Filter selection

Author
Price

interviews

  • grid
  • Maitreyi Uwach
    Sushil Sidharth
    500 425

    Item Code: #KGP-MU HB

    Availability: In stock

    मैत्रेयी पुष्पा को पढ़ते हुए मुंशी प्रेमचंद का वह अविस्मरणीय भाषण याद आता रहता है जिसमें उन्होंने सौंदर्य का मेयार बदलने का आह्नान किया था। मनोरंजन और बेचैनी केबीच एक निर्णायक रेखा खींची थी। मैत्रेयी ने सौंदर्य की व्याख्या नहीं कीउसका मेयार बदल दिया। ऐसे कथानक और पात्र कथा साहित्य में आए कि कुलीनतंत्र में भगदड़ मच गई।अनुभवों की रेशमी चादरों में लिपटे लोग भरोसा नहीं कर पाए कि यह जीवन इसी देश का हैये पात्र इसी समाज के हैं। कायदनमैत्रेयी की रचनाओं का समाजशास्त्रीय अध्ययनहोना चाहिए।

    इस अध्ययन में इस पुस्तक में संग्रहीत 39 संवाद अनेक अर्थों में उपयोगी साबित होंगे। यहां मैत्रेयी उवाच की एक ऐसी छटा देखने को मिलेगी जिसमें उनका लेखकविचारकएक्टिविस्ट और स्त्री विमर्शकार खुलकर बात करता है। इससे प्रश्नकर्ताओं और मैत्रेयी जी के बीच एक ऐसी विचारधारा बही है जिसमें पाठक भी स्वयं को रससिक्त पाएंगे।


Scroll