharma
    170

    Item Code: #KGP-441

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : तेजेन्द्र शर्मा
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार तेजेन्द्र शर्मा ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'कब्र का मुनाफा', मुझे मार डाल बेटा...!', 'हाथ से फिसलती ज़मीन...', 'ज़मीन भुरभुरी क्यों है....?', 'कोख का किराया', 'काला सागर', 'एक ही रंग', 'ढिबरी टाइट', 'कैंसर', तथा 'देह की कीमत है' ।
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक तेजेन्द्र शर्मा की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Ullanghan (Paperback)
    Bhairav Prasad Gupt
    190

    Item Code: #KGP-1544

    Availability: In stock

    डॉ. एस.एल. भैरप्पा
    (जन्म: 1934)
    पेशे से प्राध्यापक होते हुए भी, प्रवृत्ति से साहित्यकार बने रहने वाले भैरप्पा ऐसी गरीबी से उभरकर आए हैं जिसकी कल्पना तक कर पाना कठिन है। आपका जीवन सचमुच ही संघर्ष का जीवन रहा। हुब्बल्लि के काडसिद्धेश्वर कालेज  में अध्यापक की हैसियत से कैरियर शुरू करके आपने आगे चलकर गुजरात के सरदार पटेल विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के एन.सी.ई.आर.टी. तथा मैसूर के प्रादेशिक शिक्षा कालेज में सेवा की है। अवकाश ग्रहण करने के बाद आप मैसूर में रहते हैं।
    ‘धर्मश्री’ (1960) से लेकर ‘मंद्र’ (2002) तक आपके द्वारा रचे गए उपन्यासों की संख्या 19 है। उपन्यास से उपन्यास तक रचनारत रहने वाले भैरप्पा ने भारतीय उपन्यासकारों में अपना एक विशिष्ट स्थान बना लिया है। 
    केंद्रीय साहित्य अकादेमी तथा कर्नाटक साहित्य अकादेमी (3 बार) का पुरस्कार, भारतीय भाषा परिषद का पुरस्कार--ऐसे कई पुरस्कारों से आप सम्मानित हुए हैं। अखिल भारतीय कन्नड़ साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता का, मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन करने का, अमेरिका में आयोजित कन्नड़ साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता करने आदि का गौरव भी आपने अर्जित किया है।
    देश-विदेश की विस्तृत यात्रा करने वाले भैरप्पा ने साहित्येतर चिंतनपरक कृतियों की भी रचना की है। आपकी साहित्यिक साधना से संबंधित कई आलोचनात्मक पुस्तकें भी प्रकाशित हो  चुकी  हैं।
  • Yoon Banee Mahabharat (Paperback)
    Pratap Sehgal
    60

    Item Code: #KGP-1417

    Availability: In stock

    प्रताप सहगल
    कवि, नाटककार, कथाकार, आलोचक
    जन्म : 10 मई, 1945, झंग, पश्चिमी पंजाब (अब पाकिस्तान में)
    प्रकाशित रचनाएँ 
    कविता-संग्रह : 'सवाल अब भी मौजूद है', 'आदिम आग', 'अँधेरे में देखना', 'इस तरह से', 'नचिकेतास ओडिसी', 'छवियाँ और छवियाँ' 
    नाटक : 'अन्वेषक',  'चार रूपांत',  'रंग बसंती', 'मौत क्यों रात- भर नहीं आती', 'नौ लघु नाटक', 'नहीं कोई अंत', 'अपनी-अपनी भूमिका', 'पाँच रंग नाटक', 
    तथा 'छू मंतर' और 'दस बाल नाटक'
    उपन्यास : 'अनहद नाद', 'प्रियकांत' 
    कहानी-संग्रह : 'अब तक', 'मछली-मछली  कितना पानी'
    आलोचना : 'रंग चिंतन', 'समय के निशान', 'समय के सवाल', 
    विविध : 'अंशतः' (चुनिंदा रचनाओं का संग्रह)
    सम्मान एवं पुरस्कार : ० मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार ० 'रंग बसंती' पर साहित्य कला परिषद द्वारा सर्वश्रेष्ठ नाट्यालेख पुरस्कार ० 'अपनी-अपनी भूमिका' शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत  ० 'आदिम आग' व 'अनहद नाद' हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा पुरस्कृत ० सौहार्द सम्मान, उत्तरप्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ ० राजभाषा सम्मान, भारत सरकार ० साहित्यकार सम्मान, हिंदी अकादमी, दिल्ली और अन्य पुरस्कार । 
    संपर्क : एफ- 101, राजौरी गार्डन, नई दिल्ली- 110027
    फोन : 25100565, मो० : 9910638563
    ई-मेल : partapsehgal@gmail.com 

  • Manav Adhikar Aur Ham (Paperback)
    Urmila Jain
    140

    Item Code: #KGP-285

    Availability: In stock

    मानव अधिकार और हम
    हिंदी में प्रति वर्ष एक हज़ार से अधिक पुस्तकें छपती  हैं, पर अभी तक कोई ऐसी पुस्तक मेरे देखने में नहीं  आई है जिससे जन-सामान्य को सहज-सरल भाषा में मानव अधिकार संबंधी जानकारी प्राप्त हो सके। हिंदी की इस कमी का ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक में मानव अधिकार की धारणा सहित अन्य विषयों के संबंध में भी चर्चा की गई है । 
    मानव अधिकार का उल्लंघन कब, कैसे और क्यों  होता है और हो सकना है—इसके कुछ उदाहरण देते हुए यह भी बतलाया गया है कि अधिकांश देश किस प्रकार सैद्धांतिक रूप से तो मानव अधिकार की सार्वभौमिक घोषणा का समर्थन करते हैं और इसी के आधार पर उन्होंने अपने-अपने देश में तरह-तरह के कानून भी बनाए हैं, पर जहाँ नक उन पर अमल  करने की बात है-इस संबंध में अधिकांश, देशों का रिकॉर्ड बहून ही निराशाजनक है ।
    प्रस्तूत पुस्तक में बाल अधिकार उल्लंघन और बालकों के यौन शोषण का उल्लेख करते हुए बतलाया गया है कि किस प्रकार अपराधियों का दोष सिद्ध होने के बावजूद उनके विरुद्ध कोई ऐसी कार्यवाई नहीं की जाती, उन्हें ऐसा दंड नहीं दिया जाता कि इस प्रकार के अपराधों पर रोक लगे ।
    -उर्मिला जैन

  • Vajpayee Rachna-Sankalan (Set Of 7 Books)
    Atal Bihari Vajpayee
    1420 1136

    Item Code: #KGP-7235

    Availability: In stock

    वाजपेयी रचना-संकलन 
    7 चर्चित एवं प्रमुख वैचारिक पुस्तकें
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Malti Joshi (Paperback)
    Malti Joshi
    100

    Item Code: #KGP-1346

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ: मालती जोशी
    हिंदी की प्रख्यात लेखिका मालती जोशी के प्रतिनिधि कथा-संसार में नारी-विमर्श और उसकी अस्मिता के नाम पर लिखी जा रही तथाकथित आधुनिक नायिकाओं के चटपटे नारी-पात्र नहीं हैं, वरंच वहाँ निरूपण है ऐसी नारियों का, जो सचमुच हमारे परिवार, समाज और देश की स्त्री की रूपरेखाओं का चित्रण और निर्धारण करती है । दैनंदिन स्तर पर आज मध्यवर्गीय नारी सुबह-दोपहर-शाम जिन भभूकों में फंसी है, वहाँ अनिवार्यतः मानसिक उद्वेलन तथा वैचारिक उत्तेजन के दृश्य-परिदृश्य निर्मित होते हैं और इन्हीं की संतुलित सृजन-विसर्जन की प्रक्रिया मालती जोशी की कहानियों का प्रमुख बढ़ा-तत्त्व है ।
    इक्लीसवीं सदी के इस सदिच्छा काल में जब पारिवारिक भारतीय नारी अपनी इच्छा, क्रिया और ज्ञान-शक्ति के माध्यम से अपने स्वभाव की प्रवृत्ति को अक्षुण्ण रखते हुए, एक विकासशील परिपक्वता की ओर अग्रसर है, ऐसे में आवश्यक है कि जीवन की मनोहरता को बचाने से परिवार की यह प्रमुखतम इकाई सुदृढ़ रहे । पर रहे तो कैसे? इसी आधार को बुनती ये कहानियां पाठक-समाज की आश्वस्ति हैं  और संदेश भी ।
    मालती जोशी द्वारा स्वयं चुनी गई 'दस प्रतिनिधि कहानियां' हैँ-'बेटे की मां', 'सांस-सांस पर पहरा बैठा', 'प्रतिदान', 'कोख का दर्प', 'मोह-भंग', 'आउट साइडर', 'प्रॉब्लम चाइल्ड', 'उसने नहीं कहा', 'आस्था के आयाम’ तथा 'प्यार के दो पल बहुत है'।
  • Cement Nagar (Paperback)
    VIJAY
    130

    Item Code: #KGP-258

    Availability: In stock


  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Vishnu Prabhakar (Paperback)
    Vishnu Prabhakar
    80

    Item Code: #KGP-1255

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ  : विष्णु प्रभाकर
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ 'किताबघर' की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    'किताबघर' गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए अग्रज कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कथाकार विष्णु प्रभाकर ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'बँटवारा', "क्रान्तिकारी', 'पर्वत से भी ऊँचा', 'ठेका', 'पिचका हुआ केला और क्रान्ति', 'चितकबरी बिल्ली', 'एक मौत समन्दर किनारे', 'एक और कुन्ती', 'पैड़ियों पर उठते पदचाप' तथा 'पाषाणी'।
    हमेँ विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात कथाकार विष्णु प्रभाकर की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Kavi Ne Kaha : Chandrakant Deotale (Paperback)
    Chanderkant Deotale
    90

    Item Code: #KGP-1492

    Availability: In stock

    कवि ने कहा: चन्द्रकांत देवताले
    जिस तरह मैं मनुष्य हूं उसी तरह कवि, मनुष्य होना मेरा पेशा नहीं है वैसे ही कविताई भी। जहां भी होता हूं कवि और मनुष्य एक साथ होने के कारण सबके बीच होने का अहसास होता है। असाधारण-विशेष होने के बदले मुझे हमेशा लगता रहा है कि कवि अपनी भाषा की धरती और अपने जनपद के जीवन में आदिवासी की तरह रहता है। आधुनिकता, वैज्ञानिक तथा सूचना-क्रांति की बाढ़ में भी नए परिप्रेक्ष्य में उसकी चिंताएं आदिवासी के सरोकारों जैसी ही होती हैं। देशीयता-स्थानीकता-जश्मीन और अपनी भाषा को बचाने की चिंता। मुट्ठी-भर लोगों की जन्नत बने इस लोकतंत्र में लोक की ही फजीहत हो रही है। गरीबी और अमीरी के बढ़ते भयावह फासले के बीच विस्थापन और बाज़ारवाद हड़कंप मचा रहा है। झुलसती हुई उम्मीद के बीच विकास के इस रौद्र रूप को हम देख ही रहे हैं।

    वैसे तो कवि...जन्मजात अन्याय-विरोधी और विद्रोही होता है। याद कर सकते हैं आदिकवि और क्रौंच-वध का प्रसंग। सृजन सदियों पहले भी संग्राम-भूमि था। संत तुकाराम के अभंग की पंक्तियां---‘‘दिन-रात हम शामिल एक युद्ध में, जो दुनिया और मन में बाहर-भीतर हो रहा।’’ आज तब से अधिक भयावह समय। ऐसे में कवि किसलिए-क्या कर रहे? यह सवाल मेरा नहीं दुनिया के बड़े कवियों का है, जिनकी आवाज़ बुलंद थी और अवाम को स्पंदित करती थी।

    मेरा कहना है--‘‘इस वक्त कविता नहीं लिख-सुन सकते वो जो सोचते हैं खाए हुए पेट से। यह वक्त, वक्त नहीं एक मुकदमा है, या तो गवाही दो या गूंगे हो जाओ हमेशा के वास्ते।’’
    -चन्द्रकांत देवताले
  • Teen Laghu Upanyas : Mamta Kaliya (Paperback)
    Mamta Kalia
    180 162

    Item Code: #KGP-211

    Availability: In stock


  • Kavi Ne Kaha : Kunwar Narain (Paperback)
    Kunwar Narayan
    90

    Item Code: #KGP-1217

    Availability: In stock

    शीर्षस्थ कवि कुँवर नारायण की कुछ कविताओं का यह संचयन उनके विस्तृत काव्य-बोध को समझने में सहायक होगा। पिछले पचास-साठ वर्षों में होने वाली महत्त्वपूर्ण गतिविधियों की सूक्ष्म एवं संवेदनशील अभिव्यक्ति इन कविताओं में प्रतिबिंबित हुई है। इस संग्रह में किसी विभाजन के अंतर्गत कविताएँ नहीं चुनी गई हैं, कोशिश है कि ‘आत्मजयी’ एवं ‘वाजश्रवा के बहाने’ को छोड़कर बाकी सभी कविता-संग्रहों में से कुछ कविताएँ रहें।
    समय और स्थान की निरंतरता का बोध कराती उनकी कविताएँ दूर समयों, जगहों और लोगों के बीच हमें ले जाती हैं। कुँवर नारायण की कविताएँ लंबी और जटिल भारतीय अस्मिता को बहुत कुशलता से आधुनिकता के साथ जोड़कर दोनों को एक नई पहचान देती हैं। उनकी रचनाशीलता में हिंदी भाषा तथा विभिन्न विषय नई तरह सक्रिय दिखाई देते हैं। एक ओर जहाँ वह पारंपरिक भाषा में नई ऊर्जा डालते हैं वहीं बिलकुल आज की भाषा में एक बहुत बड़े विश्वबोध् को संप्रेषित करते हैं-कविता के लिए ज्यादा से ज्यादा जगह बनाते हुए। प्रस्तुत कविताओं का संकलन पाठकों को कई तरह से संतोष देगा।

  • Ek Nirvasit Maharaja (Paperback)
    Navtej Sarna
    200 180

    Item Code: #KGP-311

    Availability: In stock

    एक निर्वासित महाराजा
    हिंदुस्तान के महानतम शासकों में से एक, पंजाब के महाराजा रंजीत सिंह का सन् 1839 में देहांत हो गया और उनका विस्तृत साम्राज्य अराजकता में डूब गया । अभी एक दशक भी नहीं हुआ था कि गृहकलहपूर्ण प्रतिद्वन्द्विता और षड़यंत्रों के चलते पंजाब अंग्रेजों के प्रतीक्षारत हाथों में चला गया । जिस शासक ने साम्राज्य के अधिग्रहण की शर्तों पर दस्तखत किए और मशहूर कोहिनूर हीरे सहित लाहौर का तोशकखाना अंग्रेजी को सौंपा, यह एक ग्यारह साल का बच्चा था, महाराजा रंजीत सिंह का सबसे छोटा पुत्र, दलीप सिंह ।
    इस सटीक और मर्मस्पर्शी उपन्यास में, जो सच्ची घटनाओं पर आधारित है, नवतेज सरना पंजाब के आखिरी महाराजा की असाधारण कहानी बखानते हैं । साम्राज्य के अधिग्रहण के साथ ही दलीप को उनकी माँ और प्रजा से अलग-थलग कर दिया जाता है । ब्रिटिश सरकार उन्हें अपने संरक्षण में  लेकर, उनका धर्मांतरण का उन्हें ईसाई बना देती है । सोलह साल की उम्र में उन्हें एक देशीय दरबारी का जीवन जीने के लिए इंग्लैड भेज दिया जाता है । यह एक ऐसा निर्वासन था, जिसके लिए उन्हें अभ्यस्त कराया गया था कि वे खुद इसकी मांग करें; लेकिन अपने साथ होने वाले व्यवहार के कारण जब उनका मोहभंग  हुआ और देर से ही सही, जब उन्हें अपनी सोई हुई विरासत का अहसास हुआ, तब वे विद्रोही वन गए । वे फिर से सिख बन गए और हिंदुस्तान वापस लौटने और अपने लोगों का नेतृत्व करने के लिए मचल उठे, लेकिन उनके इस प्रयास ने उन्हें उन्नीसवीं सदी के यूरोप की गंदी राजनीति से फँसा दिया, जिसने उन्हें रिक्त कर दिया । वे धोखे और उपहास क पात्र बन गए । अंतत: पेरिस के एक सस्ते होटल में वे एक अकेले और हारे हुए आदमी के रूप से मृत्यु को प्राप्त हुए ।
    दलीप सिंह के अपने ही स्वर में और उनकें पाँच समकालीनों की आवाज में कहा गया यह उपन्यास न सिर्फ सिख-इतिहास, वरन् पुरे हिंदुस्तान के इतिहास के एक वेहद कारुणिक व्यक्तित्व की रोचक और भीतर तक हिला देने वाली तस्वीर पेश करता से । साथ ही यह ब्रिटिशा साम्राज्यवाद छोर उसको बढावा देने वाले भारतीय राजा-महाराजाओं के लालच और अदूरदर्शिता की भी बेबाक पाताल है ।
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Kamal Kumar (Paperback)
    Kamal Kumar
    130

    Item Code: #KGP-412

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : कमल कुमार
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार कमल कुमार ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'फॉसिल',  'के नाम है थारो', 'केटलिस्ट', 'वैलेन्टाइन डे', 'मंडी', 'खोखल', 'कीच', 'धारावी', 'चौराहा' तथा 'अपराजेय'। 
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक कमल कुमार की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • The Kindling Touch (Paperback)
    Debabrata Dasgupta
    195

    Item Code: #KGP-330

    Availability: In stock

    t is not all to describe Madame Curie simply as a devoted scientist; she is a radiant milestone in the realm of modern science. Her whole life carries a divine message. The life that nurtured her, gave her feed for the mind and body, was not at all strewn with flowers. Rather, feelings of want, insecurity and doubts tried to strangle her like the tentacles of an octopus. In the dark, deep jungle of uncertainties that was her early life, where there were chances of slippage at every step, she had ventured forward with resolution and courage and finally reached her glorious destination.
  • Vyangya Samay : Sharad Joshi (Paperback)
    Sharad Joshi
    225

    Item Code: #KGP-7225

    Availability: In stock

    शरद जोशी हिंदी व्यंग्य के सार्वकालिक महान् रचनाकार हैं। विसंगति के ड्डोत, विस्तार और परिणाम की जैसी अचूक परख उनको है, वह उनके समकालीन व्यंग्यकारों तक में दुर्लभ है। हास्य और व्यंग्य का सहजात संबंध उनकी रचनाओं में मौजूद है। बतरस और ललित निबंध के साथ कहावतों व लोकप्रसंगों से विकसित व्यंग्य को शरद जोशी ने हिंदी गद्य का अनिवार्य अंग बनाया। उनके लेखन में विषय-वैविध्य किसी को भी चकित करता है। वे विचार और राजनीति को लेकर बेहद स्पष्ट, पक्षधर, प्रखर और सतर्क लेखक हैं। यही कारण है कि पत्र-पत्रिकाओं में उनके स्तंभों ने एक इतिहास रचा। साहित्य के सैद्धातिक व व्यावहारिक अंतर्विरोधें पर उन्होंने अद्वितीय लिखा है। वे जीवन के अपार व अबूझ से छोटे-छोटे पल लेकर रचनाएं बुनते हैं। उनका एक वाक्य है—‘प्रेम की पीड़ा गहरी होती है, पर गरीबी की पीड़ा उससे भी गहरी होती है।’ यही विरल यथार्थबोध है जो परिहास, वक्रोक्ति, आनंद आदि से आगे बढ़कर रचना को किसी दूसरे ही स्तर पर ले जाता है। वे महत्त्वपूर्ण संदर्भों के व्यंग्य लेखक हैं। साहित्य, पत्रकारिता, टी. वी. और सिनेमा में उनके लेखन ने कीर्तिमान बनाए हैं। ‘मासूमियत में निहित मर्म और मुस्कान’ शरद जोशी के लेखन का मूल मंत्रा है। व्यंग्य समय में शरद जोशी के चयनित व्यंग्य उनके विस्तृत व्यंग्य लेखन से कुछ उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
  • The Hanuman Factor (Paperback)
    Anand Krishna
    195

    Item Code: #KGP-336

    Availability: In stock

    “Chaaron Jug Parataapa Tumhaaraa, Hai Parasidha Jagata Ujiyaaraa.”
    “Your glory is sung far and wide, and in all four ages; and, your radiance known to illumine the whole universe.”
    Shree Hanuman Chalisa (The Forty Verses of Hanuman) written towards the end of Tulasidas’s life is, perhaps, one of his last works. By this work, the great poet-cum- saint takes the reader back to a time where Truth is still pure, undiluted, free, and its movements not restricted by human logic and facts of the physical world.
    Shree Hanuman Chalisa brings us closer to the mysteries and myths of life. It is the acceptance of life as it is. Here, doubts are no longer entertained. There is no attempt to demystify life, for the mysterious can never ever be demystified.
    In this life-changing book, Lord Hanuman is extolled as the most successful spiritual Chief Executive Officer (CEO) of all times. One may ask, what is so mysterious about that? There is no dearth of successful CEOs in the world. And, spiritual beings are not scarce either. So, what is so special about Hanuman?
    Let us explore together…..
  • Das Pratinidhi Kahaniyan : Kaljayee Kathakar Jaishankar Prasad (Paperback)
    Jaishankar Prasad
    100

    Item Code: #KGP-7228

    Availability: In stock

    ‘दस प्रतिनिधि कहानियां’ किताबघर प्रकाशन की अत्यंत प्रतिष्ठित और पाठकप्रिय पुस्तक  शृंखला है। इसी के अंतर्गत ‘कालजयी कथाकार’  शृंखला प्रारंभ हो रही है। ऐसे अनेक महत्त्वपूर्ण कहानीकार हैं जिन्होंने हिंदी कहानी के विकास में अविस्मरणीय योगदान दिया है। इन रचनाकारों को पढ़ते समय सामाजिक स्थितियों का उतार-चढ़ाव विस्मित करता है। इनके द्वारा काल विशेष में रची जाने और उस पर केंद्रित होने के बावजूद अपनी आंतरिकता में बहुतेरी कहानियां कालजयी हैं। उनका नाभिनाल संबंध मूल मानवीय संचेतना से है। 
    ‘कालजयी कथाकार’  शृंखला में प्रस्तुत हैं जयशंकर प्रसाद की दस प्रतिनिधि कहानियां—‘आकाश-दीप’, ‘ममता’, ‘आंधी’, ‘मधुआ’, ‘व्रत-भंग’, ‘पुरस्कार’, ‘इंद्रजाल’, ‘गुंडा’, ‘देवरथ’ तथा ‘सालवती’।
    इन कहानियों को पढ़ना ‘सभ्यता समीक्षा’ की प्रक्रिया से गुजरना है। 
  • Arddhnaarishwar (Paperback)
    Vishnu Prabhakar
    350 280

    Item Code: #KGP-215

    Availability: In stock


  • Arya Samaj Ki Paanch Vibhutiyan (Paperback)
    Ashok Kaushik
    50

    Item Code: #KGP-7047

    Availability: In stock

    देश के निर्माण एवं उत्थान में आर्यसमाज के आरंभ से लेकर अब तक शतशः आत्माएं अपना सर्वस्व त्याग चुकी हैं। वे महात्मा धन्य हैं जो परिवार, जाति, देश, धर्म तथा संस्कृति के लिए आत्मत्याग करते हैं। जाति अथवा समाज ऐसे त्यागी-तपस्वी पूर्वजों का स्मरण एवं अनुसरण कर ही आगे बढ़ते हैं। महापुरुषों की जीवनियां भावी पीढ़ी को सदा ही प्रेरित करते आए हैं, उनमें महर्षि दयानंद, स्वामी श्रद्धानन्द, धर्मवीर पं. लेखराम, पं. गुरुदत्त विद्यार्थी तथा महात्मा हंसराज वर्तमान शती एवं पीढ़ी के लिए विशेष उल्लेखनीय हैं।
    ‘आर्यसमाज की पांच विभूतियां’ में इन्हीं पांच महापुरुषों की संक्षिप्त जीवनी संकलित की गई है। प्रस्तुत पुस्तक आर्य किशोरों की शिक्षा को ध्यान में रखकर विशेष रूप से लिखी गई है। उन्नीसवीं शती के अंत में आर्यसमाज की स्थापना तथा सत्यार्थप्रकाश की रचना से युगपुरुष दयानन्द ने जो जागृति देशवासियों में उत्पन्न की है, ‘स्त्री शूद्रौ नाधीयाताम्’ का प्रत्याख्यान जिस सरलता एवं आधिकारिक रूप में स्वामी जी ने अपनी रचनाओं में किया है, वर्ण-व्यवस्था एवं मूर्तिपूजा के विषय में स्वामी जी ने जो विचार व्यक्त किए हैं, उन सबका समावेश इस जीवनी में बड़े सुंदर ढंग से किया गया है।
  • Kavi Ne Kaha : Ibbar Rabbi (Paperback)
    Ibaar Rabbi
    90

    Item Code: #KGP-1406

    Availability: In stock

    कवि ने कहा : इब्बार रब्बी
    बचपन में महाभारत और प्रेमचंद होने का भ्रम, किशोर अवस्था में छंदों की कुंज गली में भटकने का भ्रम, फिर व्यक्तिवाद की दलदल में डुबकियां । लगातार भ्रमों और कल्पना-लोक में जीने का स्वभाव । क्या आज भी किसी स्वप्न-लोक के नए मायालोक में ही खड़ा हूं? यह मेरा नया भ्रम है या विचार और रचनात्मकता की विकास-यात्रा? क्या  पता । कितनी बार बदलूं।
    नया सपना है शमशेर और नागार्जुन दोनों  महाकवियों का महामिलन । इनकी काव्यदृष्टि और रचनात्मकता एक ही जगह संभव कर पाऊं । जटिल और सरल का समन्वय, कला और इतिवृत्तात्पकता एक साथ । ध्वनि का अभिधा के साथ पाणिग्रहण ।  नीम की छांह में उगे पीले गुलाबों की खुशबू से नाए रसायन, नए रंग और नई गंध जन्म लें । गुलाबों की शफ्फाक नभ-सी क्यारी में बीजों-सी दबी निबोलियां । इस नई मिट्टी और खाद से उगने वाले फूल, लताएं और वनस्पतियां बनें मेरी कविता ।
  • Vishwa Ke Mahaan Shikshavid (Paperback)
    M.A. Sameer
    250

    Item Code: #KGP-7209

    Availability: In stock

    जीवन में सफलता व अनुकूल परिणाम प्राप्त करने के लिए तीव्र इच्छा, आस्था और अपेक्षा–इन तीन शक्तियों को भलीभांति समझ लेना और उन पर प्रभुत्व स्थापित कर लेना चाहिए।
    यह विचार एक ऐसे शिक्षक का है, जिसके एक शिष्य ने इन विचारों को न केवल आयुध बनाकर अपने जीवनयुद्ध में प्रयोग किया, अपितु इनसे जीवनयुद्ध का विजेता बनकर संसार के सर्वश्रेष्ठ आयुध्-निर्माताओं में से एक बना। जी हां, यह विचार है इयादुराई सोलोमन नाम के दक्षिण भारतीय शिक्षक और उनका यह शिष्य भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति डाॅ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का, जिन्होंने वैज्ञानिकी में स्वयं को समर्पित करके ‘मिसाइलमैन’ की उपाधि प्राप्त की।
    पं. जवाहरलाल नेहरू के बाद डाॅ. अब्दुल कलाम भारत के ऐसे पहले राजनेता थे, जिन्हें बच्चों का स्नेह प्राप्त था और ‘काका कलाम’ कहकर संबोधित किया जाता था। बच्चों को देश का भविष्य मानने वाले डाॅ. अब्दुल कलाम अकसर समय निकालकर छात्रों के बीच जाते और बच्चों के प्रश्नों के उत्तर बड़ी सहजता से देते और उन्हें भविष्य में कुछ करने के लिए प्रेरित करते। जीवन के मूल्य, आदर्श और सफलता के मंत्र बड़ी रोचक वाणी में बताते। उनके द्वारा लिखित आत्मकथा ‘विंग्स आॅफ फायर’ में उन्होंने भारतीय युवाओं को अपने विचारों और दृष्टिकोण से मार्ग दिखाया है। उनकी एक-एक बात प्रेरणादायी है। उनका समूचा जीवन ही प्रेरणादायी है।
    आज तकनीक के क्षेत्र में भारतीय युवाओं की बढ़ती संख्या का कारण डाॅ. अब्दुल कलाम की वह प्रेरणा ही है, जिसने देश को आधुनिक विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने में सक्षम किया है। डाॅ. कलाम भारतीय तकनीकी विकास को विज्ञान के हर क्षेत्र में लाने का समर्थन करते थे। उनका कहना था कि साॅफ्टवेयर का क्षेत्र सभी वर्जनाओं से मुक्त होना चाहिए, जिससे अधिक संख्या में लोग इसकी उपयोगिता का लाभ उठा सकें। इसी से सूचना तकनीक का विकास तीव्र गति से हो सकेगा। डाॅ. कलाम का राष्ट्रपति काल भारत के स्वर्णिम काल में से एक है। बिना किसी राजनीतिक विवाद के उन्होंने यूरोपीय देशों और पड़ोसी देशों से सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे और देश की विकास गति को थमने नहीं दिया। 25 जुलाई, 2007 को उनका कार्यकाल समाप्त हुआ और वे फिर से वैज्ञानिकी एवं तकनीक के क्षेत्र में आ गए।
    ऐसा कहा जाता है कि जब डाॅ. कलाम राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति के रूप में प्रवेश कर रहे थे तो उनके एक हाथ में एक थैला था, जो पांच वर्ष बाद जब वे वहां से कार्यमुक्त हुए तो उनके साथ ही था। वे शाकाहारी थे और अनुशासित जीवन व्यतीत करते थे। समय का उनकी दृष्टि में बड़ा महत्त्व था और इसके सदुपयोग के लिए वे व्यवस्थित चर्या का पालन करते थे।
    –इसी पुस्तक से
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Amrit Lal Nagar (Paperback)
    Amritlal Nagar
    90

    Item Code: #KGP-7008

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : अमृतलाल नागर
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार अमृतलाल नागर ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'किस्सा बी सियासत भठियारिन और एडीटर बुल्लेशाह का', 'एक दिल हजार अफसाने', 'जंतरर्-मंतर', 'मन के संकेत', 'लंगूर का बच्चा', ‘शकीला की माँ', 'सती का दूसरा ब्याह', 'ओढ़री सरकार', 'सूखी नदियाँ' तथा 'पाँचवाँ दस्ता' । संपादक द्वारा लिखी गई पुस्तक की भूमिका के माध्यम ते अमृतलाल नागर की समग्र कथा-यात्रा और उसके महत्त्व से भी सहज ही परिचित हुआ जा सकता है ।
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक अमृतलाल नागर की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Raakshas (Paperback)
    Shanker Shesh
    125

    Item Code: #KGP-48

    Availability: In stock

    राक्षस
    राक्षस एक जातिवाचक शब्द ही नहीं, मानसिकता द्योतक शब्द भी है। राक्षस वह है, जो सामान्य मानवीय स्वरूप के विरोध में रहता है ।
    इस नाटक में शंकर शेष ने मनुष्य की इसी वृत्ति को उभारा है । यहाँ रणछोड़दास, सुकालू और दुकालू ऐसे चरित्र हैं जो मनुष्य के भीतर छिपे प्रेम और द्वेष के संघर्ष को तीव्र करते है और फिर इस निर्णय पर पहुंचते हैं कि–
    अब नहीं रुकेगा कमल फूल
    अब नहीं गिरेगी
    आने वाले कल की आँखों में धूल
    अब गाँव हमारा नहीं रहेगा
    जड़ पत्थर की नाँव 
    राक्षस अपनी पूरी अमानवीय स्थिति के साथ हमें इस आशा की स्थिति तक एहुंचाता है ।
    शकर शेष द्वारा लिखा गया एक सशक्त नाटक ।

  • Aids : Kya? Kyon? Kaise? (Paperback)
    Kanval Nayan Kapoor
    50

    Item Code: #KGP-7104

    Availability: In stock


  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Nanak Singh (Paperback)
    Nanak Singh
    80

    Item Code: #KGP-7003

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : नानक सिंह
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार नानक सिंह ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'कुचले हुए पुष्प', 'लक्ष्मी-पूजा', 'अंतर्ज्ञान', ‘अछूते आम', 'चक्षुहीन संत', 'जर्जर खपरैल की एक स्लेट', 'स्नोफॉल', 'इनसान-हैवान', 'लंबा सफ़र' तथा 'जब हम में 'इनसान' प्रकट होता है' । 
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक नानक सिंह की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Teesara Gazal Shatak (Paperback)
    Sher Jung Garg
    50

    Item Code: #KGP-7051

    Availability: In stock

    ग़ज़ल शतकों में सम्मिलित कवि
    हिन्दी ग़ज़ल शतक
    उदयप्रताप सिंह ०  कुमार शिव ०  गोपालदास ‘नीरज’ ०   चिरंजीत ०  ज़हीर कुरैशी ०  ज्ञानप्रकाश विवेक ०  त्रिलोचन ०  दुष्यंत कुमार ०  देवेंद्र माँझी ०  प्रमोद तिवारी ०  बलबीर सिंह ‘रंग’ ०  बालस्वरूप राही ० भवानी शंकर ०  मासूम ग़ाज़ियाबादी ०  मृदुला अरुण ०  राजनारायण बिसारिया ०   रामकुमार कृषक ०  रामकुमार चतुर्वेदी ‘चंचल’ ०  रामदरश मिश्र ०  रामावतार त्यागी ०  शलभ श्रीराम सिंह ०  शिव ओम ‘अंबर’ ०  शेरजंग गर्ग ०  सुरेंद्र श्लेष ०  सूर्यभानु गुप्त।
    दूसरा ग़ज़ल शतक
    अशोक वर्मा ०  आचार्य सारथी ०  उपेन्द्र कुमार ०  उर्मिलेश ०  ओमप्रकाश चतुर्वेदी ‘पराग’ ०  कमल किशोर ‘भावुक’ ०  कमलेश भट्ट ‘कमल’ ०  कुँअर बेचैन ०  ज्योति शेखर ०   नरेन्द्र वसिष्ठ ०  पुरुषोत्तम ‘वज्र’ ०  प्रभात शंकर ०  महेश जोशी ०  योगेन्द्र दत्त शर्मा ०  रंजना अग्रवाल ०  रामनारायण स्वामी ०  रामनिवास ‘मानव’ ०  लक्ष्मण ०   विजय किशोर ‘मानव’ ०  विनीता गुप्ता ०  शिवबहादुर सिंह भदौरिया ०  श्रवण राही ०  सरोज व्यास ०  हरजीत ०   हरिओम।
  • Anton Chekhov Ki Kahaniyan (Paperback)
    Pramila Gupta
    160 136

    Item Code: #KGP-ACKK PB

    Availability: In stock

    अंतोन चेखव (1860-1904) की गणना न केवल रूसी साहित्य में अपितु विश्व साहित्य के शीर्ष कथाकारों में होती है। अपने छोटे से जीवन में उन्होंने रूसी भाषा में चार नाटक व अगणित कालजयी कहानियाँ लिखीं। उनकी कहानियाँ व नाटक साहित्य संपूर्ण विश्व के समालोचकों व समीक्षकों की दृष्टि में अप्रतिम हैं। वे पेशे से चिकित्सक थे। प्रारंभ में उन्होंने पढ़ाई का खर्चा निकालने के लिए लिखना शुरू किया। बाद में वे पूर्ण रूप से साहित्य को समर्पित हो गए। उनका  कहना था कि चिकित्सा उनकी धर्मपत्नी है तो साहित्य उनकी प्रेमिका। उनके साहित्य में तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था एवं आमजन की पीड़ा का सजीव चित्रण पाठकों को अभिभूत कर देता है। हिंदी साहित्यप्रेमी अंतोन चेखव के विपुल साहित्य का रसास्वादन करने के लिए सदैव लालायित रहते हैं। उनके साहित्य का हिंदी भाषा में आनंद लेने का एकमात्र विकल्प अनुवाद है। अनुवादक उनके साहित्य को हिंदी पाठकों तक पहुँचाने का यथासंभव प्रयास कर रहे हैं। अंतोन चेखव के समग्र साहित्य को भाषांतरित कर पाना दुष्कर कार्य है। चुनिंदा कहानियों का हिंदी अनुवाद करने का विनम्र प्रयास किया है। चेखव के विशद साहित्य में से कुछ कहानियों का चयन करना सरल नहीं। उनकी प्रत्येक कहानी विशिष्ट है। अतः स्वरुचि के आधार पर कहानियाँ चयनित की हैं। आशान्वित हूँ कि सुधी पाठकों को ये कहानियाँ पसंद आएँगी। - प्रमीला गुप्ता

  • Kavi Ne Kaha : Vijendra (Paperback)
    Vijendra
    120

    Item Code: #KGP-7022

    Availability: In stock


  • Panchtantra Ke Natak (Paperback)
    Shri Prasad
    50

    Item Code: #KGP-1363

    Availability: In stock


  • Isro Ke Rocket Evam Unki Vikas Sanskriti (Paperback)
    Dr. Suresh Chandra Gupta
    250

    Item Code: #KGP-582

    Availability: In stock

    भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जैसी उपलब्धि, देश में अन्य क्षेत्रों में कम ही दिखाई पड़ती है । ऐसा क्यों ?  प्रश्न स्वाभाविक है। वास्तव में, पूर्ण उत्तर लिए एक गंभीर खोज और अध्ययन की आवश्यकता है । लेखक का मानना है कि कार्य-संस्कृति की कमियां इसके प्रमुख कारण हैं । हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम ने इस तथ्य को समझा और उसके निराकरण का भरपूर प्रयत्न किया, और फलस्वरूप एक प्रभावी कार्य संस्कृति का आविर्भाव हुआ । लेखक के अनुसार, इस संस्कृति का विवरण देना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि रॉकेट विज्ञानं की चर्चा करना, क्योंकि, देश की प्रगति के लिए सभी कार्यक्रमों की सफलता अत्यावश्यक है और उसके लिए एक प्रभावशाली कार्य संस्कृति को अपनाना होगा । ऐसी एक कार्य संस्कृति का विवरण देना भी इस पुस्तक का उद्देश्य है । संक्षेप में, मानव संसाधन को संजोना, सामर्थ्य प्रदायक वातावरण निर्माण करना, पुरे देश को भागीदार बनाना तथा गुणता एवं विश्वसनीयता पर पूरा ध्यान देना, इस कार्य संस्कृति के मुख्य अंग हैं । 
  • Guftgoo : Sarhadon Ke Aar-Paar (Paperback)
    Prem Kumar
    150

    Item Code: #KGP-433

    Availability: In stock

    गुफ्तगू : सरहदों के आर-पार
    प्रेमकुमार की यह पुस्तक अपनी भिन्न विशिष्ट पद्धति और अभिव्यक्ति वाले साक्षात्कारों के माध्यम से पांच देशों के सात स्थापित-सुविख्यात साहित्यजीवियों की जिंदगी और लेखन के अनेक अनसुने-अनजाने प्रसंगों-हिस्सों से सहज-दिलचस्प ढंग से पाठक का परिचय कराती है। पांच देश-भारत, आस्ट्रिया, ईरान, पाकिस्तान और अमेरिका।  सात साहित्यजीवी--नैयर राही, आंद्रेयास वेबर, अली मुहम्मद मुअज्जनी, सलीमा हाशमी, अहमद फराज, इंतिजार हुसेन और मुनीबुरर्हमान। 
    इन बातचीतों के माध्यम से रचनाकारों के परिवेश, लेखन और लेखन-प्रक्रिया के बारे में तो आसानी और सहजता के साथ जाना-समझा जा ही सकेगा, भिन्न-भिन्न देशों व भाषाओं के पारस्परिक संबंधों, उनके बीच की सामाजिक-सांस्कृतिक समानताओँ-असमानताओँ, समस्याओं-संभावनाओं आदि को भी समझने-सुलझाने या विवेचित-विश्लेषित करने में मदद भी मिलेगी। तमाम तरह की बाडों-सीमाओं को लांघ-पारकर कोई सृजन या अभिव्यक्ति कैसे यहां-वहां सब कहीं स्वीकृत- समादृत हो पाते हैं-ऐसे कुछ सूत्रों-प्रश्नों के मूल और हल भी इन संवादों में ढूंढे-तलाशे जा सकते हैं ।
    अत्यंत अनौपचारिक, आत्मीय और विश्वासपूर्ण वातावरण में अप्रत्याशित ढंग से संभव-संपन्न हुई इन बातों- मुलाकातों का एक अहम और उल्लेख्य पक्ष यह भी है कि सात में से पांच बातचीतें सीधे-सीधे संबंधित साहित्यकारों से हुई हैं, जबकि दो रचनाकारों के जीवन-लेखन को उनके दो अत्यंत करीबी संबंधों के सोच और दृष्टि से जाना-समझा गया है। राही मासूम रजा की पत्नी नैयर राही ने अपने सर्जक-पति और फैज अहमद 'फैज' की बडी बेटी सलीमा हाशमी ने अपने रचनाकार पिता के जीने-सोचने, लिखने तथा उनके जीवन-मूल्यों, अभावों, संघर्षों आदि के बारे में बातों-बातों में बहुत कुछ समझा-बता देना चाहा है।
    निश्चय ही ये बातचीतें सुधी पाठकों, साहित्यसेवियों एवं शोधार्थियों के लिए पठनीय और उपयोगी सिद्ध होगी ।
  • Keral Ka Krantikari (Paperback)
    Vishnu Prabhakar
    40

    Item Code: #KGP-1122

    Availability: In stock


  • Kashmir : Raat Ke Baad (Paperback)
    Kamlesh Pandey
    80

    Item Code: #KGP-7027

    Availability: In stock

    कश्मीर : रात के बाद
    हिंदी के सुप्रसिद्ध कथाकार कमलेश्वर का कश्मीर से पुराना और गहरा लगाव रहा है । 'कश्मीर : रात के बाद' में लेखक के इस पुराने और गहरे कश्मीरी लगाव को शिद्दत से महसूस किया जा सकता है । एक गल्पकार की नक्काशी, एक पत्रकार की निर्भीकता, एक चेतस इतिहास-द्रष्टा की पैनी नज़र तथा इन सबके मूल में जन सामान्य से प्रतिश्रुत मानवीय सरोकारों से लैस यह यात्रा-वृत्तांत लेखक कमलेश्वर का एक और अप्रतिम योगदान है ।
    'कशमीर : रात के बाद' संभवत: हिंदी में पहला ऐसा मानक प्रयास भी है जो कैमरा और कलम को एक साथ इस अंदाज़ से प्रस्तुत करता है ताकि दोनों की अस्मिता पूर्णतः मुक्त भी रहे । शायद इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इस यात्रा-रिपोर्ताज में कश्मीर के बर्फीले तूफानों और चट्टानों के खिसकी का शाब्दिक 'रोमांच' मात्र नहीं है बल्कि यहाँ है-इतिहास और धर्म (युद्ध) को अपनी एकल परिभाषा देने के मंसूबों को तर्क  और विवेक के बल पर ध्वस्त कर सको की सहमतिजन्य प्रतिभा । कशमीर की राजनीति में, बल्कि कहे कि अराजक 'अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिज्' में यह लेखक मात्र पत्रकार का तटस्थ और निष्फल बाना धारण करके प्रवेश नहीं करता बल्कि वह एक ऐसे सच्चे और खरे इंसान के रूप में हस्तक्षेप करता है जो भारतीयता को जानता है और कश्मीरियत को पहचानता है । वह प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य-पाशा में बँधा, प्रकृति के अप्रत्याशित रौद्र रूप को, जान की बाजी लगाकर देखता है, तो वह आतंकवादियों के विष-की ठिकानों को भी अपने कलम और कैमरे के माध्यम से उदघाटित करता है । वास्तव में यही साहस इस यात्रा-वृतांत को अविस्मरणीयता सौंपता है ।
    इस पुस्तक में कश्मीर की कुछ खंडित यात्राएँ भी हैं जिनमें जन सामान्य के प्रति लेखक की प्रतिबद्धता को शब्द-दर-शब्द पढ़ा  और महसूस किया जा सकता है । परवर्ती यात्रा के रूप में कमलेश्वर ने सुलगते कश्मीर की उस झुलसन को शब्द दिए है, जिसे तमाम तकनीकी विकास के बाबजूद कैमरा पकड नहीं पाता । यह किताब मुद्रित शब्द और कैमरे के आधुनिक युग की सामर्थ्य  और सीमा का भी संभवत: अनुपम दस्तावेज साबित होगी ।
  • Kavi Ne Kaha : Vishnu Nagar (Paperback)
    Vishnu Nagar
    100

    Item Code: #KGP-1390

    Availability: In stock

    कवि ने कहा: विष्णु नागर
    कविता की दुनिया में तीन दशक से भी अधिक सक्रिय विष्णु नागर की प्रतिनिधि कविताओं के इस संकलन में आपको उनकी कविताओं में समय के साथ आता बदलाव तो दिखाई देगा ही, यह भी दिखाई देगा कि वह सिर्फ व्यंग्य और विडंबना के कवि नहीं हैं। उनकी कविता में जीवन के अनेक पक्ष हैं, क्योंकि वह जीवन को उसकी संपूर्णता में देखने का प्रयास करते हैं। वह अपने समय की राजनीति और समाज की विडंबनाओं को भी देखते हैं और जीवन के विभिन्न रूपों में पाई जाने वाली करुणा, प्रेम, हताशा, विनोद को भी। उनके यहाँ जीवन की आपाधापी में लगे लोगों पर भी कविता है और अपने प्रिय की मृत्यु की एकांतिक वेदना को सहते लोगों पर भी। उनकी कविता से गुजरना छोटी कविता की ताकत से भी गुजरना है जो अपनी पीढ़ी में सबसे ज्यादा उन्होंने लिखी है। उनकी कविता से गुजरना कविता की सहजता को फिर से हासिल करना है। उनकी कविता से गुजरना व्यंग्य और करुणा की ताकत से गुजरना है। उनकी कविता से गुजरना अपने समय की राजनीति से साहसपूर्ण साक्षात्कार करना है। उनकी कविता से गुजरना विभिन्न शिल्पों, अनुभवों, संरचनाओं से गुजरना है और इस अहसास से गुजरना है कि विष्णु नागर सचमुच अपनी तरह के अलग कवि हैं। उनकी कविता को पढ़कर यह नहीं लगता कि यह किसी के अनुकरण या छाया में लिखी गई कविता है। यह मुक्ति के स्वप्न की कविता है, संसार के बदलने की आकांक्षा की कविता है। यह इतनी स्वाभाविक कविता है, जितनी कि हिंदी हमारे लिए है।


  • Hindustan Aur Pakistan Ki Behatreen Urdu Haasya-Vyang Shaaeree (Paperback)
    T.N. Raj
    195

    Item Code: #KGP-7054

    Availability: In stock

    उर्दू ज़बान अपनी शीरीनी, लताफ़त और नज़ाकत के सबब सदियों से लोगों के दिलों पर राज कर रही है। उर्दू शायरी ख़ास तौर पर ग़ज़ल लिखने, पढ़ने, सुनाने या गाने वाला शख्स हमें कहीं न कहीं मिल ही जाता है । मीर, ग़ालिब, इकबाल, दाग, फ़ैज, फ़िराक़, जिगर और साहिर वग़ैरा की शायरी का जादू हमेशा बरकरार रहेगा । यह मानने में कोई हरज नहीं कि उर्दू की संजीदा शायरी के मुकाबले में अभी हास्य व्यंग्य कविता में बहुत-सी गुंजाइशें बाक़ी हैं । जहाँ तक उर्दू नस्र (गद्य) में हास्य-व्यंग्य का तआल्लुक है यह बात पूरे यकीन से कही जा सकती है कि इसमें अनमोल हीरों औरमोतियों की कोई कमी नहीं । 
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Uday Prakash (Paperback)
    Uday Prakash
    175

    Item Code: #KGP-377

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियां : उदय प्रकाश 
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार उदय प्रकाश  ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं: ‘मौसाजी’, ‘टेपचू’, ‘तिरिछ’, ‘अरेबा-परेबा’, ‘राम सजीवन की प्रेम-कथा’, ‘डिबिया’, ‘हीरालाल का भूत’, ‘दिल्ली की दीवार’, ‘...और अंत में प्रार्थना’ तथा ‘वारेन हेस्टिंग्स का सांड’।
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक उदय प्रकाश  की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Svasthya Evam Chikitsa (Paperback)
    Dr. Rakesh Singh
    160

    Item Code: #KGP-369

    Availability: In stock

    स्वास्थ्य एवं चिकित्सा 
    पुस्तक में स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न विषयों पर लगभग 41 लेख संकलित हैं। जो लोग यह कहते हैं कि चिकित्सा विज्ञान या इंजीनियरिंग आदि को केवल अंग्रेजी माध्यम से ही पकाया जा सकता है, उनके लिए ये लेख चुनौती हैं और सिद्ध करते हैं कि दुराग्रह से मुक्त होकर यदि राष्ट्रभाषा को उनका माध्यम बनाने का प्रयास किया जाए तो इन विषयों को हिंदी माध्यम से पढाया जा सकता है।
    स्वास्थ्य-लाभ के लिए दवाओं के उपयोग से अधिक स्वास्थ्य-रक्षा के बारे में ज्ञान होना आवश्यक है। इन लेखों में अधिकांशत: इस बात की ध्यान में रखा गया है। आजकल आम प्रवृति यह हो गई है कि लोग कुछ दवाओं का नाम याद कर लेते हैं और अपने आप उनका प्रयोग आरंभ कर देते हैं। उससे कितनी जानि हो सकती है, यह 'दवाओं के उपयोग में सावधानियाँ शीर्षक से स्पष्ट है। इसी प्रकार टॉनिक के अंधाधुंध प्रयोग की निस्सारता से भी सामान्य पाठकों को परिचित कराया गया है। 'हदय-रोग और आहार' शीर्षक लेख हृदय-रोगियों के लिए अत्यंत लाभदायक है। इसमें अधुनातन चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में नवीन अनुसंधानों को भी समाविष्ट किया गया है।
    पुस्तक की भाषा सरल, सुबोध एवं बोधगम्य है। अभिव्यक्ति आदि से अंत तक प्रसाद गुण-संपन्न है। कहीं भी उलझाने का उपक्रम दृष्टिगत नहीं होता, यह लेखक के भाषा-सामर्थ्व एवं उनके सफ़ल अभिव्यक्ति-कौशल का प्रतीक है।
  • Tumhare Liye (Paperback)
    Himanshu Joshi
    180 162

    Item Code: #KGP-7057

    Availability: In stock

    तुम्हारे लिए
    आग की नदी!
    नहीं, नहीं, यह दर्द का दरिया भी है, मौन-मंथर गति से निरंतर प्रवाहित होता हुआ ।
    यह दो निश्छल, निरीह उगते तरुणों की सुकोमल स्नेह-गाथा ही नहीं, उभरते जीवन का स्वप्निल कटु यथार्थ भी है कहीं । वह यथार्थ, जो समय के विपरीत चलता हुआ भी, समय के साथ-साथ, समय का सच प्रस्तुत करता है ।
    मेहा-विराग यानी विराग-मेहा का पारदर्शी, निर्मल स्नेह इस कथा की भावभूमि बनकर, अनायास यह यक्ष-प्रश्न प्रस्तुत करता है-प्रणय क्या है? जीवन क्या है ? जीवन की सार्थकता किसमें है ? किसलिए ?
    ० 
    बहुआयामी इस जीवंत मर्मस्पर्शी कथा में अनेक कथाधाराएँ हैं। अनेक रूप हैं, अनेक रंग। पर ऐसा क्या है इसमें कि हर पाठक को इसके दर्पण में अपना प्रतिबिम्ब दीखने लगता है ?
    ० 
    हिंदी के बहुचर्चित उपन्यासों में, बहुचर्चित इस उपन्यास के अनेक संस्करण हूए । मराठी, पंजाबी, कन्नड़, तमिल, उर्दू, अंग्रेजी आदि अनेक भाषाओं में अनुवाद भी । दूरदर्शन से धारावाहिक रूप में प्रसारण भी हुआ । ब्रिटेन की एक कंपनी ने आडियो कैसेट भी तैयार किया, जो लाखों श्रोताओं द्वारा सराहा गया ।
  • Million Dollar Not Tatha Anya Kahaniyan (Paperback)
    Malti Joshi
    80

    Item Code: #KGP-1419

    Availability: In stock

    मिलियन डॉलर नोट तथा अन्य कहानियां
    अम्मा ने जैसे ही पाउच आगे बढाया, मीनू ने एक झटके से हाथ हटा लिया, जैसे उसे बिजली का करंट लग गया हो, "नहीं अम्मा । अब मैं यह हार नहीं लूंगी ।"
    "क्यों? मेरी चीज है । मैं दे रही हूँ।"
    "हाँ, पर इस हार को लेकर तुम पता नहीं क्या-क्या सोच गई थीं। तुमने तो भाभी को भी कठघरे में खडा कर दिया था । कल को भाभी भी ऐसा कर सकती है । भाभी तो यही सोचेगी कि यह चीज तीन साल पाले ही तुमने मुझे दे दी होगी और किसी को बताया तक नहीं । वह तो सोचेंगी कि इस तरह तुमने और भी बहुत कुछ दिया होगा, जिसका उसे पता नहीं है । मैं तो शर्म के मारे भैया के सामने खडी भी न हो सकूंगी।  "
    "इसमें शर्म की क्या बात है ! क्या मुझे इतना भी हक नहीं है ?”
    "अम्मा, तुम्हारे हक से भी महत्त्वपूर्ण है भैया-भाभी का विश्वास, जो मैं तोड़ना नहीं चाहती । रिश्ते नाजुक होते हैं अम्मा, दर्पण की तरह । एक बार दरक गए तो किसी मतलब के नहीं रहते । और मैं इन रिश्तों को सहेजना चाहती हूँ। मैं चाहती हूं कि तुम्हारे जाने के बाद भी इस घर में मेरा दाना-पानी बना रहे । मैं जब-जब भारत आऊं, इस घर के दरवाजे मुझे खुले मिले ताकि मैं तुम्हारी यादों को फिर से जी सकूं । कल को मेरे बच्चों की शादियां हों तो मैं हक के साथ भात मांगने आ सकूं । ये मेरे पीहर की देहरी है अम्मा । मेरे लिए किसी भी हार से ज्यादा कीमती है । प्लीज, इसे मुझसे मत छीनो ।" और यह बात कहते- कहते मीनू का गला भर आया । आंखें छलछला आईं ।
    अम्मा ने आगे बढ़कर उसे गले से लगा लिया और उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए बोली, "अरे वाह, मेरी लाडो तो मुझसे भी ज्यादा समझदार हो गई है ।" और यह कहते हुए उनकी भी आवाज भीग गई थी। 
    -(इसी संग्रह की कहानी 'चंद्रहार' से)
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Suryabala (Paperback)
    Suryabala
    130

    Item Code: #KGP-417

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : सूर्यबाला
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार सूर्यबाला  ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'रेस', 'बिन रोई लड़की', 'बाऊजी और बंदर', 'होगी जय, होगी जय...हे पुरुषोत्तम नवीन !', 'न किन्नी  न', 'दादी और रिमोट', 'शहर की सबसे दर्दनाक खबर, 'सुमिन्तरा की बेटियां', 'माय नेम इश ताता' तथा 'सप्ताहांत का ब्रेकफास्ट'।
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक सूर्यबाला की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Aur Aagey Badhatey Raho (Paperback)
    Dr. Rashmi
    135

    Item Code: #KGP-467

    Availability: In stock

    जीवन व साहित्य में सदुपदेश, सत्संग और सुभाषित का विशेष महत्त्व है। इनमें अनुभवों का ऐसा खजाना होता है जो किसी को भी समृद्ध कर सकता है। यही कारण है कि साहित्य में प्रारंभ से ही नीति-कथाओं का प्रचलन है। ये कथाएं प्रेरणा देती हैं, संघर्ष करना सिखाती हैं, असमंजस में उलझे मन को उचित निर्णय लेने की शक्ति देती हैं और समग्रतः जीना सिखाती हैं। ‘...और आगेबढ़ते रहो’ प्रेरक प्रसंगों की एक ऐसी ही रोचक पुस्तक है। लेखिका डॉ. रश्मि ने बड़ी कुशलता से उपयोगी जीवन सूत्रों को प्रस्तुत करते हुए उनमें निहित संदेश भी रेखांकित कर दिया है।
    इन प्रेरक प्रसंगों में मूलतः नैतिक शिक्षा छिपी है। वह नैतिकता जिसके बिना सार्थक, संतुलित और स्वस्थ मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। ऐसी प्रेरक कथाएं वर्षों से समाज में सत्य, प्रेम, अहिंसा, त्याग और सहनशीलता के बीज बोती रही हैं। पहले घर-परिवार में बड़े बुजुर्ग, जैसे--दादी-दादा, नानी-नाना ऐसी बहुत सारी कहानियां सुनाते थे। बहाने-बहाने से बच्चे उनसे बहुत कुछ ऐसी बातें सीखते थे जो जीवनपर्यंत याद रहती थीं। आज समय बदल गया है। क्या बड़े, क्या बच्चे--सब अपनी-अपनी जगह व्यस्त हैं। प्रेरक प्रसंगों से भरी कहानियां सुनाने का जिम्मा पुस्तकों ने ले लिया है। इस बात का अनुभव पाठक यह पुस्तक पढ़ते हुए करेंगे। सीधी सुगम भाषा और प्रवाहपूर्ण शैली में लिखी ये रचनाएं पाठकों को प्रभावित व प्रेरित करेंगी--ऐसा हमारा विश्वास है।
  • Kartavya (Paperback)
    Samual Smiles
    125

    Item Code: #KGP-7034

    Availability: In stock

    कर्तव्य
    चौबीस वर्ष पूर्व मैंने ‘आत्मनिर्भरता’ (Self Help)  पुस्तक लिखी थी। तीन वर्ष उपरांत सन् 1853 में वह प्रकाशित हुई। वह पुस्तक संयोग से ही लिखी गई थी। मैंने ‘लीडस’ स्थान पर नवयुवकों के सम्मुख कुछ भाषण दिए थे। उन भाषणों में मैंने इस बात पर जोर दिया था कि उनके जीवन की प्रसन्नता व सफलता मुख्यतः उनके निरंतर आत्मसंस्कार, अनुशासन, संयम और सबसे अधिक ईमानदारी व साहस सेकर्तव्यपालन करने पर निर्भर करती है। मेरे इन भाषणों का आशा से अधिक प्रभाव हुआ।
    अपने व्यवसाय से अवकाश मिलने के बाद सायंकाल का समय मैं अपनी पुस्तक के लेखन में लगाता था। पुस्तक जब पूरी हो गई, तो मैंने उसे लंदन के एक प्रकाशक के पास भेजा। क्रीमिया के युद्ध के कारण उन दिनों पुस्तकें प्रायः बहुत कम बिकती थीं। इसलिए प्रकाशक ने धन्यवाद सहित मेरी पुस्तक लौटा दी। ‘जार्ज स्टीफेंसन का जीवन-चरित्र’ छपने के बाद ही श्री मूरे की कृपा से ‘आत्मनिर्भरता’ प्रकाशित हो सकी। 
    इसके तेरह वर्ष पश्चात् मेरी पुस्तक ‘चरित्र’ प्रकाशित हुई। इस पुस्तक में मैंने महापुरुषों के चरित्रों को चित्रित करने का प्रयत्न किया, क्योंकि नवयुवकों को संस्कार देने का यह सर्वोत्तम ढंग है। इसके पाँच वर्ष बाद मेरी पुस्तक ‘बचत’ (Thrift) प्रकाशित हुई। इसमें मैंने श्रम के महत्त्व और बचत के लाभों पर जोर दिया था। 
    इनके पाँच वर्ष उपरांत इसी क्रम की अंतिम पुस्तक ‘कर्तव्य’ प्रकाशित हो रही है। मुझे आशा है कि पिछली पुस्तकों की तरह यह भी पाठकों एवं बुद्धिजीवियों को आकर्षित करेगी। इस पुस्तक में मैंने सर्वोत्तम और साहसी स्त्री-पुरुषों के उदाहरण दिए हैं। महापुरुषों के जीवन हमें यह शिक्षा देते हैं कि हम भी उन्हीं की तरह कार्य कर सकते हैं। जो व्यक्ति कर्तव्य की उच्च अवस्था को प्राप्त कर लेता है, वह महान् बन जाता है।   
    —सैमुअल स्माइल्स
  • Hindi Gazal Shatak (Paperback)
    Sher Jung Garg
    80

    Item Code: #KGP-1334

    Availability: In stock

    हिन्दी ग़ज़ल शतक
    उर्दू में ग़ज़ल कहने की परंपरा बहुत पुरानी है । मीर, गालिब, जौक, सौदा से लेकर जिगर, सजाना, फैज, साहिर और उनके बाद की अनेक पीढियों तक ग़ज़ल उर्दू शायरी का जरूरी हिस्सा रही है । इधर हिंदी में भी ग़ज़ल ने अपनी एक परंपरा बना ली है और निराला, प्रसाद, रामनरेश त्रिपाठी, हरिकृष्णा 'प्रेमी', शंभुनाथ शेष, विजित, त्रिलोचन, शमशेर, बलवीर सिंह रंग, दुश्यंत कुमार और उनके बाद छंदबद्ध लिखने वालों की लगभग पूरी की पूरी पीढ़ी  ग़ज़ल -लेखन से जुड़ गई है। कहना ही होगा कि हिंदी ग़ज़ल  के क्षेत्र में पूरे भारत में लगभग हजार से अधिक रचनाकार अपने ढंग से, अपने रंग में, अपनी शक्ति और सामर्थ्य के साथ ग़ज़लें कह रहे हैं । असलियत यह है कि आज काव्य-मंचों पर, पत्र-पत्रिकाओं में, पुस्तक प्रकाशन में ग़ज़ल का बोलबाला है ।
    इतने व्यापक रचना-संसार में निश्चय ही बहुत-सी ग़ज़लें ऐसी है, जिन्हें काव्यपेमी बार-बार पढ़ना और अपने पास सँजोकर रखना चाहेंगे । प्रस्तुत 'हिन्दी ग़ज़ल शतक' में ग़ज़ल को विविध शैलियों में लिखने वाले पच्चीस ग़ज़लकारों की चार-चार ग़ज़लें दी जा रही है, जो हिंदी ग़ज़ल  के वैविध्य को निश्चय ही प्रभावकारी अंदाज में पेश करती है ।
  • Vyangya Samay : Ravindranath Tyagi (Paperback)
    Ravindra Nath Tyagi
    225

    Item Code: #KGP-7218

    Availability: In stock

    रवीन्द्रनाथ त्यागी का रंग व्यंग्य में सबसे निराला है। उनका अध्ययन व्यापक था। स्मृति अच्छी होने से संदर्भ सामने रहते थे। संदर्भों को प्रसंग देकर रचने की विलक्षण योग्यता उनके पास थी। यही कारण है कि त्यागी के व्यंग्य पढ़ते हुए पाठक को आनंद के साथ ज्ञान भी उपलब्ध होता है। बतरस इतना है कि गांव की गोरी पर लिखते हुए प्राकृत से लेकर पेरिस तक अभिव्यक्ति का विस्तार हो सकता है। व्यंग्य में सहज हास्य के वे आचार्य हैं। दफ्रतरशाही,  शृंगार, प्रकृति और अद्भुत तथ्य–प्रायः इन क्षेत्रों से वे विषय चुनते हैं। संस्कृत और अन्य भाषाओं से उद्धरण देते हुए त्यागी व्यक्तिगत समस्याओं से लेकर राष्ट्रीय प्रश्नों तक बात करते हैं। कई बार लगता है कि उनके लेखन का उद्देश्य निर्मल हास्य की सृष्टि करना है। यह कठिन काम उन्होंने सरलता से किया है। हास्य में आ जाने वाली दुराग्रही वृत्ति उनके लेखन में नहीं है। वे सिद्धांतो से नहीं, आसपास के तथ्यों या व्यक्ति वैचित्रय से हास्य के क्षण निर्मित करते हैं। ‘व्यंग्य समय’ में रवीन्द्रनाथ त्यागी के चयनित व्यंग्य उनके विस्तृत व्यंग्य लेखन से कुछ उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। पाठकों को रचनाकार को समग्रता में पढ़ने और पुनः पाठ के लिए प्रेरित करने का उद्देश्य भी इस उपक्रम में निहित है।
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Phanishwar Nath Renu (Paperback)
    Phanishwarnath Renu
    150 128

    Item Code: #KGP-516

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : फणीश्वरनाथ रेणु
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'रसप्रिया', 'नैना जोगिन', 'तीर्थोदक', 'तॉबे एकता चलो रे', 'एक श्रावणी दोपहरी की धूप', 'पुरानी कहानी : नया पाठ', 'भित्तिचित्र की मयूरि, 'आत्म-साक्षी', 'एक आदिम रात्रि की महक' तथा 'तीसरी कसम, अर्थात् मारे गए गुलफाम'  ।
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक फणीश्वरनाथ रेणु की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Bhagwandas Morwal (Paperback)
    Bhagwan Das Morwal
    150

    Item Code: #KGP-476

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : भगवानदास मोरवाल
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार भगवानदास मोरवाल ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'महराब', 'बस, तुम न होते पिताजी', 'दु:स्वप्न की मौत', 'बियाबान', 'सौदा', 'चोट', 'रंग-अबीर', 'सीढियां, माँ और उसका देवता', 'वे तीन' तथा 'छल'।
    हमेँ विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक भगवानदास मोरवाल की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Kavya Shatabdi (Paperback)
    Anamika
    160

    Item Code: #KGP-7088

    Availability: In stock

    काव्य शताब्दी
    हिंदी समाज जिन चार बड़े कवियों की जन्मशती व्यापक स्तर पर और गहरे लगाव के साथ मना रहा है, उन्हें एक जगह और एक जिल्द में देखना जितना रोमाचंक है उतना ही सार्थक भी । छायावादोत्तर कविता के प्रतिनिधि शमशेर बहादुर सिंह, अज्ञेय, केदारनाथ अग्रवाल और नागार्जुन अपनी संवेदना, सरोकार और शिल्प के स्तर पर एक-दूसरे से काफी भिन्न हैं, लेकिन उनके रचनात्मक विवेक से कई समानताएं हैं और वे बड़े  संक्रमणों, व्यक्ति और समाज के मुक्ति-प्रयासों से उद्वेलित एक युग के काव्य-द्रष्टा हैं । इन कवियों के विपुल रचना-संसार में से पंद्रह ऐसी कविताओं का चयन करना जो उनके समग्र व्यक्तित्व को रेखांकित कर सके, निश्चय ही एक कठिन काम था, जिसे दोनों संपादकों ने सूझबूझ के साथ संभव किया है । इनमें से नागार्जुन को छोड़कर बाकी तीनों कवियों की रचनावलियां  उनके जन्मशती वर्ष में प्रकाशित नहीं हो पाई हैं और नागार्जुन की संपूर्ण रचनाएं भी उनके निधन के बाद ही प्रकाश में आ पाईं । इस विडंबना-भरी स्थिति में यह चयन और भी महत्वपूर्ण  हो उठता है ।
    'काव्य शताब्दी' में चारों कवियों की वे रचनाएं तो शामिल हैं ही, जिन्हें श्रेष्ठ या प्रतिनिधि कविताएं माना जाता है, लेकिन इसके साथ ही उनके क्राव्यात्मक विकास के वर्णक्रम को भी इनमें हम दख सकते है । इस तरह हर कवि के विभिन्न संवेदनात्मक पड़ावों और विकास प्रक्रियाओं की तस्वीर उजागर होती चलती है । शमशेर 'प्रेम' शीर्षक कविता से लेकर "काल तुझसे होड़ है मेरी' तक अपनी समूची शमशेरियत के साथ झलक उठते हैं हैं तो अज्ञेय की प्रयोगशीलता 'कलगी बाजरे की' से लेकर 'नाच' और 'घर' तक चली जाती है । नागार्जुन हमारे ग्राम समाज, उसकी नैसर्गिकता के साथ-साथ अपने गरजते- गूंजते राजनीतिक प्रतिरोध जारी रखते हुए दिखते हैं तो केदारनाथ अग्रवाल केन नदी के पानी और साधारण जन के भीतर बजते हुए लोहे के साथ उपस्थित हैं । इस चयन का एक और आकर्षण वे आलेख हैं, जिनसे समीक्षा की प्रचलित रूढियों से अलग इन कवियों की एक नए ढंग से पढने की गंभीर कोशिश दिखाई देती हे ।
    --मंगलेश डबराल 
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Rabindra Nath Thakur (Paperback)
    Rabindra Nath Thakur
    90

    Item Code: #KGP-7013

    Availability: In stock

    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार रवीन्द्रनाथ ठाकुर के प्रस्तुत संकलन में जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'अनधिकार प्रवेश', 'मास्टर साहब', 'पोस्टमास्टर', 'जीवित और मृत', 'काबुलीवाला', 'आधी रात में', 'क्षुधित पाषाण', 'अतिथि', 'दुराशा' तथा 'तोता-कहानी'।
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक रवीन्द्रनाथ ठाकुर की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Kuchh Kahi Kuchh Ankahi (Paperback)
    Sheela Jhunjhunwala
    245

    Item Code: #KGP-296

    Availability: In stock

    कूछ कही कुछ अनकही
    ...निहायत दिलचस्प शैली, प्रवहमान भाषा-परिवार से लेकर पूरे परिवेश तक से जुडे लोग और स्थितियां...यह किताब शुरु से अंत तक रहस्य/रोमांच/प्रेम/संघर्ष/राजनीती/ परिवार/प्रशासन/टकराव/उपलब्धि और फिर नियति के अनेकानेक खेलों से साक्षात्कार कराती है...
    झुनझुनवाला जी रेवेन्यु डिपार्टमेंट के एक आला अफसर थे । छापे डालने के तनावपूर्ण क्षणों में ये लोग किस-किस तरह के खतरे उठाते हैं…धन की दुनिया से किस तरह के प्रलोभन और हथकंडे काम में लाए जाते है और उस चक्रव्यूह को भेदने में ये लोग क्या-क्या पापड बेलते हैं, यह शायद पहली बार इस किताब से जानने को मिलेगा । समसामयिक राजनीति और शासन तंत्र के अनुभवों पर सटीक टिप्पणियों के साथ-साथ इस पुस्तक से आपातकाल संबंधी कतिपय प्रचलित धारणाओं के बारे में एक नए पहलू से सोचने का मौका भी मिलेगा।
    --कन्हैयालाल नंदन (नई दुनिया से)
    इतनी आसान, इतनी सहज।  ऐसा लगता है कि आप अपने गली-कूचे के बारे से बात कर रहे हैं । चाहे वह कानपुर हो या इलाहाबाद या बंबई, शीलाजी ने अपने समय का अत्यंत जीवंत चित्रण किया है और मुश्किल बातो को भी सरलता से, सहजता से और अपनत्व से कहा है । एक ईमानदार किताब जिसमें से हर क्षण ईमानदारी झलकती दिखाई देती है । -कमलेश्वर
    'कही-अनकही' में बनावट कहीं नहीं है । सब कुछ सहज भाव से कहा गया है । कहीं-कहीं तो ऐसा लगता है कि हम कोई उपन्यास पढ़ रहे है, रहस्य-रो,मांच से भरा उपन्यास और कही-कही अंतरंग, आत्मिक क्षणों को दिखाता हुआ गृहस्थ जीवन।  एक क्षण को भी नहीं लगा कि यह वर्णन कृत्रिम है । -विष्णु प्रभाकर
    रूढ़ियों को भेदकर स्वतन्त्रता की चिनगारियों के साथ-साथ परिवार में तालमेल बिठाने जैसी घटनाएं सार्थक संदेश देती हैँ। -डॉ. शेरजंग गर्ग
    ...बहुत कुछ होने के साथ-साथ बेहद इनसानी रिश्तों की झलक । -नासिरा शर्मा
    'कुछ कही कुछ अनकही' एक मर्यादित प्रेम-प्रसंग के बाद जिंदगी की जद्दो-जहद से गुजरते हुए जहां पहुँचती है वहाँ आसपास के लोग भी उसका एक हिस्सा हो जाते हैं । विवरण रोचक, प्रवाहपूर्ण और तथ्यपरक हैँ। आत्मकथा होते हुए भी यह संयमित है, मर्यादित है और आत्म-श्लाया  से परे है । -पदमा सचदेव
    ...रहस्य, रोमांच, तिलिस्म, रोमांस-सब एक जगह इकट्ठा कर दिया गया है। ...मर्यादित जीवन के सिद्धांत को पकडे हुए अपने समय का जीवंत खाका ।
    -वसंत साठे
    ...महानगरों में रहने वाले मध्यमवर्गीय लोगों के जीवन के दिन-प्रतिदिन की ऊहापोह और जिजीविषा की खोज में आगे बढ़ते जाने की ललक जगह-जगह आभासित होती है। -डॉ. क्षमा गोस्वामी (वागर्थ से)
    ...सभी प्रणय-चित्रों में गरिमापूर्ण और सधी हुई मानसिकता के साथ एक सतत ठहराव है, छिछोरापन या आजकल जैसा उर्च्छाखाल प्रेम नहीं है-वह जो सीमाएं लांघकर बह जाता है । -डॉ. कुसुम अंसल (संचेतना में)
    सुख-दु:ख, हर्ष-विषाद, राग-विराग सबसे मिलकर बना है जीवन और इसी में उसकी संपूर्णता है । तटस्थ भाव से जो इस संपूर्णता की अनुभूति करता है, वही एक सफल संस्मरण-लेखक भी होता है । इस बात का अहसास 'कुछ कहीँ कुछ अनकही' पढ़कर और अधिक हुआ ।...यह पुस्तक अपने समय को ईमानदारी से रेखांकित करती है ।
    -राधेश्याम (दैनिक हिंदुस्तान में)
    स्त्री-विमर्श का यह आत्मवृत्त अपने निजी, वैयक्तिक अनुभवों और अनुभूतियों से गुजरता हुआ सामाजिक- सार्वजनिक दृष्टि को मुकम्मल रूप में हमारे सामने परिभाषित करता है ।
    -लक्ष्मीकांत मुकुल (समकालीन भारतीय साहित्य में)
    पुस्तक ने भारतीय महिला पत्रकार की आंखों से देखे हुए एक बेहद रोचक कालखंड को जिया है । प्रथम पृष्ठ से अंतिम पृष्ठ तक यह रोचकता, रोमांच और कहीं-कहीं रूमानी वासंतीपन लिए हुए है। मार्मिक क्षण भी हैं ।
    -पाञ्चजन्य 
    …कहानी, संस्मरण, यात्रा-वृत्तांत, पत्र, डायरी आदि अनेक चिताओं से साक्षात्कार कराती एक अत्यंत पठनीय पुस्तक ।
    -रवीन्द्र कालिया
  • Anuvad Vigyan : Siddhant Evam Pravidhi (Paperback)
    280 252

    Item Code: #KGP-230

    Availability: In stock

    अनुवाद विज्ञान : सिद्धांत एवं प्रविधि
    लंबे समय से अनुवाद पर एक ऐसी प्रामाणिक पुस्तक की कमी महसूस की जा रही थी जो सभी प्रकार के पाट्यक्रमों की ज़रूरत को तो पूरा करती ही हो, साथ ही शोधार्थियों, अनुवाद के शिक्षकों, प्राध्यापकों के लिए उपयोगी होने के साथ-साथ अनुवाद कार्य से जुडे अनुवादकों तया अनुवाद व्यवसाय से जुड़े सभी व्यक्तियों के लिए उपयोगी हो ।
    इस पुस्तक में अनुवाद विद्वान की समस्त प्रविधियों व सिद्धांतों का विवेचन-विशलेषण भी किया गया है तथा जुत्ताई, 2008 तक अनुवाद के क्षेत्र से हुए चिंतन एव शोधों को समाहित करते हुए इस अनुवाद पर अद्यतन एवं प्रामाणिक पुस्तक के रूप में तैयार किया गया है । इसलिए इसका पुराना नाम 'अनुवाद विज्ञान' न रखकर इसे अनुवाद विज्ञान : सिंद्धांत एवं प्रविधि' नाम दिया गया है, क्योंकि  यह पुस्तक नवीनतम उदभावनाओं व विचारों से युक्त है तथा  मेरे 30 वर्षों से भी अधिक के अनुवाद के अनुभवों को समेटे हुए है । मुझे विश्वास है कि यह पुस्तक अपने उद्देश्य में अवश्य ही सफल होगी तथा विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, अनुवादकों व अनुवाद के गंभीर अध्येताओं के लिए भी समान रूप से उपादेय सिद्ध होगी ।
    -डों० जयन्तीप्रसाद नौटियाल
    (संपादक)
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Hari Shankar Parsai (Paperback)
    Hari Shankar Parsai
    100

    Item Code: #KGP-7196

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियां
    हरिशंकर परसाई

    ‘दस प्रतिनिधि कहानियां’ सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिंदी कथा-जगत् के शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है।

    इस सीरीज़ में सम्मिलित दिवंगत कथाकारों की कहानियों के चयन के लिए उनके कथा-साहित्य के प्रतिनिधि एवं अधिकारी विद्वानों तथा मर्मज्ञों को संपादन-प्रस्तुति हेतु आमंत्रित किया गया है। यह हर्ष का विषय है कि उन्होंने अपने प्रिय कथाकार की दस प्रतिनिधि कहानियों को चुनने का दायित्व गंभीरता से निबाहा है।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के 
    लिए अग्रज कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के अत्यंत महत्त्वपूर्ण कथाकार हरिशंकर परसाई की जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं: ‘भोलाराम का जीव’, ‘सुदामा के चावल’, ‘तट की खोज’, ‘इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर’, ‘आमरण अनशन’, ‘बैताल की छब्बीसवीं कथा’, ‘एक लड़की, पांच दीवाने’, ‘चूहा और मैं’, ‘अकाल उत्सव’ तथा ‘वैष्णव की फिसलन’।
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात कथाकार हरिशंकर परसाई की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद संतोष का अनुभव करेंगे।
  • Drishtidesh Mein Ekaaek (Paperback)
    Narendra Kohli
    45

    Item Code: #KGP-7102

    Availability: In stock


  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Sudha Arora (Paperback)
    Sudha Arora
    180

    Item Code: #KGP-420

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : सुधा अरोड़ा 
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार सुधा अरोड़ा  ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'महानगर की मैथिली', 'सात सौ का कोट', 'दमनचक्र', 'दहलीज पर संवाद', 'रहोगी तुम वहीं', 'बिरादरी बाहर', 'जानकीनामा', 'यह रास्ता उसी अस्पताल को जाता है', ‘कांसे का गिलास' तथा 'कांच के इधर-उधर'।
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक सुधा अरोड़ा की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Hindu Sanskars (Paperback)
    M.L. Ahuja
    125 113

    Item Code: #KGP-357

    Availability: In stock

    The SANSKARAS are rites of passage finding varied acceptance among religious adherents of Hinduism, Jainism and some schools of thought in Buddhism. Hinduism prescribes norms to groom youngsters with values. The values as reflected in sanskaras facilitate the process of adaptation of the behaviour patterns of our children and the process of their socialization. These sanskaras should inculcate in our children the norms to purify, refine and adorn their inner conscience.
    The book, Hindu Sanskaras Sacraments and Rituals in Life’s Journey, is an exposition of the principles enunciated in the Hindu scriptures. This profusely illustrated book provides guidelines for young boys and girls on the threshold of conjugal life. It provides them lucid explanation of sanskaras and human life, Hindu beliefs and rituals, essence of Hindusanskaras, the Vedic and astrological concepts of garbadharan or conception of a child, naming of the baby, baby's first tonsure, importance of sacred thread ceremony, the process of conducting puja or veneration, the significance of idol worship, The underlying purpose of using bindi or tilak, the ritual of observing Karva Chaauth by married women  to pray for the longevity of their husbands, funeral rites and the system of ancestral worship yet form an essential ingredient of the book. The book also provides explanation of rituals like parikarma, ringing of bell, hovering of hands on lighted lamp after concluding prayer, the importance of 108 and breaking of coconut. 
    It is a useful book for all those wishing to know Indian culture, traditions and mythology. It needs to be read by parents for inculcating values among their children, and young boys and girls to carve an ideal approach in life. 
  • Kavi Ne Kaha : Ashok Vajpayee (Paperback)
    Ashok Vajpayee
    90

    Item Code: #KGP-1432

    Availability: In stock


  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Amrita Pritam (Paperback)
    Amrita Pritam
    80

    Item Code: #KGP-1518

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : अमृता प्रीतम
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ 'किताबघर' की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    'किताबघर' गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए अग्रज कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कथाकार अमृता प्रीतम ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'बृहस्पतिवार का व्रत', 'उधड़ी हुई कहानियाँ', 'शाह की कंजरी', 'जंगली बूटी', 'गौ का मालिक', 'यह कहानी नहीं', 'नीचे के कपड़े', 'पाँच बरस लम्बी सड़क', 'और नदी बहती रही' तथा 'फैज की कहानी'।
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात कथाकार अमृता प्रीतम की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Ek Qatara Khoon (Paperback)
    Ismat Chugatai
    250

    Item Code: #KGP-97

    Availability: In stock

    उर्दू की प्रख्यात लेखिका इस्मत चुगताई द्वारा मुस्लिम इतिहास की उस महान् गाथा का कलमबंद बयान, जो विश्व की करुणतम मानवीय गाथाओं में विशिष्ट स्थान रखती है। यह गाथा है मानव के बुनियादी अधिकार के लिए अडिग संघर्ष, अदम्य शौर्य और अद्भुत बलिदान की-कर्बला ! पैगंबर हज़रत मुहम्मद साहब के नवासे और हज़रत अली के सुपुत्र इमाम हुसैन के सपरिवार जौहर और शहादत की हृदयद्रावक दास्तान। फ़र्ज़ और हक की सत्ता के विरुद्ध जद्दोजहद की एक महान् गाथा ! इसी दास्तान ने उर्दू साहित्य की बेमिसाल धरोहर-अनीस और दबीर के मर्सियों को जन्म दिया। ये मर्सिये केवल उर्दू बल्कि भारतीय करुण काव्य की महान् निधि हैं। यह वही दास्तान है, जिसका स्मरण अकीदत के साथ मुहर्रम में किया जाता है। इस्मत चुगताई की इस महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक कृति को हिंदी प्रकाशन की एक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करते हुए हम गौरव अनुभव करते हैं। हमने इस पुस्तक को उर्दू से अनूदित करवाकर केवल लिप्यंतरण के साथ प्रस्तुत किया है ताकि उर्दू भाषा का मौलिक रसास्वादन पाठकों को उपलब्ध हो। कठिन शब्दों का अनुवाद फुटनोट्स में मौजूद है। हमें विश्वास है कि हिंदी जगत् में इस कृति को समुचित सत्कार प्राप्त होगा।
  • Lokmanya Baalgangadhar Tilak : Jeevan Darshan (Paperback)
    M.A. Sameer
    160

    Item Code: #KGP-490

    Availability: In stock

    1857 की क्रांति ने जो बयार बहाई, उसने घर-घर में मन को छुआ और अगले स्वातंत्र्य समर की—जो अनवरत था और शांत भले ही था, लेकिन थमा नहीं था—रूपरेखा बना दी। इस उत्तरार्द्ध में केवल जोशीले राष्ट्रभक्त ही नहीं हुए बल्कि बौद्धक क्रांति का बिगुल बजाने वाले लोकमान्य बालगंगाधर तिलक असाधारण चिंतक और वक्ता थे जिन्होंने अंग्रेजों की नींद उड़ा दी।
    यह पुनर्जागरण का काल था, जिसने समूचे राष्ट्र को एक सूत्र में बांध। इस काल में अनेक राष्ट्रभक्तों का योगदान रहा, जिनमें बालगंगाधर तिलक को राष्ट्रीय आंदोलन की गरम विचारधारा का प्रणेता माना गया। तिलक वह नेता थे, जिनकी अगुवाई में राष्ट्रभक्तों ने अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए विवश कर दिया। यह पुस्तक ‘लोकमान्य बालगंगाधर तिलक : जीवन दर्शन’ इसी गाथा को अपने में समेटे हुए है।
  • Kavi Ne Kaha : Neelesh Raghuvanshi (Paperback)
    Nilesh Raghuvanshi
    140

    Item Code: #KGP-7020

    Availability: In stock

    किसी कवि का कथन है कि कविता हमारे चारों ओर चीज़ों, घटनाओं, गतियों, स्थितियों, ध्वनियों, आहटों और अंतरालों में हर समय मौजूद होती है, वह हमारे आसपास तैरती रहती है और एक समर्थ कवि उसे पहचानकर एक परिचित शक्ल दे देता है। नीलेश रघुवंशी अपने दौर के पुरुष और महिला कवियों से इस रूप में अलग हैं कि उनके लिए कविता हमारे सामान्य निम्नमध्यवर्गीय जीवन से अलग, विभिन्न या उससे उच्चतर काम नहीं है बल्कि वह उसी जीवन के भीतर घटित होती है। उनकी कविता अपने समय के भौतिक और मानसिक द्वंद्वों को अनदेखा करके अभिव्यक्ति का कोई अपरिचित लोक नहीं रचती। वह जीवन को जारी रखने वाले कामों का निषेध नहीं करती बल्कि उन्हीं कामों में से अपने को उत्पन्न करती रहती है।
    जीने की उष्मा और ललक से भरी ये कविताएँ समकालीन कविता में नीलेश की नई पहचान को रेखांकित करती हैं। ‘पहली रुलाई तक की डायरी’ जैविक स्त्री-बोध का क्रमिक दस्तावेज है, जो शायद हिंदी में पहली बार इतनी प्रामाणिकता के साथ दर्ज हुआ है। इस काव्यात्मक डायरी को जो बात सबसे अधिक  विश्वसनीय बनाती है, वह अजन्मे शिशु के साथ माँ की वह चुहल है, जो प्रायः इसके हर टुकड़े में मिल जाएगी। ‘जन्म देना एक यातना से गुजरना है’--इस पंक्ति को लिखने वाली यह कवयित्री ही यह क्रीड़ाभरी पंक्ति भी लिख सकती है--‘मैं लिख रही हूँ डायरी और तुम बंदर बने हुए हो--तुमने तो मेरे पेट को खेल का मैदान बना रखा है।’ जन्म देने के सर्जनात्मक उल्लास से भरी ये कविताएँ समकालीन कविता में कुछ नया जोड़ती हैं।   
  • Paarijat (Paperback)
    Nasera Sharma
    390 371

    Item Code: #KGP-299

    Availability: In stock


  • Saphalata Ka Rahasya (Paperback)
    Jagat Ram Arya
    30

    Item Code: #KGP-7086

    Availability: In stock

    सफलता का रहस्य
    जीवन में सफलता की चाहना सब रखते हैं, लेकिन सफल हो नहीं पाते। ऐसा न होने पर कोई भाग्य को कोसता है, कोई हालात को। जबकि सफलता हमारे अपने व्यवहार पर ज्यादा निर्भर है, न कि किन्हीं और बाह्य कारणों पर।
    सफलता के आधारभूत सूत्र हैं-शुद्ध व्यवहार, सीखने की प्रवृत्ति, आत्मनिर्भरता, संतोष तथा और भी बहुत कुछ।
    आर्य जी ने अपनी इस पुस्तक में सफलता के रहस्यों की सरल-सुबोध भाषा में व्याख्या की है। पुस्तक पठनीय तो है ही, जीवन से लिए गए सच्चे उदाहरणों के चलते संग्रहणीय भी बन पड़ी है।
  • Dena Paavna (Paperback)
    Sharat Chandra Chattopadhyaya
    140

    Item Code: #KGP-154

    Availability: In stock


  • Anuvadvigyan (Paperback)
    200

    Item Code: #KGP-174

    Availability: In stock

    अनुवादविज्ञान
    अनुवाद को उसके पूरे परिप्रेक्ष्य में लें तो वह मूलतः अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान के अंतर्गत आता है। साथ ही अनुवाद करने में व्यतिरेकी भाषाविज्ञान से भी हमें बड़ी सहायता मिलती है। इस तरह अनुवाद भाषाविज्ञान से बहुत अधिक संबद्ध है।...
    जहाँ तक अनुवाद का प्रश्न है, विद्यार्थी-जीवन में पाठ्यक्रमीय अनुवाद की बात छोड़ दें तो सबसे पहले अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘नेहरू अभिनंदन ग्रंथ’ में मुझे अनुवाद करने का अवसर मिला। उसी समय कुछ भाषा-संबंधी लेखों के मैंने अंग्रेज़ी से हिंदी में अनुवाद किए। ‘गुलनार और नज़ल’ नाम से एक अंग्रेज़ी पुस्तक का संक्षिप्तानुवाद 1952 में पुस्तकाकार भी छपा था। 1962-64 में रूस में अपने प्रवास-काल में कुछ उज़्बेक, रूसी तथा इस्तोनियन कविताओं का भी मैंने हिंदी-अनुवाद किया था। ताशकंद रेडियो में 1962 में मेरे सहयोग से हिंदी विभाग खुला था। वहाँ प्रतिदिन आध घंटे के कार्यक्रम के लिए रूसी, उज़्बेक, अंग्रेज़ी आदि से हिंदी में अनुवाद किया जाता था, जिसका पुनरीक्षण मुझे करना पड़ता था। 1968 में भारतीय अनुवाद परिषद् ने अपनी त्रैमासिक पत्रिका ‘अनुवाद’ के संपादन का भार मुझे सौंपा और समयाभाव के कारण, न चाहते हुए भी, कई मित्रों के आग्रह से मुझे यह दायित्व लेना पड़ा।
    प्रस्तुत पुस्तक की सामग्री के लेखन का प्रारंभ मूलतः ‘अनुवाद’ पत्रिका का सिद्धांत विशेषांक निकालने के लिए कुछ लेखों के रूप में हुआ था। विशेषांक के लिए कहीं और से अपेक्षित सामग्री न मिलने पर धीरे-धीरे मुझे अपनी सामग्री बढ़ानी पड़ी, किंतु अंत में सामग्री इतनी हो गई कि विशेषांक में पूरी न जा सकी। वह पूरी सामग्री कुछ अतिरिक्त लेखों के साथ प्रस्तुत पुस्तक के रूप में प्रकाशित की जा रही है।        
    --भोलानाथ तिवारी
  • Betava Bahati Rahee (Paperback)
    Maitreyi Pushpa
    150 140

    Item Code: #KGP-7045

    Availability: In stock

    बेतवा बहती रही
    एक बेतवा! एक मीरा ! एक उर्वशी !
    नही-नहीं, यह अनेक उर्वशियों, अनेक मीराओं, अनेक बेतवाओं की कहानी है ।
    बेतवा के किनारे जंगल की तरह उगी मैली बस्तियों । भाग्य पर भरोसा रखने वाले दीन-हीन किसान । शोषण के सतत प्रवाह में डूबा समाज । एक अनोखा समाज, अनेक प्रश्नों, प्रश्नचिन्हों से घिरा ।
    प्राचीन रूढियां है जहाँ सनातन । अंधविश्वास हैं अंतहीन । अशिक्षा का गहरा अंधियारा । शताब्दियों से चली आ रही अमानवीय यंत्रणाएँ । फिर जीने के लिए कोई किंचित ठौर खोजे भी तो कहाँ ! हाँ, इन अंधेरी खोहों और खाइयों में कभी-कभी मुट्ठी-भर किरणों के प्रतिबिंब का अहसास भी कितना कुछ नहीं दे जाता ।
    उर्वशी का दु:ख है कि वह उर्वशी है । साधारण में भी असाधारण । इसीलिए सब तरह से अभिशप्त रही । तिल-तिल मिटती रही चुपचाप ।
    प्रेम, वासना, हिंसा, घृणा से भरी एक हृदयद्रावक अछूती कहानी ! पूरे एक अंचल को व्यथा-कथा ।
  • Parv (Paperback)
    Bhairppa
    350 298

    Item Code: #KGP-7195

    Availability: In stock

    भारतीय वाडमय में पंचम वेद के रूप में अधिष्टित महाभारत पर आधारित भैरप्पा की महान् औपन्यासिक कृति । इस उपन्यास में लेखक ने महाभारत के पात्रों, स्थितियों और घटनाओं का जो वस्तुनिष्ठ आलेखन प्रस्तुत किया है, वह अदभुत और अनुपम है । महापारतकालीन भारत की सामाजिक संरचना क्या तत्कालीन इतिहास और परंपराओं के लंबे अरसे तक अनुसंघान, व्यापक भ्रमण और अध्ययन पर आधारित यह उपन्यास भारतीय साहित्य की महान् उपलब्धि है । अतीतोन्मुखी भारतीय जनमानस के साथ जुडे महाभारत के पात्रों के अलंकरण और चमत्कारों एवं अतिशयोक्तियों की कैचुली उतारकर उन्हें मानवीय धरातल पर साधारण मनुष्य के रूप में प्रस्तुत करने के कारण यह उपन्यास वस्तुत: एक क्रांतिकारी जाते है । संक्षेप में इतना कहना ही शायद पर्याप्त हो कि 'पर्व' आधुनिक संदर्मों से जुडा महाभास्त का पुनराख्यान है ।
    'पर्व' का फलक भले ही महाभारत पर आधारित हो, लेकिन यह एक साहित्यिक कृति है-एक उपन्यास । पाठक इसे एक उपन्यास के रूप में ही स्वीकार करेंगे-ऐसा लेखक का अनुरोध है । 

  • Vishwa Ki 51 Chuninda Kahaniyan (Paperback)
    Surendra Tiwari
    450 360

    Item Code: #KGP-391

    Availability: In stock


  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Bhisham Sahni (Paperback)
    Bhishm Sahni
    120

    Item Code: #KGP-10

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : भीष्म साहनी
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ 'किताबघर' की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    'किताबघर' गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए अग्रज कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कथाकार भीष्म साहनी ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'वाङ्चू',  'साग-मीट', 'पाली', 'समाधि भाई रामसिंह', 'फूलां', 'सँभल के बार', 'आवाजें', 'तेंदुआ', 'ढोलक' तथा 'साये'।
    हमेँ विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात कथाकार भीष्म साहनी की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Asghar Wajahat (Paperback)
    Asghar Wajahat
    100

    Item Code: #KGP-7197

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियां
    असग़र वजाहत

    ‘दस प्रतिनिधि कहानियां’ सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिंदी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है।

    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों की चयनित कहानियों से यह अपेक्षा की गई है कि वे पाठकों, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियां भी हों, जिनकी वजह से  स्वयं लेखक को भी कथाकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिकास्वरूप लेखक या संपादक का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के 
    लिए अग्रज कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के अत्यंत महत्त्वपूर्ण कथाकार असग़र वजाहत की जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं: ‘केक’, ‘दिल्ली पहुंचना है’, ‘अपनी-अपनी पत्नियों का सांस्कृतिक विकास’, ‘होज वाज पापा’, ‘तेरह सौ साल का बेबी कैमिल’, ‘शाह आलम कैंप की रूहें’, ‘शीशों का मसीहा कोई नहीं’, ‘जख्म’, ‘मुखमंत्राी और डेमोक्रेसिया’ तथा ‘सत्यमेव जयते’।
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात कथाकार असग़र वजाहत की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद संतोष का अनुभव करेंगे।
  • Madhavi-Kannagi (Paperback)
    Chitra Mudgal
    80

    Item Code: #KGP-7222

    Availability: In stock

    लगभग दो हजार वर्ष पुराना तमिल महाकाव्य ‘शिलप्पधिकारम्’ को विषय बनाकर मैं तुम्हारे लिए एक उपन्यास लिखना चाह रही थी। अचानक एक दिन एन. सी. ई. आर. टी. से डाॅ. रामजन्म शर्मा का फोन आया। उनका आग्रह हुआ कि ‘पढ़ें और सीखें’ योजना के अंतर्गत मैं बाल-पाठकों के लिए ‘शिलप्पधिकारम्’ को आधार बनाकर एक बाल-उपन्या लिखूं। किन्हीं कारणों से डाॅ. रामजन्म शर्मा के दुबारा आग्रह पर मुझे दूसरी पुस्तक लिखनी पड़ी। 
    पिछले वर्ष संयोग से कंेद्रीय हिंदी निदेशालय के नव-लेखन प्रशिक्षण शिविर में दक्षिण जाना हुआ। वहां कुछ मित्रों ने उलाहना दिया कि तमिल साहित्य की समृद्धि के बारे में उत्तर भारत के बाल-पाठक कुछ नहीं जानते। बस, इस उलाहने ने मुझे बेचैन कर दिया। पुरानी इच्छा जाग उठी। पाण्डिचेरी से लौटकर मैंने ‘माधवी कन्नगी’ तुरंत लिखना शुरू कर दिया। उपन्यास पूरा हो गया।
    —चित्रा मुद्गल
  • 20-Best Stories From Russia (Paperback)
    Prashant Kaushik
    125

    Item Code: #KGP-351

    Availability: In stock

    What is an anthology, if not an amalgamation of words? 
    In this first in the 20-BEST series, we bring to you short stories and classics from a land that is as enigmatic as intriguing. Russian short stories are world famous for their story-telling flow—natural, simple, and veracious—as well as the equally famous Russian authors. A 360-degree contrast from the tales of our country, from the social makeup of our society, our beliefs, customs and legends, these stories open up a new world on each page.  
    With stories like The Bet and Vanka by Chekhov, God sees the truth but waits by Leo Tolstoy, The Queen of Spades by Alexander Pushkin, Her Lover and One Autumn Night by Gorky, The Cloak by Gogol, The Signal by Garshin, this book is a compilation of 20 famous Russian short stories. Each story is beautiful in its own style, holding the readers spellbound.
    Time to indulge in some old-world charm all the way from Russia.  
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Chandrakanta (Paperback)
    Chandrakanta
    150

    Item Code: #KGP-408

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : चन्द्रकान्ता
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार चन्द्रकान्ता ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'पोशनूल की वापसी', 'आवाज़', 'चुप्पी की धुन', 'पत्थरों के राग', "अलग-अलग इंतजार', 'भीतरी सफाई', 'आत्मबोधग', 'सिद्धि का कटरा' , 'लगातार युद्ध' तथा 'रात में सागर'।
    हमेँ विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक चन्द्रकान्ता की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Aagaami Ateet (Paperback)
    Kamleshwar
    70

    Item Code: #KGP-7068

    Availability: In stock


  • Path Prajya (Paperback)
    Veena Sinha
    100

    Item Code: #KGP-7062

    Availability: In stock

    ‘पथ प्रज्ञा' श्रीमती वीणा सिन्हा की एक उल्लेखनीय औपन्यासिक कृति है। प्रागैतिहासिक काल की एक प्रचलित कथा का पुनर्पाठ करती लेखिका ने ‘पथ प्रज्ञा' माधवी के माध्यम से समाज के नियंताओं द्वारा नारी-शोषण की अद्यतन प्रवृत्ति का सूत्र पकड़ा है। वैदिक राजाओं के यहाँ और आश्रमों में व्याप्त नारी-शोषण की कथा इस उपन्यास के केन्द्र में है। यहाँ उदात्त कर्मों के लिए समर्पित दिखने वाले ऋषि आश्रमों के नियंता हैं। ययाति जैसे दानवीर एवं ऋषियों का सम्मान करने वाले धर्म-प्रवण यशस्वी राजा हैं। गालव अपने गुरु विश्वामित्र को गुरुदक्षिणा दे सके, इसके लिए अपनी पुत्री माधवी को देह के उपयोग का आदेश देने वाले ययाति हैं। राजा के इस मनमाने आदेश पर शास्त्र-सम्मति की मुहर लगाने वाली दरबारी व्यवस्था है। राजकन्या की देह को एक समयावधि तक भोग कर एक यशस्वी पुत्र एवं गुरुदक्षिणा का एक अंश वसूलने वाले स्वयं ऋषि विश्वामित्र भी हैं।
    इस उपन्यास की देह में भोग-विलास में डूबे रहने वाले हर्यश्व से लेकर एकपत्नीनिष्ठ दिवोदास और सच्चे प्रेमी तथा शास्त्र-सम्मत कर्म करने वाले उशीनर जैसे अयोध्या, काशी और भोजनगर राज्यों के राजा चित्रित हैं। मगर यह आश्चर्यजनक तथ्य है कि माधवी की देह का एक निश्चित अवधि तक शुल्क देकर भोग करना इन तीनों ही राज्यों में नियमविरुद्ध नहीं है। नारी-शोषण के इस सनातन रूप को लेखिका मानो आज की तिथि में शपथ-पत्र की तरह प्रस्तुत करती है। सत्य-संरक्षण की ऐसी विश्वसनीयता समकालीन लेखन में दुर्लभ है। इसीलिए इस उपन्यास को एक उल्लेखनीय कृति कहा गया है।
    इस उपन्यास में स्त्री-पुरुष के स्थूल और सूक्ष्म स्तर के परस्पर संबंधों, व्यष्टि-समष्टि तथा व्यक्ति और राज्य के रिश्तों एवं ज्योतिष और दर्शन जैसे गूढ़ विषयों पर सार्थक और पारिभाषिक वार्तालाप इस कृति का एक और महत्त्वपूर्ण पक्ष है।
    उपन्यास के अंत में माधवी द्वारा लिया गया निर्णय समाज द्वारा नारी के अपपाठ की एक प्रतिक्रिया है जहाँ माधवी सक्रिय नहीं, सार्थक होती है।
    और अंत में यह भी कि वैदिक काल के सूक्ष्म और गहन अध्ययन-विश्लेषण के कारण ही लेखिका ने भाषा में संस्कृतनिष्ठता तथा बाणभट्ट के जैसे भाषा-लालित्य का समावेश करके उसे युगानुरूप बनाने की चेष्टा की है।
  • Hindi Sahitya Ka Itihas (Paperback)
    Hemant Kukreti
    350 280

    Item Code: #KGP-511

    Availability: In stock

    ‘साहित्य के बेहतर इतिहास में तथ्यों का वस्तुनिष्ठ परीक्षण और पूर्वग्रहरहित विश्लेषण होता है।’ ‘महान साहित्य अपने समय के प्रश्नों और समाज से अलग नहीं होता और न रचनाकार का विवेक इतिहास से स्वायत्त होता है।’ ‘एक अच्छे इतिहास में भाषा और साहित्य की सांस्कृतिक परंपरा, लेखकीय रचनात्मकता का विश्लेषण, देशकाल वातावरण के द्वंद्व और घात-प्रतिघात का संतुलित विश्लेषण किया जाता है। इतिहास लेखन में विकासवादी नजरिया और वैज्ञानिक प्रस्तुति होनी चाहिए।’ हेमंत कुकरेती की ये उपर्युक्त पंक्तियां उनके साहित्य इतिहासबोध को स्पष्ट करती हैं।
    यह अब तक प्रकाशित हिंदी साहित्य का सबसे अद्यतन इतिहास है। हिंदी गीत, गजल इत्यादि से लेकर पत्रकारिता, तमाम गद्य-विधएं, स्त्री एवं दलित विमर्श एवं लेखन के विकास का विश्लेषण किया गया है। इस मायने में यह हिंदी साहित्य का इतिहास आचार्य शुक्ल, द्विवेदी जी, डाॅ. रामविलास शर्मा इत्यादि की परंपरा को आगे बढ़ाता है।
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Ballabh Dobhal (Paperback)
    Ballabh Dobhal
    90

    Item Code: #KGP-1460

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ  : बल्लभ डोभाल
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार बल्लभ डोभाल ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'उतरा हुआ', 'जय जगदीश हरे', 'चुनाव चक्रम्', 'काठ की टेबुल', 'दूर का दर्शन', 'दर्द अपनेपन का', 'तन का देश : मन का देश', 'खेड़ा गांव', 'बुलडोजर' तथा 'समाधान'।
    हमेँ विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक बल्लभ डोभाल की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Jahaan Charan Pare Raghuvar Ke (Paperback)
    Rajesh Tripathi
    195

    Item Code: #KGP-7031

    Availability: In stock

    इतिहास में ओरल हिस्ट्री (मौखिक इतिहास) को मान्यता मिली हुई है। ओरल हिस्ट्री यानी इतिहास के वे ब्योरे जो किताबों में भले न हों पर जुबान पर हों, स्मृतियों में हों। राजेश ने इस अंचल की ओरल हिस्ट्री को रिकॉर्डेड हिस्ट्री में बदलने का भी काम किया है जिसके लिए इतिहासकारों को भी उनका आभारी होना चाहिए। यह किताब इतिहास और उपन्यास के दो छोरों के बीच झूलते उस हिंडोले की तरह है जिसकी हर पेंग एक नई दुनिया की सैर कराती है। मुझे विश्वास है कि यह किताब सिर्फ अपने कंटेंट के लिए नहीं बल्कि अपने अंदाजे- बयां के लिए भी पाठकों का इस्तकबाल हासिल करेगी।
  • Toro Kara Toro-1 (Paperback)
    Narendra Kohli
    350 315

    Item Code: #KGP-7041

    Availability: In stock


  • Kavi Ne Kaha : Vishnu Khare (Paperback)
    Vishnu Khare
    80

    Item Code: #KGP-1322

    Availability: In stock

    मैंने जब विष्णु खरे की कविताओं को यह जानने के उद्देश्य से पढ़ना शुरू किया कि उनकी कविता का संसार किन तत्त्वों से बना है तो मुझे अत्यंत स्फूर्तिदायक अनुभव हुआ। एक के बाद एक काफ़ी दूर तक मुझे ऐसी कविताएँ मिलती रहीं जिन्होंने मुझे समकालीन जीवन के त्रासद से लेकर सुखद अनुभव तक से प्रकंपित किया। सबसे अधिक कविताएँ सांप्रदायिकता और फ़ासिस्ट मनोवृत्ति के जोर पकड़ते जाने को लेकर लिखी गई हैं। ‘शिविर में शिशु’ गुजरात के दंगे से संबंधित है, ‘चुनौती’ शीर्षक कविता में धर्म-भावना के ख़तरनाक रूप का संकेत है, ‘न हन्यते’ में दंगाइयों का रोंगटे खड़े कर देने वाला बयान है, ‘गुंग महल’ भी धार्मिक कट्टरता को ही सामने लाती है और ‘हिटलर की वापसी’ शीर्षक कविता जर्मनी की पृष्ठभूमि में लिखी गई है। विष्णु खरे की ख़ूबी है कि उनकी कविताएँ अधिकांश वामपंथी कवियों की तरह सिर्फ़ जज़्बे का इज़हार नहीं करतीं बल्कि अपने साथ सोच को भी लेकर चलती हैं, जिससे उनमें स्थिति की जटिलता का चित्राण होता है और वे सपाट नहीं रह जातीं।...
    विष्णु खरे की असली कला और उनका तेवर ‘गुंग महल’ शीर्षक कविता में दिखलाई पड़ता है, जिसका अंत जितना ही सशक्त है उतना ही कलात्मक--पाठकों को अनुभूति, सोच और कल्पना तीनों ही स्तर पर उत्तेजित करने वाला। ‘विनाशग्रस्त इलाके से एक सीधी टी.वी. रपट’ कविता में टी.वी. रपट शैली में अनुमानतः गुजरात के भूकंप का ज़िक्र है। अंतर्वस्तु की दृष्टि से इसमें भारत के नैतिक विनाश का ऐसा चित्रण है कि एक बार तो यह प्रतीति होती है कि विष्णु खरे हमारे नैतिक विनाश के ही कवि हैं।...
    विष्णु खरे का गहरा लगाव इस देश की साधारण जनता और साधारण जीवन से है, जिसे वे आधुनिक सभ्यता के बड़े परिप्रेक्ष्य में भी रखकर देखते हैं।...इन्हीं साधारण जनों में औरतों को भी गिनना चाहिए। आकस्मिक नहीं कि इस संग्रह में औरतों पर भी तीन-चार बहुत अच्छी कविताएँ हैं। विष्णु खरे का यथार्थ चित्रण इतना गहरा होता है कि उन्हें फैंटेसी में लिखने की कोई जरूरत नहीं। उन्होंने उस गद्य को आवश्यकतानुसार अनेक रूप प्रदान करके उसे ऐसा बना दिया है कि किसी काव्य और कला-मर्मज्ञ को उससे कोई शिकायत न हो।  
    -नंदकिशोर नवल
  • The 10-Pound Shred (Paperback)
    Tommy Europe
    295

    Item Code: #KGP-346

    Availability: In stock

    The 10-Pound Shred lets you bring Tommy Europe's tough-love, bootcamp-style workouts home. In just 31 days, Tommy will take you from flab to fit, helping you shed 10 poundsor more in the process. Each day has complete, easy-to- understand exercise instructions with step-by-step photos. There's no complicated flipping around to figure out what you need to be doing–and no free breaks, either! You don't need fancy equipment or even a gym membership–just a good pair of shoes and the willingness to get moving. There's also a nutritious, flexible meal plan designed to help you set a new, lifelong pattern of healthy eating. And through it all, Tommy's there with his signature blend of drill sergeant and inspiring friend, pushing you to reach higher, go faster and shred a little harder.
    Whether you have a wedding coming up, want to look great at the beach or just want to have more energy, Tommy will help you lose those 10 pounds. You're going to sweat, you're going to hurt–but you're going to love the results. So stop making excuses, put down that cupcake and pick up The 10-Pound Shred.
  • Naamdev Rachanavali (Paperback)
    Govind Rajnish
    90

    Item Code: #KGP-1493

    Availability: In stock

    नामदेव रचनावली
    नामदेव ऐसे समर्थ और प्रतिभाशाली रचनाकार थे, जिन्होंने मराठी और हिंदी में समान रूप से रचनाएँ कीं। वे 54 वर्षों तक उत्तर भारत में रहे और हिंदी-संत-काव्य के लिए प्रेरक सिद्ध हुए। उनकी पद-शैली, भाव-बोध, दार्शनिक विचारों, बिम्बों, प्रतीकों और उपमानों का प्रभाव हिंदी के निर्मुणपंथी कवियों पर पडा ।
    स्वानुमूतिजन्य सत्यान्वेषण, सदगुरु के महत्त्व का प्रतिपादन, परम तत्त्व की सर्वव्यापकता, तन्मयमूलक भक्ति, नाम-स्मरण, कर्मकांड और पाखंडों का निषेध, आंतरिक शुचिता पर बल, बाह्याडंबरों की व्यर्थता और विषमता-विरोध ऐसे तत्त्व हैं, जो परवर्ती संत कवियों के काव्य में समान रूप से पाए जाते हैँ। इसीलिए समकालीन एवं परवर्ती संत कवियों ने उनका स्मरण श्रद्धा के साथ किया है।
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Mannu Bhandari (Paperback)
    Mannu Bhandari
    130 111

    Item Code: #KGP-7001

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : मन्नू भंडारी
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ 'किताबघर' की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    'किताबघर' गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए अग्रज कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कथाकार मन्नू भंडारी ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'अकेली', 'मजबूरी', 'तीसरा आदमी', 'नई नौकरी', 'असामयिक मृत्यु', 'बन्द दराजों का साथ', 'क्षय', 'तीसरा हिस्सा', 'त्रिशंकु' तथा 'शायद' ।
    हमेँ विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात कथाकार मन्नू भंडारी की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Benaras ( A Journey Within) (Paperback)
    Roli Jindal
    99

    Item Code: #KGP-345

    Availability: In stock

    Benaras – A city so beautiful, even the Ganges changed course and flowed north to be able to swing by it. Lord Shiva located this beautiful city on the tips of his trident, and came here to live the life of a householder with his wife. He is in the very spirit and very soul of the city. With Moksha promised to those that die here, Benarasis, it is said, want to make the most of their last life on earth. Eat, drink and be merry, for never again shall you live. Amazingly, in this day and age, a lot of those ‘eats’ and ‘drinks’ have still not travelled out of the city. With unique flavours, a distinct gharana of classical music, deep-rooted traditions of dance, a spectacular riverfront, a world-renowned seat of learning, a tolerant social fabric as rich as the luxurious saree, and the fabled Benarasi banter, life in Benaras is not the same as everywhere else.
    What is it like to live here? With local insight, Roli Jindal takes you beyond the tourist guides deep inside the heart of Benaras and shows you how this bustling, crowded city retains its spiritual core and its unique culture, while staying perfectly in sync with modern times. This is a personal, insider view of what life is like in this very interesting city.

  • Kuch Lekh Kuch Bhashan (Paperback)
    Atal Bihari Vajpayee
    250 200

    Item Code: #KGP-7025

    Availability: In stock


  • Datta (Paperback)
    Sharat Chandra Chattopadhyaya
    150

    Item Code: #KGP-202

    Availability: In stock


  • Anveshak (Paperback)
    Pratap Sehgal
    25

    Item Code: #KGP-942

    Availability: In stock

    अन्वेषक
    महत्वपूर्ण यह नहीं कि हम अतीत की ओर मुँह करके खडे को जाएँ और खडे रहें। हाथ में अतीत का झंडा उठा लें और गौरव को मीनारों पर चढ़कर खुद को बडा महसूस करें। महत्वपूर्ण यह है कि अतीत को खँगालें, अतीत की मीनारों को ओर देखें, पर अपने पैरों तले को जमीन न छोड़ें।
    'अन्वेषक' को रचना का मूल बिंदु यहीँ से शुरु होता है। इसी अर्थ में यह नाट्य-रचना पाँचवीं शती के उत्तरार्द्ध में हुए आर्यभट और उसके अन्वेषणों के बहाने समकालीन प्रश्नों यर विचार करती है। प्रगतिकामी और प्रतिगामी शक्तियों के बीच को रहे संघर्ष को नाटकीय तनावों के साथ अभिव्यक्त करती है। अवरोधकारी और अंधविश्वासी शक्तियों के सामने क्रांतिकारी अन्वेषण करने वाले किसी भी अन्वेषक को जिस मानसिक यातना से गुजरना पड़ सकता है और अंततः  उसकी क्या नियति हो सकती है इस सवाल पर भी यह नाटक गौर करता है।
    इतिहास नाटक की पृष्ठभूमि है इसलिए यह ऐतिहासिक नाटक नहीं है। इसका मकसद की जानकारी देना भी नहीं, बल्कि इतिहास के एक कालखंड, उस कालखंड में जन्मे आर्यभट के अन्वेषणों के बहाने परिवर्तन-, शक्तियों के संघर्ष को रेखाकित करना है। इसी के साथ जुड़ते है प्रेम, ईष्यों, स्मृहा, देश-प्रेम और वैज्ञानिक-टैम्पर से जुडे तमाम सवाल । 
    इन अर्थों में 'अन्वेषक' हिंदी नाटकों की उस परंपरा को आगे बढाता है जो प्रसाद से शुरू होकर मोहन राकेश में बदल जाती है। यहीं इतिहास पर उतना आग्रह नहीं, जितना प्रसाद को था पर नाटय-व्यापार पर आग्रह है। इतिहास के महीन तंतु को एक प्रभावी नाटक में रचने की क्षमता यहाँ साफ झलकती है। आशा है प्रताप सहगल का यह नाटक रंगकर्मियों  एवं नाट्य प्रेमियों की अदम्य रंग-पिपासा को एक सीमा तक अवश्य ही शांत करेगा।

  • Rang De Basanti Chola (Paperback)
    Bhishm Sahni
    30

    Item Code: #KGP-1027

    Availability: In stock

    रंग दे बसन्ती चोला
    [जलियाँवाला बाघ रतनदेवी आती है । हाथ में पानी का लोटा है ।]
    रतनदेवी : ले मेरे लाल । मैं तेरे लिए पानी लाई हूँ। (किश्ना के होंठों से पानी डालती है ।) तू बोलता क्यों नहीं किश्ना बेटे । (माथे को छुकर) चला गया, यह भी चला गया । इसकी भी प्यास बुझ गई । मैं कर्मजली तेरे होंठों में दो बूँट पानी भी नहीं डाल पाई । तू भगवान् को प्यारा हो गया है। (रो पड़ती है, फिर धीरे से उठकर अपने पति के शव के पास पहुंचती है। ) तू भी भगवान् के पास जा रहा है । मैं रोऊँगी नहीं । मैं तेरा सफर खराब नहीं करूँगी । हँसता-हँसता जा। भगवन् तुझे गले लगाएंगे ।
    तेरे सैकडों संगी-साथी मौत की नींद सोए पडे हैं । वे भी तेरे साथ भगवान् के दरबार में जाएँगे। उनके घरवाले अभी भी उनकी राह देख रहे हैं। 
    तूने अपने लिए कभी कुछ नहीं माँगा । तू अपनी जान निछावर कर गया । मैं पापिन तुझे सारा वक्त उलाहने देती रही । तेरे साथ झगड़ती रही, पर मुझे क्या मालूम था, तू सचमुच चला जाएगा । (उसका माथा सहलाती हुई) मैं कहाँ लुट-पुट गई ? मैं तो चिर सुहागिन हूँ । जिसका घरवाला ऐसा शूरवीर हो । तू तो मेरा सूरमा पति है । तू तो नाचता-गाता हुआ घर आया करता था : मेरा रंग दे, मेरा रंग देबसन्ती चोला ।
  • Mannu Bhandari Ka Rachnatmak Avdaan (Paperback)
    Mannu Bhandari
    150

    Item Code: #KGP-1426

    Availability: In stock

    मन्नू भंडारी का रचनात्मक अवदान
    मन्नू भंडारी हिंदी की एक जानी-मानी, सुविख्यात, बहुपठित, पाठकों और समीक्षकों में समान रूप से लोकप्रिय, अनेक देशी-विदेशी भाषाओं में एक से आदर- सम्मान के साथ पढ़ी जाने वाली रचनाकार हैं, पर एक बेहद सामान्य स्त्री के रूप में देखें तो भी उनका जीवन एक अदम्य जीवट और जिजीविषा की अद्भुत मिसाल है। अपने को हमेशा कम करके आँकना मन्नू जी के स्वभाव में है। आम पाठक उनके नाम से आतंकित होकर उनसे मिलने आते हैं और सरलता, सहजता तथा स्नेह से सराबोर होकर लौटते हैं। हिंदी साहित्य की प्रख्यात लेखिका वे बाद में हैं, पहले एक परम स्नेही, पारदर्शी व्यक्तित्व हैं जो पहली ही मुलाकात में आपको बनावट और दिखावट से परे अपने आत्मीय घेरे में ले लेती हैं।
    मन्नू भंडारी ने परिमाण में बहुत ज्यादा नहीं लिखा पर जो लिखा, उसमें जिंदगी का यथार्थ इतनी सहजता, आत्मीयता और बारीकी से झलकता है कि वह हर 
    पाठक को भीतर तक छू लेता है। हाल ही में गोवा विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में ‘मन्नू भंडारी का रचनात्मक अवदान’ पर एक पूरा पेपर रखा गया है। पूरे एक दिन के सेमिनार में प्राध्यापकों के साथ-साथ छात्र-छात्राओं यानी उनके पाठकों ने भी जिस उत्साह और स्फूर्ति का परिचय दिया, वह आज भी मन्नू जी को हिंदी साहित्य के एक बहुत बड़े वर्ग का चहेता रचनाकार साबित करता है।
    मन्नू जी के दो उपन्यास--‘आपका बंटी’ और ‘महाभोज’ हिंदी साहित्य में दो मील के पत्थर हैं--जो अपने समय से आगे की कहानी कहते हैं और हर समय का सच होने के कारण कालातीत भी हैं। 
    ‘आपका बंटी’ जहाँ भारतीय परिवार के एक औरत के द्वंद्व और एक बच्चे की त्रासदी की कथा है, ‘महाभोज’ उससे बिलकुल अलग हटकर राजनीतिक हथकंडों में पिसते और मोहरा बनते दलित वर्ग और भ्रष्ट व्यवस्था की कहानी है। 
  • Sansaar Ki Shreshtha Kahaniyan (Paperback)
    Gyanchand Jain
    150

    Item Code: #KGP-05

    Availability: In stock

    संसार की श्रेष्ठ कहानियां
    कहानी-लेखन विश्व की प्राय: सभी भाषाओं में प्रचुर परिमाण में होता आया है । उसने विश्व-साहित्य के इतिहास से अपनी एक खास जगह बनाई है। कहानी चाहे राजा-रानी के ऐश्वर्य और विलासितापूर्ण जीवन पर रची गई हो या शासन-सत्ता की बनती-बिगड़ती छवि को अंकित करती हो, वह घोर अराजकता और  असामाजिकता का चित्रण करती हो या भ्रष्टाचार और नैतिक पतन के गर्त में दूबे हुए राजनीतिज्ञों का नग्न चित्र उतारती हो; देश-काल की व्यथा-कथा कहती हो या उसकी खुशहाली बयान करती हो-अंतत: होती वह आईने की तरह निर्दोष है । एकदम यथार्थ और कटु सत्य ।
    कहानियां चाहे मार्क टूवेन, जेम्स ज्वाएस, मैन्सफील्ड ने लिखी हों या बालज़क, मोपासां ने; लियो टाल्सटाय, चेखव, गोर्की ने लिखी हों या लुई जी पिरानडेलो, मारिसन, ए०ई० कोपर्ड ने; अनातोले फ्रांस, रोमानोफ  ने लिखी हों या एडवर्ड डेक्कर, हरमैन हेजरमैन्स ने, जेसिंन्टो पिकोन, कारेल कापेक, वानगी पामर ने लिखी हो या जेकब वासरमैन, मिक्सजथ, इमानोव ने; बजार्न्सन, आइजक पेरेज, लू शुन ने लिखी हो या प्रेमचंद, गुलेरी और मंटो ने-सबने अपने इर्द-गिर्द के समाज का और स्वयं भोगे हुए यथार्थ का अंकन किया है ।
    प्रस्तुत संकलन में ऊपर चर्चित अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विश्व-भर के लेखकों की तीस चुनिंदा कहानियां सम्मितित हैं। ये कहानियां अपने-जपने देश-काल की सामाजि- कार्थिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों की अंतरंग झाँकियाँ प्रस्तुत करती हैं । ये विश्व की प्राय: सभी भाषाओं में पढी गई और इन्होंने लोकप्रियता के उच्चतम शिखरों को छुआ । संकलन की अंतिम चार कहानियों (एक चीनी, दो हिंदी, एक उर्दू) के अतिरिक्त शेष सभी का रूपांतरण हिंदी के वरिष्ट साहित्यकार श्री ज्ञानचंद जैन ने अत्यंत सरल और सहज ग्राह्य भाषा- शैली में किया है। 
  • Anmol Vichaar (Paperback)
    Sudha Arora
    150

    Item Code: #KGP-7074

    Availability: In stock

    सुधा गौतम
    प्रस्तुत पुस्तक अनमोल विचार में सुश्री सुधा गौतम ने अनेक महापुरुषों और धार्मिक ग्रंथों से अनमोल विचार संकलित किए हैं । उदाहरण के लिए—
    जिसने अपनी इच्छाओं का दमन करके मन पर विजय और शांति पा ली है, वह राजा हो या रंक, उसे जगत् में सुख ही सुख है । —हितोपदेश 
    इच्छा से दु:ख आता  इच्छा से भय आता है । जो इच्छाओं से मुक्त है, वह न दु:ख जानता है, न भय । -महात्मा बुद्ध 
    यदि तुम सर्वोच्च शिखर पर पहुँचने के आकाँक्षी हो तो सबसे नीचे से चढ़ना प्रारंभ करों । -साइरल
    अधूरा काम और अपराजित शत्रु—ये दोनों बिना बुझी आग की चिंगारियों की तरह हैं । वे मौका पाकर बैठ जाएँगे और उस लापरवाह आदमी को आ दबाएँगे । -चाणक्य
    कायर लोग अपनी मृत्यु के पहले भी कई बार मरते हैं, परंतु वीर पुरुष मृत्यु का एक बार ही अभिनंदन करते हैं। -शेक्सपियर
    जो मनुष्य अपनी निंदा सह लेता है, उसने मानो सारे जगत् पर विजय प्राप्त कर ली । -वेदव्यास 
    जो मनुष्य अपने क्रोध को अपने ही ऊपर झेल लेता है, वही दूसरों के क्रोध से बच सकता है । वही अपने जीवन को सुखी बना सकता है। -सुकरात 
    ज्यों-ज्यों मनुष्य बूढा होता जाता है, त्यों-त्यों जीवन से प्रेम और मृत्यु से भयभीत होता जाता है । -जवाहरलाल नेहरू 
    दयालु पुरुष धन्य हैं, क्योंकि वे ही भगवान की दया को प्राप्त कर सकेंगे । -ईसा मसीह
    परोपकार-रहित मनुष्य के जीवन को धिक्कार है, क्योंकि उससे तो पशु ही धन्य हैं, जिनका चमडा भी दूसरों के काम में आता है । -विनोबा भावे 
    किसी के गुणों की प्रशंसा करने में अपना समय मत खोओ, उसके गुणों को अपनाने का प्रयास करों । -कार्ल मार्क्स 
    जो मनुष्य निश्चित कार्यों को छोडकर अनिश्चित के पीछे दौड़ता है, उसके निश्चित कार्य भी नष्ट हो जाते है, अनिश्चित तो नष्ट ही हुआ रहता है । -चाणक्य 
    मनुष्य को अपने कमाए हुए धन से तब तक कोई तृप्ति नहीं होनी चाहिए, जब तक उनमें से कोई नेक काम करना न शुरु कर दे । -भगवन महावीर 
    वे राजा धन्य हैं जो पुत्रों के समान पुरवासियों को अपने सामने पूर्ण सुखी देखकर रात को चैन से सोते है । -राजतरंगिणी 
    कुटिल मत बनो, किसी भी व्यक्ति के साथ कुटिलता, धोखेबाजी और मक्कारी का व्यवहार मत करो । सभी के साथ सभ्यता, नम्रता, भद्रता और श्रेष्ठता का व्यवहार करो । -यजुर्वेद 
    माता के आँचल और घर के कोने से बड़ा ही अंतर होता है—एक तो शीतल जल का सागर होता है, दूसरा मरुभूमि । -प्रेमचंद 
    यह मानना कि हम कुछ नहीं कर सकते, सबसे बडी कायरता है । इसे त्यागो और पुरुषार्थ को जागृत करों । फिर देखोगे कि तुम्हारी उन्नति तुम्हारे हाथ में है । -मुनि गणेशवर्णी 
  • The Great Horizon (Paperback)
    Debabrata Dasgupta
    110

    Item Code: #KGP-342

    Availability: In stock

    The Great Horizon is a biographical novel on Sir Alexander Fleming, a Scottish biologist and pharmacologist. His best-known discoveries are the discovery of the enzyme lysozyme and the antibiotic substance penicillin from the mold Penicillium notatum, for which he shared the Nobel Prize in Physiology or Medicine in 1945 with Howard Florey and Ernst Chain.
    Discovery of penicillin has come naturally as a life-giver to mankind. Disease-torn distressed humans have got a means of longevity through this life-saver. It has contributed in no less measure, to the average human longevity crossing the figure of seventies. The bright rays of the antibiotics have dispersed the dark clouds of sickness and diseases, which overcast the sky of human destiny. All this has been made possible due to the physician named Alexander Fleming who discovered it in 1928 and unfolded a new horizon.
  • Sansar Ke Prasiddha Vyaktiyon Ke Prem-Patra (Paperback)
    Virendra Kumar Gupt
    350

    Item Code: #KGP-1424

    Availability: In stock

    स्त्रियों-पुरुषों के हृदयों में एक-दूसरे के प्रति उठते-बैठते ज्वारभाटों की सबसे सच्ची, ईमानदारी शाब्दिक अभिव्यक्ति प्रेम पत्रों में ही हो पाई है । इसका कारण स्पष्ट है । जब भी व्यक्ति ने, स्त्री या पुरुष ने प्रेम-पत्र लिखा है, वह अनायास ही धन-पद-विद्वत्ता या सामाजिक प्रतिष्ठा की ऊंचाइयों से नीचे उतर आया है और स्त्रीत्व-पुरुषत्व की यथार्थ धरती पर खड़े होकर ही उसने अपने प्रेमी या प्रेमिका को संबोधित किया है । तब शरीर की सभी साज-सज्जाएं और चेहरे के सभी मुख़ौटे उतर जाते हैं और धड़कता हृदय ही सामने होता है । इस स्तर पर लिंकन, बायरन, क्रामवेल, नेपोलियन, विस्मार्क,शॉ और गांधी एक ही सुर में बोलते दिखाई पड़ते हैं ।
  • Jhansi Ki Rani (Paperback)
    Jaivardhan
    50

    Item Code: #KGP-7091

    Availability: In stock

    जयवर्धन का 'झाँसी की रानी' नाटक इसी क्रम की एक कड़ी है । यह सही है कि उन्होंने उस लडाई की सबसे ज्यादा परिचित और रेखांकित नायिका महारानी लक्ष्मीबाई को अपने नाटक के केंद्र में रखा है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने उस अल्पज्ञात इतिहास को भी पुनर्रचना करने की कोशिश की हैं, जो लक्ष्मीबाई के बचपन से लेकर युवा होने तक का इतिहास है । नाटक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि रचनाकार ने गीत-संगीत  अथवा सूत्रधार जैसी किसी भी बार-बार आजमायी हुई नाटकीय युक्ति का प्रयोग नहीं किया, उन्होंने फॉर्म अथवा शैली के स्तर पर यथार्थवादी शैली का चुनाव किया है और उसमें बहुत ही सरल और सहज तरीके से कथा को विकसित करते चले गए हैं।
  • Poorvi Uttar Pradesh Ka Sahityik Paridrishya (Paperback) (Two Volumes)
    Jagdish Narayan Shrivastva
    600

    Item Code: #KGP-912

    Availability: In stock

    पूर्वी उत्तर प्रदेश का साहित्यिक परिदृश्य (2 खंड)
    वरिष्ठ कवि व आलोचक जगदीश नारायण श्रीवास्तव ने ‘पूर्वी उत्तर प्रदेश का साहित्यिक परिदृश्य’ नाम से जो महाग्रंथ लिखा है, वह इतिहास से अधिक अनुसंधान है। एक विस्तृत देशकाल में अपने परिचित अंचल का इतिहास लिखना और साहित्य-संस्कृति को संश्लिष्ट करके देखना—जगदीश नारायण श्रीवास्तव ने इसे जिस तरह से संभव किया है, वह पूरे साहित्य-संसार को स्वागतयोग्य लगेगा। इतिहास-लेखकों में रामचंद्र शुक्ल, रामविलास शर्मा, नंददुलारे वाजपेयी और बच्चन सिंह जैसे लोग रहे हैं। हजारीप्रसाद द्विवेदी ने ‘हिंदी साहित्य की भूमिका’ लिखी, नामवर सिंह ने ‘दूसरी परंपरा की खोज’ जैसी कृति लिखी। इनसे अलग जगदीश नारायण श्रीवास्तव ने उस पूर्वांचल का इतिहास लिखा, जिसे वे ‘पूर्वी उत्तर प्रदेश : विचारों के सूर्योदय की धरती’ जैसा बहुलार्थी नाम देते हैं।...
    कहना न होगा कि जगदीश नारायण श्रीवास्तव का यह महाग्रंथ एक ऐतिहासिक ग्रंथ के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त करेगा। इसके पीछे एक दशक से अधिक की खोज, श्रमसाध्य वृत्त-संकलन, साक्षात्कार, पत्र-पत्रिकाओं से संकलित ऐतिहासिक जानकारियाँ संयोजित हैं। ऐसे कार्य प्रायः अकेले संभव नहीं होते। जगदीश नारायण श्रीवास्तव ने अकेले यह श्रमसाध्य कार्य संपन्न करने का जोखिम उठाया है। इसके लिए उन्हें हार्दिक बधाई। आशा है, पाठक इस ग्रंथ को तत्काल प्रकाशित देखना चाहेंगे और अपने पुस्तकालय में अग्रणी स्थान देंगे।
    —परमानंद श्रीवास्तव (भूमिका से)
  • Sangharsh Ki Pratimurti : Aang Saan Su Ki (Paperback)
    M.A. Sameer
    120

    Item Code: #KGP-7078

    Availability: In stock

    आग सान सू की यह नाम एक ऐसी महिला का है, जिसने अपने असाधारण धैर्य और असीमित देशप्रेम को भावना से अपने देश बर्मा को 70 वर्ष की तानाशाही सैन्य सरकार से मुक्ति दिलाकर लोकतंत्र की स्थापना करके विश्च भर को नारी-शक्ति से परिचित कराया हैं। इस महान् महिला सू की का जीवन कठिन संघर्षों, विपरीत परिस्थितियों में भी अविचल रहने के गुण और तानाशाहों की कुटिल प्रताड़नाओँ से भरा रहा है।
    प्रस्तुत पुस्तक 'संघर्ष की प्रतिमूर्ति -- आंग सान सू की : जीवन दर्शन' में आंग सान सू की के जीवन से जुडी घटनाओँ व तथ्यों को सरस, सरल और रोचक भाषाशैली में कलमबद्ध करने का प्रयास किया गया है। अहिंसा को अपना प्रमुख अस्त्र मानने वाली आग सान सू की के जीवन पर आधारित यह पुस्तक प्रत्येक वर्ग के पाठक को अवश्य रुचिकर लगेगी।
  • Godhooli (Paperback)
    Bhairppa
    150

    Item Code: #KGP-1414

    Availability: In stock

    गोधूलि
    ‘वंशवृक्ष’, ‘उल्लंघन’ तथा ‘पर्व’ जैसे महान् उपन्यासों के यशस्वी कृतिकार श्री भैरप्पा के श्रेष्ठतम उपन्यासों में है—‘गोधूलि’। कर्नाटक के ग्रामीण अंचल के माध्यम से भैरप्पा ने भारतीय अस्मिता की पहचान को ‘गोधूलि’ में सांस्कारिक गौरव के साथ उभारा है।
    प्रामाणिकता के साथ निर्लिप्तता भैरप्पा के लेखन की विशेषता है, जो ‘गोधूलि’ में उभरकर सामने आई है। ‘गोधूलि’ के कई संस्करण कन्नड़ में निकल चुके हैं। कन्नड़ तथा हिंदी में यह उपन्यास फिल्माया भी जा चुका है।
    गोधूलि’ जीवन के प्रति आस्था और मूल्यों के संघर्ष का संकेत है।
  • Gitanjali : Rabindranath Thakur (Paperpback)
    Rabindra Nath Thakur
    200 170

    Item Code: #KGP-86

    Availability: In stock


  • Jeevan Hamara (Paperback)
    Bebi Kambley
    60

    Item Code: #KGP-1509

    Availability: In stock

    जीवन हमारा
    मराठी लेखिका बेबी कांबले दलित साहित्य की प्रतिनिधि हस्ताक्षर हैं । दलित लोगों के विपन्न, दयनीय और दलित जीवन को आधार बनाकर लिखे गए इस आत्मकथात्मक उपन्यास ने मराठी साहित्य में तहलका मचा दिया था। महाराष्ट्र के पिछडे इलाके के सुदूर गाँवों में अस्मृश्य माने जाने वाले आदिवासी समाज ने जो नारकीय, अमानवीय और लगभग घृणित जीवन का जहर घूँट-घूँट पिया उसका मर्मांतक  आख्यान है यह उपन्यास । शुरु से अंत तक लगभग सम्मोहन की तरह बाँधे रखने वाले इस उपन्यास में दलितो के जीवन में जड़ें जमा चुके अंधविश्वास पर तो प्रहार किया ही गया है, उस अंधविश्वास को सचेत रूप से उनके जीवन में प्रवेश दिलाने और सतत पनपाने वाले सवर्णो की साजिश का भी पर्दाफाश किया गया है । इस उपन्यास को पढ़ना महाराष्ट्र के डोम समाज ही नहीं वरन् समस्त पददलित जातियों के हाहाकार और विलाप को अपने रक्त में बजता अनुभव करना है । शोषण, दमन और रुदन का जीवंत दस्तावेज है यह उपन्यास, जो बेबी कांबले ने आत्मकथात्मक लहजे में रचा है ।
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Ramdarash Mishra (Paperback)
    Ramdarash Mishra
    90

    Item Code: #KGP-1584

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : रामदरश मिश्र
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार रामदरश मिश्र ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'सीमा', 'सड़क', 'एक औरत एक जिदगी', 'खँडहर की आवाज', 'मां, सन्नाटा और बजता हुआ रेडियो’, 'निर्णयों के बीच एक निर्णय', 'मुर्दा मैदान', 'अकेला मकान', 'शेष यात्रा' तथा 'दिन के साथ' ।
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक रामदरश मिश्र की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Balram (Paperback)
    Balram
    130

    Item Code: #KGP-411

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : बलराम
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार बलराम ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'शुभ दिन', 'गोआ में तुम', 'शिक्षाकाल', 'पालनहारे', 'सामना', 'कलम हुए हाथ ', 'कामरेड का सपना ', 'मालिक के मित्र', 'अनचाहे सफर' तथा 'पहला सबक' ।
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक बलराम की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Chitra Mudgal (Paperback)
    Chitra Mudgal
    120

    Item Code: #KGP-7005

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ  : चित्रा मुद्गल
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार चित्रा मुद्गल ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'गेंद', 'लेन', 'जिनावर', 'जगदंबा बाबू गांव आ रहे हैं', 'भूख', 'प्रेतयोनि', 'बलि', 'दशरथ का वनवास', 'केंचुल' तथा 'बाघ'  ।
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक चित्रा मुद्गल की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Shyama Prasad Mukharjee : Jeevan Darshan (Paperback)
    Mukesh Parmar
    90

    Item Code: #KGP-1306

    Availability: In stock

    डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का नाम स्वतंत्र भारत के विस्तृत नवनिर्माण में एक महत्त्वपूर्ण आधरस्तंभ के रूप में उल्लेखनीय है। जिस प्रकार हैदराबाद को भारत में विलय के लिए पूरा श्रेय सरदार वल्लभभाई पटेल को जाता है, उसी प्रकार बंगाल, पंजाब और कश्मीर के अधिकतर भागों को भारत का अभिन्न अंग सुरक्षित करा पाने के दृष्टिकोण से डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के उल्लेखनीय प्रयास हमेशा अविस्मरणीय रहेंगे। उन्होंने किसी दल या सर्वोच्च नेतृत्वकर्ताओं के दबाव में आकर राष्ट्रहित को नजरअंदाज करते हुए कोई समझौता नहीं किया, न ही किसी दल की सीमा में बंधकर रहे। उनके लिए राष्ट्रहित ही सर्वोपरि था।
    उन्होंने जो भी निर्णय लिए राष्ट्रहित और हिंदुत्व की सुरक्षा की दृष्टि से लिए। यहां तक कि अपनी इसी विचारधारा के चलते अपना बलिदान तक दे दिया।
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Alamshah Khan (Paperback)
    Aalam Shah Khan
    170

    Item Code: #KGP-439

    Availability: In stock

    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।

    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।

    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार आलमशाह खान ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'पराई प्यास का सफर', 'आवाज की आरथी', 'मुरादों भरा दिन है', 'दंड-जीवी', 'मेहंदी रचा ताजमहल', 'लोहे का खून', 'तिनके का तूफान', 'पग-बाधा', 'किराए की कोख' तथा 'पंछी करे काम' । संपादक द्वारा लिखी गई पुस्तक की भूमिका के माध्यम से आलमशाह खान की समग्र कथा-यात्रा और उसके महत्त्व से भी सहज ही परिचित हुआ जा सकता है।

    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक आलमशाह खान की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

  • Toro Kara Toro-3 (Parivrajak) (Paperback)
    Narendra Kohli
    300

    Item Code: #KGP-50

    Availability: In stock


  • NATOHAM (Paperback)
    Meenakshi Swamy
    250

    Item Code: #KGP-1555

    Availability: In stock

    लब्धप्रतिष्ठ रचनाकार मीनाक्षी स्वामी का बहुचर्चित उपन्यास 'नतोअहं ' भारतभूमि के वैभवशाली अतीत और वर्तमान गौरव के सम्मुख विश्व के नतमस्तक होने का साक्षी है। यह भारतीय संस्कृति की बाह्म जगत् से आंतरिक जगत् की विस्मयकारी यात्रा करवाने की सामर्थ्य के अनावरण का अद्भुत परिणाम है।
    भारतीय संस्कृति के विराटू वैभव का दर्शन होता है—संस्कृतिक नगरी उज्जयिनी में बारह वर्षों में होने वाले सिंहस्थ के विश्वस्तरीय आयोजन में। उज्जयिनी का केंद्र शिप्रा है। इसके किनारे होने वाले सिंहस्थ में देश भर के आध्यात्मिक रहस्य और सिद्धियां एकजुट हो जाती हैं। इन्हें देखने, जानने को विश्व भर के जिज्ञासु अपना दृष्टिकोण लिए यहां एकत्र हो जाते हैं। तब इस पवित्र धरती पर मन-प्राण में उपजने वाले सूक्ष्मतम भावों की सशक्त  अभिव्यक्ति है यह उपन्यास ।
    इसमें मंत्रमुग्ध करने वाली भारतीय संस्कृति व सनातन धर्म के सभी पहलुओं पर वैज्ञानिक चिंतन  है, भारतीय अध्यात्म के विभिन्न पहलुओं को खरेपन के साथ उकेरा गया है।
    उज्जयिनी अनवरत सांस्कृतिक प्रवाह की साही है। यह केवल धर्म नहीं, समूची संस्कृति है, जिसमें कलाएं हैं, साहित्य है, ज्ञान है, विज्ञान है, आस्था है,  परंपरा है और भी बहुत कुछ है। यात्रा वृत्तांत शैली के इस उपन्यास में उज्जयिनी के बहाने भारतीय दर्शन, परंपराओं और संस्कृति की खोज है जो सुदूर विदेशियों को भी आकर्षित करती है। उज्जयिनी के लोक जीवन को झांकी के साथ भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का सतत आख्यान है जो पुरा मनीषियों की मेधा का महकता प्रतीक है।
    उपन्यास के विलक्षण कथा संसार को कुशल लेखिका ने अपनी लेखनी के संस्पर्श से अनन्य बना दिया है। नायक एल्विस के साथ पाठक शिप्रा के प्रवाह में प्रवाहित होता है, डुबकी लगाता है।
    'भूभल' जैसे सशक्त उपन्यास से कीर्ति पाने के बाद बहुचर्चित रचनाकार मीनाक्षी स्वामी का नवीनतम उपन्यास 'नतोअहं ' तथाकथित आधुनिकता से आक्रांत भारतीय जनमानस की अपनी जडों की ओर आकृष्ट करता है। भारतीय संस्कृति व अध्यात्म की खोज में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अप्रतिम उपहार है।
  • Toro Kara Toro (All 6 Vols.) (Paperback)
    Narendra Kohli
    2120 1484

    Item Code: #KGP-TKTPB1

    Availability: In stock

     All 6 Vols. in Paperback.
  • Kosh Vigyan (Paperback)
    150

    Item Code: #KGP-7076

    Availability: In stock


  • Gulloo Aur Ek Satrangi : 3 (Paperback)
    Shrinivas Vats
    115

    Item Code: #KGP-7061

    Availability: In stock

    तीसरा खंड लिखते समय मुझे आनंद की विशेष अनुभूति हुई। कारण, चुलबुला विष्णु कर्णपुर जो लौट आया। इस खंड को पढ़ते हुए आपको भी ऐसा लगेगा कि विष्णु की उपस्थिति हमें आव्हादित करती है। मैंने विभिन्न विधाओं में अब तक लगभग तीन दर्जन पुस्तकें लिखी हैं, लेकिन इस किशोर उपन्यास से मुझे विशेष लगाव है। भला क्यों?
    आपके मम्मी-पापा की तरह मेरे पिताजी भी मुझे डाॅक्टर बनाना चाहते थे। मैंने विज्ञान पढ़ा भी। पर जीवित मेढक, खरगोश के ‘डाइसेक्शन’ मन खिन्न हो उठा। मैंने अपनी दिशा बदल ली। मेरी अलमारी में जीवविज्ञान की जगह कालिदास, शेक्सपियर, टैगोर, प्रेचंद की पुस्तकें आ गई। साहित्य पढ़ना और लिखना अच्छा लगने लगा। सोचता हूं, भले ही मैं डाॅक्टर न बन सका, लेकिन विज्ञान और कल्पना के बीच संतुलन बनाते हुए बालकों के लिए लिखना चिकित्सकीय अनुभव जैसा ही है। संभव है चिकित्सक बनकर बच्चों से उतना घुल-मिल न पाता, जितना उन्हें अब समझ पा रहा हूं।
    सतरंगी की चतुराई ने तो मेरा मन ही मोह लिया। डाॅक्टर बनने की राह आसान हो गई। पूछो, कैसे? पढ़िए चैथे खंड में।
    -श्रीनिवास वत्स
  • Keshavraav Baliram Hedgewar : Jeevan Darshan (Paperback)
    M.A. Sameer
    100

    Item Code: #KGP-488

    Availability: In stock

    निडर और साहस के धनी डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार भारत की उन महान् विभूतियों में से एक हैं, जिन्होंने राष्ट्रसेवा के पथ पर चलते हुए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। अपनी जीवनशैली में सदैव अनुशासन और राष्ट्रप्रेम को अधिक महत्त्व देने वाले डॉ. केशवराव ने बाल्यावस्था में ही अपने अंग्रेजविरोधी तेवर दिखाने आरंभ कर दिए थे।
    डॉ. केशवराव उन विलक्षण व्यक्तियों में से थे, जो युवाओं की मानसिकता को भलीभांति जानते थे और उनकी क्षमताओं को विकसित करने के नए-नए तरीके खोजते रहते थे।
    देश की युवा पीढ़ी को भारत की सनातन संस्कृति और आदर्शों से जोड़े रखने के लिए 28 सितंबर, 1925 को विजयादशमी के पर्व पर ‘संघ’ नामक नए राष्ट्रीय हिंदूवादी संगठन की स्थापना की गई। साहस और अनुशासन पर आधारित इस संगठन को खड़ा करने का पूरा श्रेय डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार को जाता है। इस स्थापना-समूह के अन्य सदस्यों में डॉ. वी. एस. मुंजे, बापूजी सोनी तथा डॉ. परांजपे आदि वरिष्ठ नेता शामिल थे।
  • Parinti (Paperback)
    Narendra Kohli
    50

    Item Code: #KGP-7101

    Availability: In stock


  • Hausale Buland Hain (Paperback)
    Suraj Nagar
    100

    Item Code: #KGP-372

    Availability: In stock

    संसार में जो कुछ भी अनूठे, अद्वितीय, अविस्मरणीय, अतुलनीय एवं अद्भुत काम हुए हैं, वे चाहे किसी भी क्षेत्र में क्यों न हों, जैसे- स्थापत्यकला, मूर्तिकला, चित्रकला, संगीत, साहित्य-सृजन हो या कोई वैज्ञानिक आविष्कार, सब बुलंद हौसले का परिणाम है। हौसले की उड़ान से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है, हर सपना साकार होता है। हौसले बुलंद होना जीवन में प्रसन्नता का सूर्योदय होने जैसा है और हौसले पस्त होना सूर्यास्त होने जैसा है। बचपन से ही मेरे मन में कविताओं की ऐसी पुस्तक लिखने की इच्छा थी, जो निराशा को आशा में बदल दे। गम के काँटों में खुशियों के फूल खिला दे। अमावस की काली रात को दीपावली की तरह जगमगा दे। देश के प्रतिष्ठित किताबघर प्रकाशन, दिल्ली ने मेरे गीतों को पुस्तक का आकार दिया है। जिसका नाम है-‘हौसले बुलंद हैं’।
    ‘हौसले बुलंद हैं’ पुस्तक के सार्वभौमिक, सार्वकालिक, सर्वजनहिताय, सर्वजनसुखाय गीतों को साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डा. अलका तोमर ने अपनी अनूठी शैली में अंग्रेजी भाषा में रूपांतरित कर सार्वदेशिक बनाकर चार चाँद नहीं चालीस चाँद लगा दिए हैं। नई ऊर्जा, नया जोश, नई उमंग का संचार करने वाली इस पुस्तक के पहले गीत की रचना मंदोदरी का मायका, कालिदास द्वारा रचित मेघदूत में वर्णित दशपुर, शिवना तट पर स्थित पशुपतिनाथ की नगरी मंदसोर में हुई। रचना का यह क्रम क्षिप्रा तट स्थित ज्योतिर्लिंग मृत्युंजय महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल, झारखंड की राजधानी राँची देश की राजधानी दिल्ली, शंकर के त्रिशूल पर बसी अविनाशी काशी, त्रिवेणी संगम प्रयागराज, यमुना तट स्थित मथुरा गोवर्धन, देवी अहल्या की नगरी इंदौर, नर्मदा तट स्थित ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर, सागर तट स्थित मायानगरी मुंबई से चलकर ऐतिहासिक एवं पुरातत्त्व संपदा से भरपूर सूर्य पुत्री ताप्ती तट स्थित बुरहानपुर में पूर्ण हुआ।
    ‘हौसले बुलंद हैं’ पुस्तक प्रेरणा का पथ पराक्रम का रथ प्रसन्नता की गंगा है। इस पुस्तक की रचना में मुझे प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से प्रेरणा, सहयोग एवं मार्गदर्शन देने वाले सभी बुलंद हौसले वालों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ। ‘हौसले बुलंद हैं’ पुस्तक पढ़ने वालों के हौसले अवश्य बुलंद होंगे, ऐसा मुझे विश्वास है।
    -सूरज नागर
  • Aakhiri Adhaai Din (Paperback)
    Madhup Sharma
    120 108

    Item Code: #KGP-161

    Availability: In stock


  • Kavi Ne Kaha : Ekant Shrivastava (Paperback)
    Ekant Shrivastva
    140

    Item Code: #KGP-7021

    Availability: In stock

    एकान्त वस्तुतः छत्तीसगढ़ की ‘कन्हार’ के कवि हैं। एकान्त का काव्य-संसार एक ओर माँ-बाप, भाई-बहन का भरा-पूरा परिवार है तो दूसरी ओर अंधी लड़की, अपाहिज और बधिर जैसे असहाय लोगों का शरण्य भी और ‘कन्हार’ जैसी लंबी कविता तो एक तरह से नख-दर्पण में आज के भारत का छाया-चित्र ही है। ‘अन्न हैं मेरे शब्द’ से अपनी काव्य-यात्रा आरंभ करने वाले एकान्त उन थोड़े से कवियों में हैं जो ‘शब्द’ को अपनी कविताओं से एक नया अर्थ दे रहे हैं। निश्चय ही एकान्त का काव्य एक लंबी छलाँग है और ऊँची उड़ान भी--कवि के ही शब्दों में एक भयानक शून्य की भरपाई। ---नामवर सिंह
    काली मिट्टी से कपास की तरह उगने की आकांक्षा से उद्वेलित यह कवि अपनी हर अगली कविता में मानो पाठक को आश्वस्त करता है कि वह अपने भाव-लोक में चाहे जितनी भी दूर चला जाए, अंततः लौटकर वहीं आएगा जो उसके अनुभव की तपी हुई काली मिट्टी है। यह एक ऐसी दुनिया है जो एक किसानी परिवेश के चमकते हुए बिंबों और स्मृतियों से भरी है। एक अच्छी बात यह कि गहरे अर्थ में पर्यावरण-सजग इस कवि के पास एक ऐसी देखती-सुनती, छूती और चखती हुई भाषा है, जो पाठक की संवेदना से सीध संलाप करती है।   ---केदारनाथ सिंह
    एकान्त की कविता और कवि-कर्म की खूबी है कि उन्होंने अपने को औपनिवेशिक आधुनिकता के पश्चिमी कुप्रभाव से बचाया है। यही कारण है कि उनकी कविता कलावादी और रूपवादी प्रभाव से मुक्त है। ऐसा इसलिए कि एकान्त अपने जनपद, अपनी जड़ों और अपनी ज़मीन को कभी नहीं छोड़ते। उनकी कविता हमें भारतीय समृद्ध काव्य-परंपरा की याद दिलाती है जो आज की अधिकांश कविता से विलुप्तप्राय है। एकान्त, निराला, नागार्जुन, त्रिलोचन और केदारनाथ अग्रवाल की परंपरा के सशक्त कवि हैं। एकान्त की कविता में कोई ठहराव नहीं है। वे आज भी नित नवीन और सारगर्भित कविताएँ बिना किसी विचलन या दोहराव के रच रहे हैं। क्योंकि उनका गहरा रिश्ता भारतीय लोक और जनमानस से बना हुआ है। सही अर्थों में वे लोकधर्मी कवि हैं। ‘नागकेसर का देश यह’ हिंदी में एकान्त की सर्वाधिक लंबी कविता है जिसके कई अर्थ-ध्वनिस्तर हैं और बड़ी संश्लिष्टता है।      ---विजेन्द्र
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Ajeet Cour (Paperback)
    Ajeet Kaur
    175

    Item Code: #KGP-7010

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : अजीत कौर
    "दस प्रतिनिधि कहानियाँ" सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार अजीत कौर ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : "वन जीरों वन', 'सूरज, चिड़ियां और रब्ब', 'ना मारो', 'मौत अलीबाबा की', 'चौरासी का नवंबर है', 'कसाईबाड़ा', 'पिछले बसंत की पतंग' , 'हरी चिडिया’ , 'चीख एक उकाब की हैं' तथा 'नया साल'।
    हमेँ विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक अजीत कौर की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Rangeya Raghava (Paperback)
    Rangey Raghav
    140

    Item Code: #KGP-461

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : रांगेय राघव 
    "दस प्रतिनिधि कहानियाँ" सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार रांगेय राघव ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं :'पंच परमेश्वर', 'नारी का विक्षोभ', 'देवदासी', 'तबेले का धुँधलका', 'ऊँट की करवट', 'भय', 'जाति और पेशा, 'गदल', 'बिल और दाना' तथा 'कुत्ते की दुम और शैतान : नए टेकनीक्स'।
    हमेँ विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक रांगेय राघव की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Yug Pravartak Swami Dayanand (Paperback)
    Lala Lajpat Rai
    80

    Item Code: #KGP-815

    Availability: In stock


  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Maheep Singh (Paperback)
    Mahip Singh
    80

    Item Code: #KGP-7016

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : महीप सिंह
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ 'किताबघर' की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    'किताबघर' गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए अग्रज कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कथाकार महीप सिंह ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'उलझन', 'पानी और पुल', 'कील', ‘सीधी रेखाओं का वृत्त', 'शोर', 'सन्नाटा', 'सहमे हुए', 'धूप के अंगुलियों के निशान', 'दिल्ली कहाँ है?' तथा 'शोक'। 
    हमेँ विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात कथाकार महीप सिंह की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Pracheen Brahman Kahaniyan (Paperback)
    Rangey Raghav
    150

    Item Code: #KGP-499

    Availability: In stock

    प्राचीन ब्राह्मण कहानियाँ
    आर्य संस्कृति के आदि संस्थापकों की जीवन-झाँकियाँ प्रस्तुत करने वाली ये कहानियाँ रोचक तो हैं ही, ज्ञानवर्धक भी हैं ।

  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Nirmal Verma (Paperback)
    Nirmal Verma
    100

    Item Code: #KGP-1263

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : निर्मल वर्मा
    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार निर्मल वर्मा ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'दहलीज', 'लवर्स', 'जलती झाडी', 'लंदन की एक रात', 'उनके कमरे'', 'डेढ़ इंच ऊपर', 'पिता और प्रेम', 'वीकएंड', जिंदगी यहाँ और वहाँ' तथा 'आदमी और लड़की' ।
    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक निर्मल वर्मा की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Vichaar-Bindu (Paperback)
    Atal Bihari Vajpayee
    200 170

    Item Code: #KGP-456

    Availability: In stock

    विचार-बिन्दु
    हमने अपने दैनिक जीवन में स्वतंत्रता, समानता और सहिष्णुता के सिद्धांतों क्रो संजोकर रखा है । यदि 21वीं शताब्दी में विश्व को अब तक के विश्व से अच्छा बनाना है तो इन मूल्यों को अपनाना जरूरी  है । इतिहास भी साक्षी है कि इन मूल्यों को अपनाने का उपदेश देना तो आसान है, परंतु इन पर अमल करना मुश्किल है । लेकिन अब, जबकि हमारी परस्पर निर्भरता बढ़ रही है, इसका कोई विकल्प नहीं है । विश्व और इसके नेताओं को पूरी इच्छाशक्ति के साथ समय की मांग को देखते हुए नए युग में एक नए दृष्टिकोण के साथ प्रवेश करना चाहिए । हमारी सामने यही कार्य है और मैं घोषणा करता हूँ कि भारत आने वाली परीक्षा की घडी में अपना पूरा  योगदान देने के लिए तैयार है ।
    -अटल बिहारी वाजपेयी
  • Shatal (Paperback)
    Narendra Kohli
    40

    Item Code: #KGP-7098

    Availability: In stock


  • Das Pratinidhi Kahaniyan : Govind Mishra (Paperback)
    Govind Mishra
    90

    Item Code: #KGP-7229

    Availability: In stock

    'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।

    इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।

    किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार गोविन्द मिश्र ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं :'जनतंत्र', 'फांस', 'सिर्फ इतनी रोशनी', 'सुनंदो की खोली', 'खुद के खिलाफ', 'युद्ध', 'खाक इतिहास', 'पगला बाबा', 'वरणांजलि' तथा 'मायकल लोबो' ।

    हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक गोविन्द मिश्र की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।
  • Sanchit Bhukh (Paperback)
    Narendra Kohli
    35

    Item Code: #KGP-7097

    Availability: In stock


  • Nirogyogsadhna (Paperback)
    Manoj Kumar Chaturvedi
    180

    Item Code: #KGP-7070

    Availability: In stock

    निरोगयोगसाधना
    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम हर क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं और दिन-रात उसके लिए प्रयास करते रहते हैं। इस आपाधापी में व्यक्ति सबसे अहम चीज को जो नकार देता है वह है ‘स्वयं का स्वास्थ्य’। वह यह नहीं समझते कि इस संसार की प्रत्येक वस्तु तभी आपके लिए उपयोगी होगी जब आप उसका आनंद लेने के लिए तैयार होंगे। व्यक्ति यदि स्वस्थ नहीं तो संसार की कीमती से कीमती वस्तु भी उसके लिए बेकार है। स्वस्थ जीवन है तो जहान है। 
    योग द्वारा कैसे व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से संपूर्णतया स्वस्थ रह सकता है, इसका विस्तारपूर्वक वर्णन इस ‘निरोगयोगसाधना’ नामक पुस्तक के माध्यम से किया गया है।
    योग दर्शनशास्त्र में वर्णित सूत्र षड्दर्शन का ही छठा अंग है। ये षड्दर्शन वेदों के उपांग माने गए हैं। इसी कड़ी में आगे बढ़ते हुए शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निशक्त, छंद, ज्योतिष आदि वेदों के अंग कहलाते हैं जिनके द्वारा वेद मंत्रों के अर्थ का ज्ञान होता है।
    योग ऐसी कला है जो प्रकृति और मनुष्य के बीच के अंतर को स्पष्ट कर व्यक्ति के समक्ष प्रस्तुत करती है। अर्थात् व्यक्ति योग के माध्यम से इंद्रियों को अपने वश में करने लायक बन जाता है और माया के बंधन से भी स्वयं को तोड़कर मुक्त हो जाता है। योग अनादिकाल से चला आ रहा है और इसकी उपयोगिता व्यक्ति तभी समझ सकता है जब वह योग को स्वयं पर लागू करे, उसमें रम जाए। योग करने वाला व्यक्ति कभी बूढ़ा या बीमारी से ग्रसित नहीं होता।
    —भूमिका से
  • Akasmaat Kuchh Kavitayen (Paperback)
    Surendra Pant
    160

    Item Code: #KGP-7216

    Availability: In stock

    हिंदी कवियों ने अपने काव्य-मुहावरों को यदि रसिकतापूर्ण काव्यरूपों से श्रृंगारित किया है तो कुछ कवियों ने कविताओं को चीखने की स्वतंत्रता भी दी है। मगर इस संगह की कविताओं में पाठक पाएंगे कि कवि का सरोकार बृहत्तर मानवता की उपस्थिति करने में कई बार वह संप्रेषणीयता की रूप-सज्जा की भी परवाह नहीं करता। व्यापक जनहितों की आकांक्षाओं के बीच से अंकुरित इन कविताओं को सच्चे ईश्वर, खरे अध्यात्म तथा खनकदार वर्तमान की चाहत है, जो भोले-भाले लोक को उसकी निष्कपटता लौटा सके। ‘मदर टेरेसा’ पर केंद्रित कविता को पढ़कर हमें कवि की मानवगत अवधारणाओं का समूचा अहसास होता है।
    पुलिस विभाग के अत्यंत महत्वपूर्ण एवं ‘संवेदनशील’ पद का निर्वहन करते हुए यह कवि समाज और राजनीति की ‘रणनीति’ में लाखों-लाख हंसते-रोते हैवानों-इंसानों के परम-चरम अनुभवों का साक्षी रहा है, इसीलिए ये कविताएं हमारे समय और समाज की धाराओं-उपधाराओं के रूप में कवि के सामने ‘पेशी’ पाकर शब्दांकित होती हैं। संभवतः इस अनुभवबहुलता ने कवि को किसी इकहरे विषय का मर्मज्ञ न रहने देकर, सर्वत्र का प्रवक्ता कवि भी बना दिया है। यह भी उल्लेखनीय है कि इस विविधता के बावजूद कवि का ध्यान अपने देश, संस्कृति और जन पर लगभग प्रत्येक कविता मंे कंेद्रीकृत हुआ है।
    कहना न होगा कि इन कविताओं के नए तेवर का आगमन भले ही अकस्मात् रूप में हुआ है, मगर निश्चित ही इनका सृजन गहरी विचारशीलता के बाद ही संभव हुआ होगा।
  • Satta Ke Aar-Paar (Paperback)
    Vishnu Prabhakar
    35

    Item Code: #KGP-932

    Availability: In stock

    सत्ता के आर-पार
    सत्ता और सेवा, सत्ता और तप, सत्ता और मनीषा इनका परस्पर क्या संबंध है, अनादिकाल से हम इसी प्रश्न से जूझते आ रहे हैं। कितने रूप बदले सत्ता ने। बाहरी अंतर अवश्य दीख पड़ा, पर अपने वास्तविक रूप में वह वैसे ही सुरक्षित रही, जैसे अनादिकाल में थी, अनगढ़ और क्रूर।
    प्रस्तुत नाटक लिखने का विचार मेरे मन में इन्हीं प्रश्नों से जूझते हुए पैदा हुआ था। जेने वाड्मय की अनेक कथाओं ने मुझे आकर्षित किया। प्रस्तुत नाटक ऐसी ही एक कथा का रूपांतकर है। 
    आधुनिक युग की प्रायः सभी समस्याएं मूल रूप में अनादिकाल में भी वर्तमान थीं। उनका समाधान खोजने के लिए लोग तब भी वैसे ही व्याकुल रहते थे जैसे आज। तो कैसी प्रगति की हमने? कहां पहुंचे हम? ये प्रश्न हमें बार-बार परेशान करते हैं। भले ही उनका वह समाधान न हो सके जो तब हुआ था, पर शब्दों की कारा से मुक्ति पाने को हम आज भी उसी तरह छटपटा रहे हैं। यह छटपटाहट ही मुक्ति के मार्ग की ओर ले जाती है।
    -इसी पुस्तक की भूमिका से
  • Hindi Ki Pratinidhi Kahaniyan : Taatvik Vivechan (Paperback)
    Jayanti Prasad Nautiyal
    60

    Item Code: #KGP-7029

    Availability: In stock

    कहानी साहित्य पर अनुशीलन, साहित्य की अन्य विधाओं की अपेक्षा कम ही हुआ है । कहानी साहित्य जहाँ एक ओर भारत के सभी विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाता है  वहीं दूसरी ओर कहानी  पाठक वर्ग बहुत विस्तीर्ण है, परंतु इतने विराट और व्यापक साहित्य पर आलोचना, समालोचना तथा तात्त्विक विवेचनपरक साहित्य बहुत कम मात्रा में उपलब्ध है ।
    इस पुस्तक में कथा तत्त्वों का विश्लेषण, शब्दार्थ एवं टिप्पणी खंड तथा व्याख्या खंड आदि का अनुशीलन उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम के बोर्डों, विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर किया गया है । 
    संक्षेप में कहें तो कह सकते हैं कि यह पुस्तक सम्पूर्ण भारत में विश्वविद्यालयों, बोर्डों, महाविद्यालयों आदि के प्राध्यापकों तथा विद्यार्थियों के लिए तो उपयोगी है ही, साथ ही यह पुस्तक शोधार्थियों, कथा साहित्य के गंभीर अध्येताओं, समालोचकों, समीक्षकों के लिए भी उपादेय सिद्ध होगी ।  इस पुस्तक को इस प्रकार लिखा गया है कि यदि सामान्य पाठक भी इसे पढ़ना चाहे तो उसे हिंदी कथा साहित्य की पर्याप्त जानकारी प्राप्त हो ।
  • Hum Yahan The (Paperback)
    Madhu Kankria
    300 240

    Item Code: #KGP-7232

    Availability: In stock

    ‘जंगल कुमार! सफलता-असफलता कुछ नहीं होती। असली चीज होती है आपके जीवन का ताप कितनों तक पहुंचा। जीवन का अर्थ है अपने पीछे कुछ निशान छोड़ जाना।’ दीपशिखा वेफ ये वाक्य मधु कांकरिया के नवीनतम उपन्यास हम यहां थे की सैद्धांतिकी है। इस उपन्यास के दो केंद्रीय चरित्रा हैं–दीपशिखा और जंगल कुमार। दोनों अलग-अलग पृष्ठभूमि और अलग-अलग शहर से आए–लेकिन लक्ष्य की समानता उनको जीवन पथ पर अभिन्न बना देती है।
    ‘हम यहां थे’ जीवन में व्याप्त करुणा, प्रतिरोध, संघर्ष, स्वप्न, संकल्प और समर्पण का अनुसंधन है। किसी ने कहा था कि लक्ष्यहीन जीवन भ्रष्ट और दयनीय होता है। यह जीवन सत्य धीरे-धीरे उपन्यास की नायिका या केंद्रीय अस्मिता दीपशिखा के भीतर आकार लेता है। इसको वृत्तांत का रूप देने के लिए मधु कांकरिया ने डायरी का शिल्प अपनाया है। ‘दीपशिखा की डायरी: अपने अपने जंगल’ से ‘ओ जिंदगी! ओ प्राण!’ जैसे कई उपशीर्षकों में दीपशिखा के बहाने एक सामान्य स्त्री के भीषण संघर्ष और कोलकाता की सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक स्थितियों का वर्णन किया गया है। ‘उत्तराधर’ में जंगल कुमार के पक्ष से दीपशिखा के वृत्तांत को संपूर्ण किया गया है। अर्थात् आदिवासियों के बीच जाकर उनके संघर्ष में सहभागी बनकर दीपशिखा ‘कैदी नंबर 989’ बन गई। मधु कांकरिया ने अद्भुत ढंग से आदिवासी अस्मिता और संघर्ष को शब्द दिए हैं। प्रकृति और प्रकृतिसंतानों के साथ व्यवस्था और बाजार के सुलूक हृदय को विचलित कर देते हैं। जंगलों की अंधधुंध कटाई और जंगली जानवरों को बेघर होते देख जिस खतरे की ओर वे इशारा करती हैं उसकी अनदेखी कर भविष्य की ओर देखना संभव नहीं है। मानव मन के गहरे स्तरों को छूती यह कहानी जीवन के दर्द और सौंदर्य, प्रेम और उदासी को अद्भुत ढंग से रचती है। पूरे उपन्यास में भाषा के अनेक रचाव हैं, लेकिन जब दीपशिखा और जंगल कुमार का साहचर्य आता है तब भाषा सचमुच सहृदय हो उठती है।
    ‘हम यहां थे’ एक ऐसा उपन्यास है जो जीवन के कठोर सत्य को वर्तमान के तीखे प्रकाश में परिभाषित करता है।
  • Neeraj Ke Prem Geet (Paperback)
    Gopal Das Neeraj
    140 126

    Item Code: #KGP-7063

    Availability: In stock

    नीरज के प्रेमगीत
    लड़खड़ाते हो उमर के पांव,
    जब न कोई दे सफ़र में साथ,
    बुझ गए हो राह के चिराग़
    और सब तरफ़ हो काली रात,
    तब जो चुनता है डगर के खार-वह प्यार है ।
    ० 
    प्यार में गुजर गया जो पल वह
    पूरी एक सदी से कम नहीं है,
    जो विदा के क्षण नयन से छलका
    अश्रु वो नदी से कम नहीं है,
    ताज से न यूँ लजाओ
    आओं मेरे पास आओ
    मांग भरूं फूलों से तुम्हारी
    जितने पल हैं प्यार करो 
    हर तरह सिंगार करो,
    जाने कब हो कूच की तैयारी !
    ० 
    कौन श्रृंगार पूरा यहाँ कर सका ?
    सेज जो भी सजी सो अधूरी सजी,
    हार जो भी गुँथा सो अधूरा गुँथा,
    बीना जो भी बजी सो अधूरी बजी,
    हम अधुरे, अधूरा हमारा सृजन,
    पूर्ण तो एक बस प्रेम ही है यहाँ
    काँच से ही न नज़रें मिलाती रहो,
    बिंब का मूक प्रतिबिंब छल जाएगा ।
    [इसी पुस्तक से ]
  • Dus Pratinidhi Kahaniyan : Sanjiv (Paperback)
    Sanjeev
    80

    Item Code: #KGP-1271

    Availability: In stock

    दस प्रतिनिधि कहानियाँ : संजीव
    कहानियों सें विषयों के व्यापक शोध, अनुभव के संदर्भ, समसामयिक प्रसंग और प्रश्न तथा पठनीय वृत्तांतों का संयुक्त एव सार्वजनिक संसार ही संजीव की कहानियाँ चुनता-बुनता है। इन कथाओं की सविस्तार प्रस्तुति से अभिव्यक्त समाहार का अवदान इस कथाकार को उल्लेख्य बनाता है। घटनाओं की क्रीड़ास्थली बनाकर कहानी को पठनीय बनाने में इस कहानीकार की विशेष रुचि नहीं होती बल्कि यह ऐसे सारपूर्ण कथानक की सुसज्जा में पाठक को ले जाता है, जहाँ समकालीन जीवन का जटिल और क्रूर यथार्थ है तथा पारंपरिक कथाभूमि की निरूपणता और अतिक्रमणता भी । यथार्थ के अमंगल ग्रह को, पढ़वा लेने की साहिबी इस कथाकार को सहज ही प्राप्त है, जिसे इस संग्रह की कहानियों में साक्षात् अनुभव किया जा सकता है ।
    प्रस्तुत कहानियों के कथानक सुप्त और सक्रिय ऐसे 'ज्वालामुखी' है, जो हमारे समय में सर्वत्र फैले हैं और समाचार तथा विचार के मध्य पिसते निम्नवर्गीय व्यक्ति के संघर्ष और जिजीविषा के लिए प्रेतबाघा बने हैँ। अनगिनत सुखों और सुविधाओं के बीच मनुष्य जाति का यह अधिकांश हिस्सा क्यों वंचित, शोषित छूट गया है- इस तथ्य की पड़ताल ये कहानियाँ पूर्णत: लेखकीय प्रतिबद्धता के साथ करती है ।
    सजीव द्वारा स्वयं चुनी गई ‘दस प्रतिनिधि कहानियाँ' हैं- 'अपराध', 'टीस', 'प्रेत-मुक्ति' 'पुन्नी माटी', 'ऑपरेशन जोनाकी', 'प्रेरणास्रोत', 'सागर सीमांत', 'आरोहण', 'नस्ल' तथा 'मानपत्र' ।
  • Aadarsh Saamaanya Hindi (Paperback)
    Vijay Agarwal
    90

    Item Code: #KGP-7105

    Availability: In stock


  • Manu Ko Banaati Manaii (Paperback)
    Gyanendrapati
    160

    Item Code: #KGP-415

    Availability: In stock


  • Gulaha- E- Parishaan (Paperback)
    Khursheed Nabi Abbasi
    300

    Item Code: #KGP-7113

    Availability: In stock

    गुलहा-ए-परीशाँ 
    एक जमाने में हर पढ़ा-लिखा काव्य-प्रेमी अच्छे-अच्छे और पसंदीदा अशआर को एक बयाज (संग्रह) रखता था, जिसमें दर्ज शेर जिंदगी की कशमकश, प्रतिकूल परिस्थितियों, सुख और दु:ख  क्षणों में उसे याद आते थे और उनको दोहराकर वह अपना दु:ख घटाता या सुख में वृद्धि कर लेता था ।  आज का जीवन व्यस्ततर है और हर व्यक्ति अस्तित्व के संघर्ष में ऐसा गूँथा हुआ है कि जिंदगी की लताफ़त अब उसे आकर्षित नहीं कर पाती । ऐसे में यदि काव्य-सागर के मंथन से निकले कुछ काव्य-रत्न उसे दिए जाएं तो वह अपनी जिंदगी को कटुता और वेदना में कुछ कमी महसूस कर सकता है । इसी विचार से प्रस्तुत संकलन में तीन सौ से अधिक विषयों पर कहे गए शेर एकत्रित किए गए हैं, जिनके साथ हमारे जीवन के अनेकानेक अनुभव जुड़े हुए हैं और यह कोशिश की गई है कि तवज्जो शाइर के नाम पर नहीं, उसके द्वारा किसी विषय विशेष पर रचे हुए शेर पर ही दी गयी है ।  शेर के चयन में रदीफ-क्राफिया, कल्पना-शक्ति, उपमा-अलंकार पर इतना बल नहीं दिया गया है, जितना शाइर की आत्मा की व्याकुलता या उसकी मनोदशा की तीव्रता को मद्देनजर रखा गया है।
    उर्दू के सभी या अधिकतर शाइरों के प्रतिनिधि शेरों का यह संकलन अपने में एक अनूठा प्रयास है, जिसका हिंदी जगत् में निश्चय ही स्वागत किया जाएगा ।
  • Swatantrata Ka Prateek-Maharana Pratap (Paperback)
    M.A. Sameer
    150

    Item Code: #KGP-7210

    Availability: In stock

    स्वतंत्रता और महाराणा प्रताप जैसे पर्यायवाची बन गए हैं। आजादी के लिए जीवनपर्यंत संघर्ष करने वाले इस महान् योद्ध को पूरा देश अपना आदर्श मानता है। अकबर की विशाल सेना के सामने हल्दीघाटी के मैदान में युद्ध करना और उसमें दुश्मनों के दांत खट्टे कर देना यह महाराणा प्रताप के वश की ही बात थी। राजपूतों के शौर्य और स्वाभिमान को उन्होंने आकाश की ऊंचाइयों तक पहुंचाया। जाने कितने कष्ट सहे, घास की रोटियां खाईं, अपने साथियों को युद्ध में खोया, प्रिय घोड़े चेतक का विछोह सहा लेकिन अपनी प्रतिज्ञा पर अडिग रहे। 
    ‘स्वतंत्रता का प्रतीक—महाराणा प्रताप’ पुस्तक ऐसे महान् व्यक्तित्व के जीवन दर्शन को सरल शब्दों में प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक आत्मबोध कराती है, देशभक्त बनाती है। यह संदेश भी देती है कि यदि मनुष्य हिम्मत न हारे तो वह कुछ भी कर सकता है। 
  • Ramlubhaya Haazir Hai (Paperback)
    Raj Kumar Gautam
    120

    Item Code: #KGP-1175

    Availability: In stock


  • Naya Vidhaan (Paperback)
    Sharat Chandra Chattopadhyaya
    120

    Item Code: #KGP-203

    Availability: In stock


  • Suno Shefali (Paperback)
    Kusum Kumar
    40

    Item Code: #KGP-7083

    Availability: In stock


  • Ila (Paperback)
    Prabhakar Shrotiya
    35

    Item Code: #KGP-1093

    Availability: In stock


  • Vastunishth Hindi (Paperback)
    Pooran Chand Tandon
    180

    Item Code: #KGP-7028

    Availability: In stock

    आज वर्तमान समय दौड़ का समय है जहाँ स्पर्धा है, प्रतियोगिता है जिनके चलते सभी विषयों के रूप-उपरूप उनके ही अनुरूप गढ़ा जाने लगा है । यदि आज की प्रतियोगी परीक्षाओं पर दृष्टपात करे तो हम पाते हैं कि विभिन्न परीक्षा-संस्थाओं द्वारा परीक्षार्थी के ज्ञान को मापने के लिए कुछ नए सूत्र ईजाद किये गए है, जिसके अंतर्गत वे कम से कम समय में प्रतिभागी के सकल ज्ञान की परीक्षा ले लेना चाहते हैं । 'कर्मचारी चयन आयोग' हो अथवा 'संघ लोक सेवा आयोग' सभी आज आधुनिक रीति से ज्ञान की परीक्षा ले रहे हैं जिसमें वस्तुनिष्ठ प्रश्नों द्वारा परीक्षा लेना रामबाण सिद्ध हुआ भी है । इसके माध्यम से परीक्षार्थी के समग्र ज्ञान की परीक्षा कुछ ही समय में हो जाती है । वस्तुनिष्ठ प्रश्न व्यवस्था वास्तव में है क्या ? इस पद्धति के अंतर्गत जो भी प्रश्न पूछा जाता है उस प्रश्न के चार वैकल्पिक उत्तर होते हैं । उन चारों उत्तरों में से एक ही उत्तर सही होता है । परीक्षार्थी को उस सही उत्तर का चयन करना पड़ता है । 
    स्तर की गरिमा तथा विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए संपूर्ण हिंदी साहित्य, काव्यशास्त्र तथा भाषा-विज्ञान से ऐसे प्रश्नों को चुना है जो की परीक्षा एवं ज्ञान दोनों की दृष्टि से सहायक हों । वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के अतिरिक्त अंत में तथ्यात्मक पक्ष के अंतर्गत विद्यार्थियों की सुविधा हेतु प्रश्नों एवं उत्तर को भी आमने-सामने रख गया है । इससे विद्यार्थी वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का ज्ञानार्जन तो कर ही सकेंगे, साथ  ही कुछ अन्य तथ्यात्मक पहलुओं से भी अभिज्ञ हो सकेंगे ।
  • Kavi Ne Kaha : Viren Dangwal (Paperback)
    Viren Dangwal
    90

    Item Code: #KGP-1540

    Availability: In stock

    कवि ने कहा : वीरेन डंगवाल
    वैश्वीकरण भाषाओं, संस्कृतियों और कविता का शत्रु है। उसका स्वप्न एक ऐसी मनुष्यता है जो उसी गांव में बसती है, उसी तरह रहती-सोचती- पहनती, हाव-भाव रचती और खाती-पीती है । एक रासायनिक संस्कृति-बोध से लैस इस वैश्विक  मनुष्यता का आदर्श भी अंतर्राष्ट्रीयवाद है मगर अपने मूल मानवीय अर्थ के बिलकुल उलटे अर्थ में। यह वैश्विक मनुष्य तो पारंपरिक संस्कृतियों और ज्ञान को नष्ट करने वाला और अधिनायकवादी है जो केवल बाजार और उपभोग को मान्यता देता है । यह बहुत पूंजी के प्रचंड विचार का वाहक और यथास्थिति का घनघोर पोषक है । जीवन की अनुकृति बनने वाली कविता उसे रास नहीं आती। वह तो सारे जीवन को अपनी अनुकृति बना देना चाहता है । कविता अगर हमारे समय में पाठकों का रोना रो रही है तो उसकी एक बडी वजह भी बाजार और उपभोग का सारथी वही वैश्विक मनुष्य है ।

  • Snehbandh Tatha Anya Kahaniyan (Paperback)
    Malti Joshi
    180 153

    Item Code: #KGP-7038

    Availability: In stock

    वरिष्ठ रचनाकार मालती जोशी असंख्य पाठकों की प्रिय कहानीकार हैं। आज जब अनेक तर्क देकर यह कहा जा रहा है कि साहित्य के पाठक सिमटते जा रहे हैं तब पाठकों को मालती जोशी की हृदयस्पर्शी कहानियों की प्रतीक्षा रहती है। ‘स्नेहबंध तथा अन्य कहानियां’ में उनकी ऐसी ही रचनाएं हैं। उनकी लोकप्रिय रचनाशीलता का रहस्य लेखन की सहजता में छिपा है। कथानक का चयन, भाषा, पात्रों का अंतरद्वंद्व और अभिव्यक्ति प्रण