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children books

  • grid
  • Gudgudate Chutkulle
    Kulbhushan Lal Makhija
    50

    Item Code: #KGP-1025

    Availability: In stock


  • Chahak Bhi Zaroori Mahak Bhi Zaroori
    Sher Jung Garg
    40

    Item Code: #KGP-1247

    Availability: In stock


  • Mahatma Gandhi
    Jagat Ram Arya
    70 63

    Item Code: #Kgp-mg

    Availability: In stock


  • Geeton Ke Indradhanush
    Sher Jung Garg
    50

    Item Code: #KGP-1210

    Availability: In stock


  • Swami Dayanand
    Jagat Ram Arya
    70 63

    Item Code: #Kgp-sd

    Availability: In stock


  • Bihar Ke Prasiddh Sahityaakar Fanishwarnath Renu
    Saadat Hasan Manto
    70 63

    Item Code: #Kgp-bkpsfr

    Availability: In stock


  • Bhakti Bhandari Basveshwar
    Hari Krishna Devsare
    150 135

    Item Code: #Kgp-bbb

    Availability: In stock


  • Pramukh Nadiya
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-pn

    Availability: In stock


  • Aazaadi Ke Geet
    Vinod Chandra Pandey
    30

    Item Code: #KGP-938

    Availability: In stock


  • Gulloo Aur Ek Satrangi : 7 (paperback)
    Shrinivas Vats
    180 144

    Item Code: #GAES-7

    Availability: In stock

    प्रिय बाल पाठको!

     

    आपने इस उपन्यास के  छह खंडों को जिस तत्परता से पढ़ा, उनका लेखन भी उतनी ही तत्परता से हुआ है। लेखन के  दौरान कई अनूठे अनुभव हुए। ऐसी ही एक घटना का उल्लेख यहाँ करना चाहूँगा। 

    ग्रीष्म ऋतु थी। तिनके  चोंच में दबाए पक्षियों का एक जोड़ा घोंसला बनाने के  लिए उपयुक्त स्थान की तलाश में इधार-उधार भटक रहा था। बरामदे में कुर्सी पर बैठा मैं उन्हें काफ़ी देर तक निहारता रहा। वे शायद यह सोचकर शांत बैठ गए कि यह व्यक्ति उठे तो बात बने।

     

    हुआ भी ऐसा ही। ज्यों ही मैं उठकर अंदर कमरे में गया, वे उड़कर बरामदे में उस टाँड़ पर  बैठे जहाँ मेरा निजी सामान रखा रहता था। मसलन संदूकची, किताबों के बंडल, दवा की पुरानी शीशियाँ डिब्बे।

     

    संभवतः परिंदे इस स्थान का पहले कई बार मुआयना कर चुके होंगे। तभी तो तिनके  एकत्र करने से पूर्व आश्वस्त हो गए थे कि घोंसले के  लिए यह एकदम सही स्थान है। घोंसला बनानेअंडे देने के  लिए उनकी दृष्टि में वही स्थान सर्वोत्तम हो सकता था जहाँ बिल्ली या अन्य हिंसक जीव पहुँच सके।

     

    इस प्रयोजन के लिए यह स्थान सर्वोत्तम था। पशु-पक्षियों से ही नहीं, वर्षा, सर्दी, गर्मी तीनों ऋतुओं के प्रतिकूल मौसम में भी यहाँ उनकी संतति सुरक्षित रह सकती थी। खैर! मैंने इस ओर अधिक ध्यान  नहीं दिया और अपने नित्य प्रति के कार्यों से निवृत्त हो मैं कार्यालय चला गया। घर वापसी तक सूर्यास्त हो चुका था। ऐसे में मेरी अनुपस्थिति में यह बरामदा दिन भर निर्जन रहा। खग-युगल के लिए तब यह जगह किसी अभयारण्य से कम थी।

    अस्तु! किताबों के बंडल के पीछे कब उनका नीड़ पूरा हुआ और कब मादा पक्षी ने उसमें अंडे दे दिए, मुझे पता तक नहीं चल पाया। संभव था, मुझे पता चलता तो मैं घोंसला बनने देता। जाहिर है तिनकों से गंदगी फैलाती और पंछियों की बीट गिरने से किताबें खराब हो जातीं।


    एक दिन जब मैं बरामदे में पहुँचा तो टाँड़ पर उस पक्षी को बैठे देख मेरा माथा ठनका। मैंने सीढ़ी लगाई और यह देखने के लिए ऊपर चढ़ा कि माजरा क्या हैमेरा अंदाजा सही निकला। घोंसले में मादा ने दो अंडे दिए थे और उन्हें सेने के लिए वह उन पर बैठी थी। मुझे सीढ़ी पर चढ़ा देख नर पक्षी डरकर भाग गया। मादा वहीं बैठी रही। मैंने उसे डंडे से डराया। वह बड़ी मुश्किल से वहाँ से हटी। घोंसले में अंडे देख मैं नीचे उतर आया। मुझे समझ नहीं रहा था, क्या करूँ? घोंसले को तोड़ना एवं अंडों को बाहर फेंकना  मेरी आस्था के विरुध था। यदि इन्हें वहीं रहने दूँ तो विष्टा एवं टूटे पंखों की गंदगी की कल्पना मात्र से अभी मितलाई आने लगी थी। हाँ, घोंसले में अंडे नहीं होते तो मैं अपनी संवेदनशीलता से समझौता करते हुए सभी तिनके बाहर फ़ेंक देता।

     

    किंकर्तव्यविमूढ़ मैं कुछ  निर्णय लेता, इससे पहले मादा पक्षी पुनः वहाँ बैठी। इस बार वह यह सोचकर आई थी कि चाहे जो हो जाए उठूँगी नहीं। उसकी भाव-भंगिमाओं और मातृत्व के सम्मुख मैंने आत्मसमर्पण कर दिया।

     

    दो-तीन दिन बाद अंडों से चूजे निकल आए। अब स्थिति यह हो गई कि नीचे आसन पर बैठा मैं लेखन की कोशिश करता और ऊपर दोनों पक्षी बारी-बारी से चुग्गा लाने के  लिए उड़ान भरते। जब मादा जाती तो नर बच्चों को अपने पंखों की गरमाहट का अहसास देता और जब नर जाता तो मादा उनके पास रहती थी।

     

    यह सिलसिला दो-ढाई माह तक चलता रहा। इस दौरान नीचे बैठे हुए मेरा ध्यान साहित्य-सृजन में कम पक्षियों की चुहलबाजी देखने में ज्यादा बीतता था। हर रोज खगशावकों को बड़े होते देखना, माँ की चोंच से पहले चुग्गा पाने की होड़ में एक-दूसरे को धकेलते खगशावकों की प्रतिद्वंद्विता बरबस मेरा ध्यान बँटा देती। खग परिवार वहाँ रहने का इतना अभ्यस्त हो गया किउसे मनुष्य की उपस्थिति से अब कोई फर्क  नहीं पड़ता था। मेरी उपस्थिति में भी वह उतना हीनिर्भय रहता जितना अनुपस्थिति में।

     

    मैं चाहता था जल्दी से इनके  बच्चे बड़े हों और ये यहाँ से उड़ जाएँ। इसीलिए मैं उन्हें दाने डालता और पानी का बर्तन भी रखवा दिया। इसका परिणाम यह निकला कि मेरे वहाँ आते ही वे मुझसे दानों की अपेक्षा करने लगते। मुझे लगा वे मेरे भाव इशारे समझ रहे हैं। तदनुसार प्रतिक्रियास्वरूप उनका आहार-व्यवहार देख मुझे लगता वे प्रत्युत्तर में कुछ समझा भी रहे हैं।

     

    उन्हीं दिनों मैं बृहद् बाल उपन्यास लेखन की शुरुआत करने का मन बना चुका था। इस उपन्यास के नायक गुल्लू का चरित्र तो मेरे मस्तिष्क में काफ़ी समय से घूम रहा था लेकिन उसके मित्र के पात्र का निर्णय अभी नहीं कर पाया था। अब इन अर्ध-पालतू पक्षियों को देख सतरंगीपक्षी की कल्पना मन में आकार लेने लगी।

     

    जिस दिन उपन्यास का पहला खंड पूरा हुआ। उस दिन मादा पक्षी के  व्यवहार में मुझे कुछ परिवर्तन लगा। वह धीरे से उड़ी और मुँडेर पर जाकर बैठ गई। थोड़ी देर बाद उसका एक बच्चा भी उसी के पीछे उड़ान भरकर मुँडेर तक जा पहुँचा। उस खगशावक ने पहली बार बरामदे से बाहर की दुनिया देखी थी। आनंदित  होकर उसने पुनः पंख खोले और लंबी उड़ान भर सामने हवेली के छज्जे पर पहुँच गया। दूसरा बच्चा अभी घोंसले में ही था। वह पहले बच्चे की अपेक्षा थोड़ा कमजोर था। मादा पुनः आई, दूसरे बच्चे को कुछ समझाया। परिणामतः शाम होने से पहले वह भी उड़ान भर गया। मैं दफ्तर से लौटा। बेटे ने बताया, ”पक्षी घोंसला छोड़कर चले गए।वियोग की एक मद्धिम-सी लहर के बावजूद मैंने राहत की साँस ली। मेरी किताबों के बंडल उनकी बीट टूटे पंखों के गिरने से खराब हो गए थे। समय बीता। दीपावली आने वाली थी। मैंने निर्णय किया टाँड़ की सफ़ाई कर दूँ। एक सुबह ज्यों ही मैं उठा, फि़र वहाँ मादा पक्षी को बैठे देखा। संभव है अपने पुराने घर को देखने आई हो, यह सोच मैंने उस ओर अधिक ध्यान नहीं दिया था। मेरे मुँह से बस इतना ही निकला कि अब ये इस घर को अधिक दिन नहीं देख पाएँगे। मैंने घोंसले को नष्ट करने का निर्णय ले लिया था।

     

    अगले रविवार को झाड़ू लेकर जब मैं सीढ़ी पर चढ़ा तो देखकर हैरान था, वहाँ पुनः अंडे रखे थे तथा मादा पक्षी उन पर बैठी थी।

     

    मैंने माथा पीट लिया। मुझे क्रोधित होते देख मेरी पत्नी ने कहा, ”नहीं, घोंसला मत तोड़ना। आप पक्षी को सिर्फ  पक्षी की दृष्टि से नहीं, प्रसव के दौर से गुजर रही मादा की नजर से देखिए।“ सृजन मेरी सबसे बड़ी कमजोरी रही है। प्रकृति में हो रहे अंकुरण के  सम्मुख विध्वंश की बातमैं नहीं सोच सकता था। आदिकवि का स्वरमा निषाद---काम मोहितम् मेरे कानों में गूँजने लगा। मैं नीचे उतर आया। यह सोचकर कि दो-तीन माह तक फि़र पंखों की फ़ड़फ़ड़ाहट झेलनी पड़ेगी।

     

    धीरे-धीरे उपन्यास का दूसरा खंड भी पूरा हो गया। नए खगशावक उड़ना सीख उड़ गए। मैंने घोंसला नहीं तोड़ा। हाँ, बरामदे के द्वार पर चिक लगाकर उसे ढाँप दिया।

     

    उपन्यास के तीसरे खंड की शुरुआत हो चुकी थी परंतु लेखन की गति काफ़ी धाीमी हो गई। पहले जब मैं पक्षियों को देखता, अंतर्मन में नए विचार जागृत हो उठते। अब कथानक आगे नहीं बढ़ रहा था। मुझे पक्षियों की कमी खलने लगी। मन उदास हो उठा। कुछ ही दिन बीते कि यकायक एक दिन मैंने पक्षियों को पुकारा। चिक के अगल-बगल खाली स्थान से पक्षी अंदर घुस गए। मैंने देखा तो चिक को हटा दिया। अब परिंदे आसानी से -जा सकते थे। समय के साथ खग-युगल ने वहाँ एक जोड़ी बच्चे और पैदा किए। मैंने इस टाँड़ पर छह बच्चों को बड़े होते देखा था। इस दौर में एक के बाद एक इस बाल उपन्यास के छह खंड पूरे होते गए। मैंने मन से मान लिया था कि परिंदे वाले इस उपन्यास के पूर्ण होने तक घोंसले को अब नहीं हटाऊँगा।

     

    अब मैं उपन्यास के समापक खंड पर कार्य कर रहा था। उपन्यास लगभग पूरा होने वाला था। पक्षियों को जाने कैसे  इसका आभास हो गया। उस दिन वे उड़े तो फि़र कभी बरामदे की तरफ़ लौटकर नहीं आए।

     

    सोचता हुए शायद नीड़ नष्ट करने के कारण उस खग-परिवार की मेरे प्रति शुभकामनाएँ रहीं जो उपन्यास आकार ले पाया अन्यथा पहली बार ही घोंसला तोड़ देने पर संभव था कि उपन्यास में निराले सतरंगी पक्षी की कल्पना मस्तिष्क में पाती। तब सतरंगी जैसे अनूठे पात्र के बिना उपन्यास कैसा बनता, इस कृति के पाठक स्वयं अनुमान लगा सकते हैं। अस्तु! संपूर्ण उपन्यास पर अपनी प्रतिक्रिया देना मत भूलना।

  • Mahaan Deshbhakt Pt. Madan Mohan Malviya
    Rashtra Bandhu
    60

    Item Code: #KGP-1059

    Availability: In stock


  • Vanya Jeevon Ki Romanchak Kahaniyan
    Shivani Chaturvedi
    80

    Item Code: #KGP-1057

    Availability: In stock


  • Gulloo Aur Ek Satrangi (Part 5)
    Shrinivas Vats
    300 240

    Item Code: #GAES-5

    Availability: In stock

    वक़्त कैसे बीत जाता है, पता ही नहीं चलता।  पहले खंड से पड़ना शुरू कर आप पाँचवें खंड तक आ पहुँचे।
    कल स्वप्न में मुझे वह लड़की दिखाई दी जिसने वर्षों पहले मुझसे कहा था, ''अंकल ! हमारे लिए एक और ऐसा उपन्यास लिखें, जिसे पढ़ते जाएँ, पढ़ते जाएँ।'' इस बार उसके साथ सतरंगी भी था।  
    मैंने मन में सोचा, 'वह लड़की तो अब बड़ी हो चुकी होगी। संभव है, उसकी शादी भी हो गई हो। यह भी संभव है कि वह अपने स्कूल और इस अंकल को भूल चुकी हो।'
    फिर भी मैंने पूछ लिया, ''तुमने सतरंगी वाला उपन्यास पढ़ा क्या?''
    हँसते हुए बोली, ''अंकल ! सतरंगी ने मुझे पूरी कहानी सुना दी है। मैं तो पूरा उपन्यास पढ़ चुकी हूँ।''
    मैं हैरान था, ऐसा कैसे हो गया?
    मैंने देखा, वह सतरंगी संग वैसे ही घुल-मिल गई थी जैसे राधा और श्वेता।  
    बच्चों ! बचपन में घटित कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं, जिनकी समृतियाँ जीवनपर्यंत ताजा बनी रहती हैं।  आपकी तरह मुझे भी अपने बचपन की बहुत सी घटनाएं याद हैं।  
    सोचो, क्या कभी राधा और गुल्लू विष्णु संग बिताएं पल भूल पाएंगे ? कभी नहीं न ! 
    बचपन खरे सोने जैसा होता है।  इसकी मधुर समृतियाँ जितनी दोहराओगे, उतने खुश रहोगे।  
    मुझे कई पाठकों के फोन आए।  उन्होंने बताया कि वे जब किसी विशाल सुंदर पक्षी को देखते हैं, सतरंगी की पूरी कहानी उनके मस्तिष्क में घूमने लगती है।  
    मैंने कहा, ''चुलबुला सतरंगी है ही इतना प्यारा, जिससे एक बार मिल ले उसे अपना प्रशंसक बना लेता हैं।''
    Attachments area
  • Bachchon Ke Chhah Naatak
    Jaivardhan
    200 180

    Item Code: #KGP-1816

    Availability: In stock


  • Madhavi Kannagi
    Chitra Mudgal
    90 81

    Item Code: #KGP-975

    Availability: In stock

    लगभग दो हजार वर्ष पुराना तमिल महाकाव्य ‘शिलप्पधिकारम्’ को विषय बनाकर मैं तुम्हारे लिए एक उपन्यास लिखना चाह रही थी। अचानक एक दिन एन. सी. ई. आर. टी. से डाॅ. रामजन्म शर्मा का फोन आया। उनका आग्रह हुआ कि ‘पढ़ें और सीखें’ योजना के अंतर्गत मैं बाल-पाठकों के लिए ‘शिलप्पधिकारम्’ को आधार बनाकर एक बाल-उपन्या लिखूं। किन्हीं कारणों से डाॅ. रामजन्म शर्मा के दुबारा आग्रह पर मुझे दूसरी पुस्तक लिखनी पड़ी। 
    पिछले वर्ष संयोग से कंेद्रीय हिंदी निदेशालय के नव-लेखन प्रशिक्षण शिविर में दक्षिण जाना हुआ। वहां कुछ मित्रों ने उलाहना दिया कि तमिल साहित्य की समृद्धि के बारे में उत्तर भारत के बाल-पाठक कुछ नहीं जानते। बस, इस उलाहने ने मुझे बेचैन कर दिया। पुरानी इच्छा जाग उठी। पाण्डिचेरी से लौटकर मैंने ‘माधवी कन्नगी’ तुरंत लिखना शुरू कर दिया। उपन्यास पूरा हो गया।
    —चित्रा मुद्गल
  • Kucch Yaaden Bachpan Ki
    Ramdarash Mishra
    100 90

    Item Code: #KGP-9238

    Availability: In stock

    ये कहानियां बच्चों के लिए भी हैं और किशोरांे के लिए भी। अपनी जीवन-यात्रा में आए हुए कुछ मार्मिक प्रसंगों से मेंने ये कहानियां रची हैं। सभी के पात्र मनुष्य हैं। हां, दो कहानियां ऐसी हैं, जो शुद्ध काल्पनिक हैं और जिनके पात्र पशु हैं। मैंने चाहा है कि इन कहानियों से बच्चों का मनोरंजन तो हो ही, वे अपने वय की कुछ समस्याओं से रूबरू हों और उन्हें अच्छे जीवन-व्यवहार की सीख मिले।
    —रामदरश मिश्र
  • Bihar Ki Mahan Vibhootiya
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-bkmv

    Availability: In stock


  • Chiriya Aur Kauaa
    Manju C. Jomraj
    60

    Item Code: #KGP-1295

    Availability: In stock


  • Puraskrit Bacchon Ki Prerak Sahasi Kathayen
    Sanjiv Gupta
    200 180

    Item Code: #KGP-9352

    Availability: In stock

    मित्रो, ‘राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार’ प्राप्त बच्चों की कहानियों पर आधारित  शृंखला की सातवीं पुस्तक के साथ एक बार मैं फिर आपसे मुखातिब हूं। आपसे मिल रहे प्यार और प्रतिक्रिया  के बलबूते एक और किताब तैयार करने का उत्साह मिला। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह किताब भी आप सभी को पसंद आएगी। बाल पाठकों की रुचि को देखते हुए इस बार इसमें चित्रों को भी खास तवज्जो दी गई है।
    वैसे तो बहादुर बच्चों की कहानियां हमेशा ही रोमांचित और प्रेरित करती हैं, लेकिन आज जबकि समाज में संवेदना खत्म होती जा रही है तो ये और भी प्रासंगिक हो गई हैं। यह देखकर बहुत ही दुःख होता है कि किसी को विपत्ति में देखकर आज लोग पीड़ित की मदद करने की बजाय उसका वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने में लग जाते हैं। यह भविष्य वेफ लिए अच्छा संकेत नहीं है। हमें कभी भी यह नहीं भूलना चाहिए कि विपत्ति किसी  के भी साथ कहीं भी उत्पन्न हो सकती है। आज जो किसी और वेफ साथ घटित हो रहा है, कल को हमारे साथ भी हो सकता है।
    जरा सोचिए...अगर ‘राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार’ पाने वाले बच्चों ने भी इसी संवेदनहीनता का परिचय दिया होता तो क्या होता! इन बच्चों ने तो दूसरों की जान बचाने  के लिए अपनी और अपनों की भी परवाह नहीं की। उम्मीद करता हूं कि वर्ष 2016 वेफ लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  के हाथों पुरस्कृत इन बच्चों की कहानियां हमारे समाज में इस संवेदना को बनाए रखने में मददगार साबित होंगी और बच्चों व युवाओं को प्रोत्साहित करेंगी।
  • Vibhuti Chanakya
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #kgp-vc

    Availability: In stock


  • Bharat Ke Mahan Sant
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-bkms

    Availability: In stock


  • Shishu Seekhen Achchhi Baaten-2
    Dhram Pal Shastri
    50

    Item Code: #KGP-1106

    Availability: In stock


  • Kalpana Chawla
    A.W.I.C.
    40 36

    Item Code: #Kgp-kc

    Availability: In stock


  • Bharat Ke Aadarsh Baalak
    Chandrika Prasad Sharma
    50

    Item Code: #KGP-1128

    Availability: In stock


  • Sikhavan (Paperback)
    Jagdish Pandey
    40

    Item Code: #KGP-1445

    Availability: In stock

    प्रार्थना

    सुन लो भगवन विनय हमारी।
    हम सब आये शरण तुम्हारी।।

    सारे जग के रक्षक -पालक,
    हम हैं नाथ तुम्हारे बालक।
    तेरे दर के सभी भिखारी।।

    गुरु, पितु, मात, चरण अनुरागी, 
    बनें सभी ऐसे बड़भागी।
    आशीषों के हों अधिकारी।।

    विद्या पढ़ें विवेक बढ़ाएं,
    अपना जीवन श्रेष्ठ बनाएं।
    हरो ईश बाधाएं सारी।।

    शुभ कर्मों में ध्यान लगाएं,
    पर - सेवा कर नाम कमाएं।
    मातृ - भूमि के हों हितकारी।।

    हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
    रहें सदा बन भाई-भाई।
    शान तिरंगे की हो प्यारी।।
    -इस पुस्तक की ‘प्रार्थना’ कविता
  • Bharat Ke Rashtriya Prateek Bhaag-1
    A.W.I.C.
    90 81

    Item Code: #Kgp-bkrpb-1

    Availability: In stock


  • Lala Lajpat Rai
    Jagat Ram Arya
    70 63

    Item Code: #Kgp-llr

    Availability: In stock


  • Hamare Jeevan Moolya-1
    Dhram Pal Shastri
    50

    Item Code: #KGP-1145

    Availability: In stock


  • Panchtantra Ke Natak
    Shri Prasad
    125 113

    Item Code: #KGP-316

    Availability: In stock


  • Hamare Prayatan Sthal Aur Tauhor
    A.W.I.C.
    90 81

    Item Code: #Kgp-hpsat

    Availability: In stock


  • Lalachi Brahman
    Dharmpal Gupta
    50

    Item Code: #KGP-1188

    Availability: In stock


  • Hamare Jeevan Moolya-2
    Dhram Pal Shastri
    50

    Item Code: #KGP-1157

    Availability: In stock


  • Netaji Subhash Chandra Boas
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-nscb

    Availability: In stock


  • Hilne Lagi Dharti (Stories)
    Shrinivas Vats
    200 160

    Item Code: #KGP-1934

    Availability: In stock

    हिलने लगी धरती
    पंचदेश में शत्रु देश के जासूसों ने विद्रोह करवा दिया । भाट कवि ने राजा नरसिंह के दरबार तक पहुंच बना महामंत्री रुद्रदेव को शक्तिहीन कर दिया। कुछ दिन बाद राज्य में खबर फैल गई कि रुद्रदेव विद्रोहियों के हाथों मारे गए । पर हुआ उलटा । भाट कवि अपनी ही चाल में उलझ गया ।  रुन्द्रदेव तो जिंदा निकले । [गहरी वाला]
    बहेलिये को क्या पता कि जिस पक्षी को उसने पकडा है वह शापित मुनि-कुमार है । बेटे के पैर से परेशान बहेलिये ने देखा, चोंच में जडी-बूटी लिए अनेक पक्षी उसके घर की मुँडेर पर आ बैठे हैं । [बेटे का पैर]
    आलसी हरिया को मिल गए जादुई कुदाल और कुल्हाड़ा । उसने लोगों को डराना शुरू कर दिया । पर मिला क्या ? अपना कुदाल-कुल्हाड़ा ही गँवा बैठा । [मीठे बेर]
    देवपति को कम सुनता था। यह लड़की तुतलाकर बोलती थी। दोनों मिले तो शादी को राजी हो गए। फिर उनकी मुलाकात हुई एक मेंढक से । [मिठाई दो]
    जमींदार के खेत में हल जोतते बेलाराम को पेड़ पर हार मिला । जमींदार ने कहा-“मेरा खेत, मेरा पेड़, अत: हार भी मेरा ।" बेलाराम ने अपनी बात कही तो जमींदार ने अपने कान पकड़ लिए । बोला- "माफ कर दो बेलाराम ।" [घोसले में हार]
    शीतक के बहकावे में आकर माणिक की बेटी सुधा को सब मनहूस समझने लगे । कोई उससे शादी को तैयार न हुआ तो एक पेड़ से उसकी शादी कर दी गई । पर पेड़ पर ऐसा कौन बैठा था, जिससे सारे लोग सुधा के एहसानमंद हो गए ? [घर चलो]
    श्रीनिवास वत्स की ऐसी ही दर्जनों कहानियों को इस पुस्तक से संगृहीत किया गया है । बच्चे तो बच्चे बड़े भी इन्हें पूरा पढ़े  बिना नहीं रह सकेंगे । अनूठे अंदाज, अनूठे ताने-बाने से रची ये रचनाएँ मनोरंजन का खजाना हैं । पढ़कर देखिए तो सही ।
  • Dr. Rajendra Prasad
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-Drp

    Availability: In stock


  • Chuhiya Rajkumari Ka Svayamvar
    Vinod Sharma
    60 54

    Item Code: #KGP-931

    Availability: In stock


  • Sachitra Rashtriya Pratik Evam Gaurav Kosh
    GLOBAL VISION PRESS
    495 446

    Item Code: #KGP-2108

    Availability: In stock


  • Sardaar Vallabhbhai Patel
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-svbp

    Availability: In stock


  • Bharat Ke Rashtriya Prateek Bhag-2
    A.W.I.C.
    90 81

    Item Code: #kgp-bkrpb-2

    Availability: In stock


  • Amar Ho Gaya Magar
    Ramesh Bedi
    50

    Item Code: #KGP-1197

    Availability: In stock


  • Chhoo Mantar
    Pratap Sehgal
    100

    Item Code: #KGP-958

    Availability: In stock


  • Vibhuti : Samrat Ashok
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-vsa

    Availability: In stock


  • Gulloo Aur Ek Satrangi (Part 4)
    Shrinivas Vats
    300 240

    Item Code: #KGP-9369

    Availability: In stock

    पिछले तीन खंडों पर सुधी पाठकों, विद्वान् समीक्षकों ने ऐसी उत्साहवर्धक बातें कहीं, जिन्हें पढ़-सुनकर मेरा हौसला दुगना बढ़ गया। मैं सहृदयता से उनका आभार प्रकट करता हूँ।
    सतरंगी के सात रंग और उपन्यास के सात खंड। इन सातों खंडों में आपको प्रकाश के सात रंगों की तरह हर बार नया रंग दृष्टिगोचर होगा। जैसे प्रकाश में सात रंग होते हैं वैसे ही साहित्य में नौ रस होते हैं। आप बड़े होकर पढ़ना कि साहित्य के नौ रस कौन से हैं?
    संस्कृत, हिंदी, तमिल, बंगला, मलयालम आदि भाषाओं में रचा गया भारतीय साहित्य इन रसों से भरा हुआ है।
    विष्णु के जीवन में झंझावात तो आते रहे हैं, आगे भी आते रहेंगे। चुलबुला विष्णु उनसे कभी नहीं घबराया, बल्कि हर बार ‘सुपर हीरो’ बनकर उभरा है।
    अंतर्राष्ट्रीय हस्ती होते हुए भी विष्णु को कर्णपुर से बहुत लगाव है। आपकी ही तरह गुल्लू, राधा, विष्णु अपने गाँव, अपने देश को जी-जीन से प्यार करते हैं। सच भी है, भले ही हम चाहे जहाँ रहें अपने प्यारे भारतवर्ष को कभी न भूलें।
    उपन्यास के अगले खंडों में आपको विष्णु के दूसरे अद्भुत साथियों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। तब तक चैथा खंड पढ़ लीजिए। शीघ्र ही शेष खंड भी आपके हाथों में होंगे।

  • Samudra Ke Bhoot
    Dr. Jagdish Chandrikesh
    60

    Item Code: #KGP-1039

    Availability: In stock


  • Nai-Naveli Paheliyan
    Kulbhushan Lal Makhija
    80 72

    Item Code: #KGP-952

    Availability: In stock


  • Indradhanush
    Vinod Sharma
    120 108

    Item Code: #KGP-992

    Availability: In stock

    सभ्यता के आदिकाल से ही बच्चे नानी या दादी से कहानियां सुनते आए हैं। छापेखाने के आविष्कार के बाद कहानियां पढ़ी जाने लगीं। इससे पहले कहानियां सिर्फ सुनी जाती थीं। टेलीविजन और सिनेता के जन्म के बाद तो वे देखी भी जाने लगीं। कहानी सुनने में अधिक मजा आता है या पढ़ने में या फिी देखने में; इसका फैसला तो आप स्वयं ही कीजिए। लेकिन एक बात तो निश्चित है कि कहानी पढ़ना सबसे अधिक सुविधाजनक है। दरअसल कहानी सुनने के लिए आपको दादी या नानी पर निर्भर रहना पड़ता है और देखने के लिए टी.वी. सेट पर। आप कहोगे कि यों तो पढ़ने के लिए भी पुस्तक पर निर्भर रहना पड़ता है। आपकी बात में दम तो है मगर, अगर दादी या नानी का स्वास्थ्य या मूड ठीक नहीं है तो आप तो गए काम से। और फिर उन्हें कितनी कहानियां याद रह सकती हैं? इसकी भी एक सीमा है और टी.वी. सेट तो टी.वी. सेट ठहरा। रुकावट के लिए खेद प्रकट कर देगा तो आप क्या कर लेंगे? और अगर बिजली गुल हो जाए तो? यही नहीं, अगर पिताजी खबरें सुन रहे हैं तो क्या होगा? और अगर आप किसी ऐसे गांव या हिल स्टेशन या गेस्ट हाउस में हों जहां टी.वी. में सभी या किसी एक चैनल के प्रोग्राम नहीं देखे जा सकते तो हो गया बंटाधार। और फिर टी.वी. के कार्यक्रमों की भी एक सीमा तो है ही। यों भी आजकल दूरदर्शन अधिसंख्य प्रोग्राम अमरीका, इंगलैंड या जर्मनी के ही दिखता है। मगर कहानियां तो हर देश में सुनी, पढ़ी या देखी जाती हैं।
    स्पष्ट है कि कहानी पढ़ना अधिक सुविधाजनक है। और फिर पुस्तकों में संचित ज्ञान की कोई सीमा भी नहीं है।
    —विनोद शर्मा
  • Ek Mulakaat Bahadur Bachchon Ke Saath
    Sanjiv Gupta
    200 160

    Item Code: #Kgp-embbks

    Availability: In stock


  • Bharat Ki Prasidh Nadiya
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-bkpn

    Availability: In stock


  • Kuchh Yaaden Bachpan Ki
    Ramdarash Mishra
    100 80

    Item Code: #Kgp-kybk

    Availability: In stock


  • Gulloo Aur Ek Satrangi : 4 (paperback)
    Shrinivas Vats
    140 112

    Item Code: #GAES-4

    Availability: In stock

    पिछले तीन खंडों पर सुधी पाठकों, विद्वान् समीक्षकों ने ऐसी उत्साहवर्धक बातें कहीं, जिन्हें पढ़-सुनकर मेरा हौसला दुगना बढ़ गया। मैं सहृदयता से उनका आभार प्रकट करता हूँ।
    सतरंगी के सात रंग और उपन्यास के सात खंड। इन सातों खंडों में आपको प्रकाश के सात रंगों की तरह हर बार नया रंग दृष्टिगोचर होगा। जैसे प्रकाश में सात रंग होते हैं वैसे ही साहित्य में नौ रस होते हैं। आप बड़े होकर पढ़ना कि साहित्य के नौ रस कौन से हैं?
    संस्कृत, हिंदी, तमिल, बंगला, मलयालम आदि भाषाओं में रचा गया भारतीय साहित्य इन रसों से भरा हुआ है।
    विष्णु के जीवन में झंझावात तो आते रहे हैं, आगे भी आते रहेंगे। चुलबुला विष्णु उनसे कभी नहीं घबराया, बल्कि हर बार ‘सुपर हीरो’ बनकर उभरा है।
    अंतर्राष्ट्रीय हस्ती होते हुए भी विष्णु को कर्णपुर से बहुत लगाव है। आपकी ही तरह गुल्लू, राधा, विष्णु अपने गाँव, अपने देश को जी-जीन से प्यार करते हैं। सच भी है, भले ही हम चाहे जहाँ रहें अपने प्यारे भारतवर्ष को कभी न भूलें।
    उपन्यास के अगले खंडों में आपको विष्णु के दूसरे अद्भुत साथियों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। तब तक चैथा खंड पढ़ लीजिए। शीघ्र ही शेष खंड भी आपके हाथों में होंगे।

  • Babu JagJeevan Ram
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-bjjr

    Availability: In stock


  • Gulloo Aur Ek Satrangi (Part 6)
    Shrinivas Vats
    300 240

    Item Code: #GAES-6

    Availability: In stock

    अपनी बात
    प्रिय बाल पाठको!
    हर किसी के जीवन में सुख-दुःख के दौर आते रहते हैं। सतरंगी के जीवन में भी आए। पर आपने अनुभव किया होगा, प्यारा सतरंगी दुखों में कभी विचलित नहीं हुआ। उसने अपने आत्मविश्वास को भी कमजोर नहीं होने दिया। सच कहूँ, यही आत्मबल हमारी पूँजी होती है।
    याद रखो, किसी संकट में इतनी ताकत नहीं होती कि वह हमें पूर्णतः नष्ट कर सके। बशर्ते कि हमारे मन में उम्मीदों का दीपक टिमटिमाता रहे। यह कभी बुझने न पाए।
    आपने यह भी महसूस किया होगा कि असहायों की सहायता के लिए विष्णु हमेशा तत्पर रहा है। चाहे छह पैरों वाली लोमड़ी हो या दो सिर वाला खरगोश, विष्णु ने सबकी सहायता की है। सकारात्मक सोच के साथ वह हमेशा आगे बढ़ता रहा। तभी तो सतरंगी को सभी जी-जान से चाहते हैं।
    सच कहा है सपने देख तो कोई भी सकता है लेकिन सपने पूरे उसी के होते हैं जिस के इरादे नेक और नीयत साफ हो।
    विष्णु फिर लौट आया है। आपको कैसा लग रहा है? जरूर बताना।
  • Bharat Ke Mahan Swatantrata Senani
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-bkmss

    Availability: In stock


  • Bharat Ke Do Anmol Rattan
    Ruchi Sharma
    70 63

    Item Code: #kgp-bkdar

    Availability: In stock


  • Roopa Aur Ek Pari
    Varsha Das
    60

    Item Code: #KGP-1234

    Availability: In stock


  • Laxmibai
    Jagat Ram Arya
    70 63

    Item Code: #Kgp-Lb

    Availability: In stock


  • Naachane Vaalee Aankhen
    Vibha Devsare
    100 90

    Item Code: #KGP-981

    Availability: In stock

    तीन-चार घंटे की बस यात्रा के बाद गीता और रमेश संतू काका के गांव रायगढ़ पहुंच गए। चारों ओर हरे लहराते खेत, बड़े-बड़े छायादार पेड़ों की छांव और अमराइयों के बीच से गुजरते हुए गीता और रमेश को बहुत अच्छा लग रहा था। खपरैल और मिट्टी के बने छोटे घर, कुएं और तालाब। गांव का ऐसा दृश्य उन्होंने सिर्फ किताबों में पढ़ा था, या फिर सिनेमा में देखा था। लेकिन जब गीता और रमेश साक्षात् गांव के उस मनोहारी दृश्य से गुजर रहे थे तो उन्हें बहुत आनंद आ रहा था। संतू काका के घर पहुंचकर तो उन्हें बहुत मजा आया। संतू काका भी गीता और रमेश को आया देखकर बहुत प्रसन्न हुए। काकी और संतू काका ने गीता और रमेश की बहुत आवभगत की। संतू काका बोले, ‘‘देखो बच्चों, हमारा छोटा सा गांव है। शहर जैसी सुख-सुविधा तो यहां मिलेगी नहीं, लेकिन हम कोशिश यही करेंगे कि तुम लोग यहां खूब खुश रहो।’’
    —इस पुस्तक ‘किस्सा हबूचंद की सफाई का’ कहानी से

  • Gulloo Aur Ek Satrangi (Part 2)
    Shrinivas Vats
    300 240

    Item Code: #GAES-2

    Availability: In stock

    प्रिय बाल पाठको!

    गुल्लू और एक सतरंगीका पहला खंड आपने पढ़ा। पाठकों की जो प्रतिक्रियाएँ मिलीं वे अपेक्षा के अनुकूल रहीं।

    चूँकि यह हिंदी का प्रथम बृहत् बाल उपन्यास हैअतः शोधार्थियों ने बड़े चाव से इसे शोध के लिए चुना।

     एम०फिल्० अथवा पी एच०डी० के इच्छुक अनेक छात्रों ने इस संबंध में चर्चा हेतु मुझसे संपर्क किया।

    मैं छात्रों तथा उनके गाइड प्रोफेसरों को एतदर्थ धन्यवाद देना चाहूँगा।

    नन्हे पाठक जो अभी बाल्यावस्था/किशोरावस्था के दौर से गुजर रहे हैं वे तो बड़े होकर ही शोधएम०फिल०पी-एच०डी० जैसी शब्दावली का अर्थ समझ पाएँगे। उन्हें मेरी सलाह है अभी बचपन का आनंद उठाएँ और उपन्यास का दूसरा खंड पढ़ें।

    हाँजब वे शोध करने की अवस्था में पहुँचेंगेसंभव है तब तक इस उपन्यास के अधिकांश खंड प्रकाशित हो चुके होंगे। तब ये नए शोधार्थी समग्र उपन्यास पर शोध कर सकेंगे।

    आपकी जिज्ञासा के लिए यहाँ यह भी इंगित करना चाहूंगा कि तीसरे खंड में सतरंगी और गुल्लू दोनों के जीवन में एक नया मोड़ आने वाला है। लेकिन उसे जानने के लिए अभी तीसरे खंड की प्रतीक्षा करनी होगी। तब तक दूसरे खंड का आनंद लीजिए और बताइए आपको सतरंगी और गुल्लू की मित्रता कैसी लग रही है?

    शेष शुभम्!

     

    आपका मित्र

    श्रीनिवास वत्स    

  • Tinku Chala Nana Ke Ghar
    Anju Sandal
    60

    Item Code: #KGP-927

    Availability: In stock


  • Aadi Jagadguru Shankaracharya
    Chandrika Prasad Sharma
    125 113

    Item Code: #KGP-9009

    Availability: In stock


  • Vaigyanikon Ki Batein (Paperback)
    Shuk Deo Prasad
    50

    Item Code: #KGP-7085

    Availability: In stock

    सामान्य जन-मानस में वैज्ञानिकों के प्रति एक आम धारणा यह है की उसका जीवन एकदम नीरस एकांतिक और अलग-थलग किस्म का होता है । पर पुस्तक के ये प्रसंग इस तस्वीर का दूसरा पहलू पेश करते हैं । वास्तव में वैज्ञानिकों का जीवन भी सामाजिकता और हास - परिहास से एकदम परिपूर्ण होता है और अवसाद-विषाद भरा भी, हमारी-आपकी ही तरह। उनके भी सामाजिक सरोकार और उत्तरदायित्व  होते हैं । उन्हीं के साथ वे भी जीते और मरते हैं । पुस्तक में समाहित प्रसंग वैज्ञानिकों के बारे में व्याप्त भ्रांत धारणाओं को निर्मूल करते हैं । उनकी भी जिंदगी रोमांच से लबरेज है और हर्ष-विषाद से सराबोर भी, ठीक हमारी ही तरह। 
  • Jangli-Mangli
    Chang Tain-Pi
    180 162

    Item Code: #KGP-409

    Availability: In stock

    1963 में मैंने चांग तइन-यी के बाल-उपन्यास ‘करामाती कद्दू’ का रूपांतर किया था, जो धारावाहिक रूप से ‘साप्ताहिक हिंदुस्तान’ में प्रकाशित हुआ।
    चांग तइन-यी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह बहुत ही सरल और रोचक ढंग से कहानी कहते हैं, जो मनोरंजक होने के साथ उपदेशपरक ही नहीं, कलात्मक ढंग से अच्छा रास्ता दिखाती है।
    ‘करामाती कद्दू’ की लोकप्रियता देखकर ही मैंने 1967 में लेखक की एक और रचना ‘जंगली-मंगली’ शीर्षक से रूपांतकर किया है। पाठकों की सुविधा के लिए मैंने कहानी के पात्रों और वातावरण को भारतीय रूप देना उचित समझा।
    चांग तइन-यी का जन्म 1906 में हुआ था। पच्चीस वर्ष की अवस्था में उन्होंने यह कहानी लिखी थी। निर्धनता के कारण उन्हें बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। यहां तक कि पढ़ाई भी छोड़नी पड़ी। निर्वाह के लिए उन्होंने तरह-तरह की नौकरियां कीं। कभी-कभी दफ्तर में क्लर्की तो कभी अध्यापन। संघर्ष करते हुए भी उन्होंने लिखना सारी रखा और कई पुस्तकों की रचना की। चांग तइन-यी की बालोपयोगी और किशोरापेयोगी रचनाएं विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।
    —द्रोणवीर कोहली
  • Naya Gyan Ki Anokhi Baatein
    Vishv Nath Gupta
    250 200

    Item Code: #KGP-9237

    Availability: In stock

    ज्ञान की कोई सीमा नहीं है। किसी ने कहा भी है कि ‘जिन खोजा तिन पाइयां, गहरे पानी पैठ’। यह सच है कि जो जितना गहराई में जाएगा, उसे उतना ही ज्यादा मिलेगा।
    इस पुस्तक में जो बातें बतलाई गई हैं उनके बारे में हमारे बाल और किशोर पाठक कुछ-कुछ जानते भी होंगे, लेकिन बाल और किशोर मन में बहुत जिज्ञासा भरी रहती है, वह बहुत कुछ जानने और समझने को उत्सुक व इच्छुक रहता है। इस पुस्तक में जिन विषयों के बारे में लिखा गया है, उनके बारे में उन्हें कुछ नई बातें मालूम होंगी। इससे उनकी जिज्ञासा बढ़ेगी और उनमें और ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा जागृत होगी। वे और पढ़ेंगे तथा और ज्ञान प्राप्त करने की कोशिश करेंगे। यही इस पुस्तक का उद्देश्य है।
    -विश्वनाथ गुप्त
  • Bharat Ke Mahan Neta
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-bkkmn

    Availability: In stock


  • Bharat Ki Mahan Vibhootiyan : 2
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-bkmv-2

    Availability: In stock


  • Vaigyonikon Ki Batein
    Shuk Deo Prasad
    100 80

    Item Code: #Kgp-vkb

    Availability: In stock


  • Lokmaanya Baal Ganngadhar Tilak
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #kgp-lbgt

    Availability: In stock


  • Sardaar Bhagat Singh
    Jagat Ram Arya
    70 63

    Item Code: #Kgp-Sbs

    Availability: In stock


  • Shishu Seekhen Achchhi Baaten-1
    Dhram Pal Shastri
    50

    Item Code: #KGP-1116

    Availability: In stock


  • Ek Thi Chiriya
    Mastram Kapoor
    60

    Item Code: #KGP-917

    Availability: In stock


  • Ramdhari Singh Dinkar
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-rdsd

    Availability: In stock


  • Chunmun Aur Gopa
    Tanu Malkotia
    40

    Item Code: #KGP-1239

    Availability: In stock


  • Chandra Shekhar Aazaad
    Jagat Ram Arya
    70 63

    Item Code: #Kgp-csa

    Availability: In stock


  • Bharat Ke Pramukh Nobel Puruskar Vijeta
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #kgp-bkpnpv

    Availability: In stock


  • Jai Prakash Narayan
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-jpn

    Availability: In stock


  • Dr. A.P.J. Abdul Kalam
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-apjak

    Availability: In stock


  • Kushti
    Sudhir Sen
    25

    Item Code: #KGP-7182

    Availability: In stock


  • Chhatrapati Shivaji
    A.W.I.C.
    40 36

    Item Code: #Kgp-Cps

    Availability: In stock


  • Bharat Ke Rashtriya Prateek Bhag-3
    A.W.I.C.
    90 81

    Item Code: #Kgp-bkrpb-3

    Availability: In stock


  • Hamare Aadarsh Mahapurush
    Nirankar Dev Sewak
    40

    Item Code: #KGP-948

    Availability: In stock


  • Sau Baal Kavitayen
    Atri Garg
    75

    Item Code: #KGP-1450

    Availability: In stock


  • Geeton Ki Aankhmicholi
    Sher Jung Garg
    30

    Item Code: #KGP-1167

    Availability: In stock


  • Bharat Ke Mahan Khiladi
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-bkmhk

    Availability: In stock


  • Bharat Ke Kavi
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-bkk

    Availability: In stock


  • Hamare Kartavya
    Chandra Pal Singh 'Mayank'
    40

    Item Code: #KGP-1320

    Availability: In stock


  • Dr. Sarvapalli Radhakrishanan
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-dsrk

    Availability: In stock


  • Sarak Durghatnon Se Kaise Bachen
    E.W. Saxbi
    40

    Item Code: #KGP-920

    Availability: In stock


  • Devtaon Ki Ghaati
    Dronvir Kohli
    60 54

    Item Code: #KGP-1919

    Availability: In stock

    परीक्षा की घड़ी
    कोई-कोई यही बडी मनहूस होती है । ऐसी ही एक घडी आई थी हिमाचल की 'देवताओं की घाटी' में, जब वहीं के सीधे-सादे, भाले-भाले, निरीह प्राणियों पर, सचमुच, मुसीबत के पहाड़ टूटे थे।
    यह डरावनी वेला भुलाए नहीं भूलेगी इस घाटी के लोगों को । और दुनिया भी याद करेगी कि इन असहाय लोगों ने कितने धीरज से इतनी बड़ी विपदा का सामना किया ।
    बड़े जीवट के लोग है 'देवताओं की घाटी' के निवासी ।
    'देवताओं की घाटी' और उस घाटी में आई उस भयंकर विपति से जूझने का यह अद्भुत सच्चा वृत्तांत मैंने  बालय-बालिकाओं के लिए विशेष रूप से लिखा है ।
    -द्रोणवीर कोहली

  • Naitik Abhinay Gaan
    Dhram Pal Shastri
    50

    Item Code: #KGP-1192

    Availability: In stock


  • Vaigyanikon Ki Batein
    Shuk Deo Prasad
    100

    Item Code: #KGP-921

    Availability: In stock

    सामान्य जन-मानस में वैज्ञानिकों के प्रति एक आम धारणा यह है की उसका जीवन एकदम नीरस एकांतिक और अलग-थलग किस्म का होता है । पर पुस्तक के ये प्रसंग इस तस्वीर का दूसरा पहलू पेश करते हैं । वास्तव में वैज्ञानिकों का जीवन भी सामाजिकता और हास - परिहास से एकदम परिपूर्ण होता है और अवसाद-विषाद भरा भी, हमारी-आपकी ही तरह। उनके भी सामाजिक सरोकार और उत्तरदायित्व  होते हैं । उन्हीं के साथ वे भी जीते और मरते हैं । पुस्तक में समाहित प्रसंग वैज्ञानिकों के बारे में व्याप्त भ्रांत धारणाओं को निर्मूल करते हैं । उनकी भी जिंदगी रोमांच से लबरेज है और हर्ष-विषाद से सराबोर भी, ठीक हमारी ही तरह। 
  • Bharat Ke Vishva Prasidha Smarak
    A.W.I.C.
    90 81

    Item Code: #Kgp-bkvps

    Availability: In stock


  • Aatmvishvas Aur Mitrata Kee Jeet
    A.W.I.C.
    30 27

    Item Code: #kgp-aamkj

    Availability: In stock


  • Gaao Geet Bajaao Taali
    Sher Jung Garg
    50

    Item Code: #KGP-7136

    Availability: In stock


  • Naani Ki Khichadi
    Manju Kapoor
    60

    Item Code: #KGP-936

    Availability: In stock


  • Bharat Ki Vishva Prasiddh Mahilaye
    A.W.I.C.
    70 63

    Item Code: #Kgp-bkvpm

    Availability: In stock


  • Aaviskaron Ki Kahaniyan
    Maitreyi Pushpa
    60

    Item Code: #KGP-979

    Availability: In stock


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