Swatantarata Sangharsh Ka Itihaas

Hazari Prasad Dwivedi

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-7016-006-9

स्व. आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने अनेक गं्रथों द्वारा हिंदी साहित्य की अभूतपूर्व सेवा की है। उन्होंने जहां एक तरफ अत्यंत श्रेष्ठ उपन्यासों की रचना की वहीं दूसरी तरफ शोधपरक ग्रंथों की। निबंध-लेखन के क्षेत्रा में भी उन्होंने ललित निबंधों के सृजन द्वारा हिंदी को अत्यंत सुंदर निबंध दिए। प्रस्तुत पुस्तक स्व. आचार्य द्विवेदी के चिंतन को समझने में एक महत्वपूर्ण दिशा प्रदान करती है। सैकड़ों साल की गुलामी से सन् 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ था। भारत के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना थी। जागरूक एवं संवेदनशील साहित्यकार इस घटना की उपेक्षा नहीं कर सकता था। स्व. आचार्य जी ने स्वतंत्रता-संघर्ष के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को इस पुस्तक में प्रस्तुत किया है। इसमें नामांे की भरमार नहीं है। यह उनकी अपनी दृष्टि थी। इस पुस्तक का रचनाकाल सन् 1948 के बरी है। इसमें हमने किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया है। नई पीढ़ी को हमारी यह एक विनम्र भेंट है।
—मुकुंद द्विवेदी

Hazari Prasad Dwivedi

हजारीप्रसाद द्विवेदी  
जन्म : श्रावण शुक्ल एकादशी संवत् 1964-19 अगस्त 1907 ई. ।  जन्मस्थान : आरत दुबे का छपरा, ओझवलिया, बलिया, उ. प्र. । 8 नवंबर, 1930 को हिंदी शिक्षक के रूप में शांतिनिकेतन में कार्यारंभ 1950 ई. में काशी हिंदू विश्व विद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर एवं अध्यक्ष नियुक्त।  1957 ई. में राष्ट्रपति हारा 'पद्मभूषण' स्वे सम्मानित काशी नागरी प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष 1952-53। 1955 ई. में प्रथम राजभाषा आयोग के राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य । हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित एवं सर्वमान्य हस्ताक्षर । हिंदी साहित्य के गतिशील विकास परंपरा में समीक्षा, इतिहास, निबंध, उपन्यास, कविता के सृजन द्वारा नई दिशा दी। इनका रचना संसार बहुत विशाल है। लोक-विमुख धर्म, दर्शन, कला-संस्कृति, इतिहास साहित्य उनके लिए महत्वहीन हैं। मृत्यु के बाद भी अनेक अप्रकाशित एवं आकलित रचनाएं प्रकाशित ।

स्मृति शेष : 19 मई 1979 ई. को दिल्ली में देहावसान ।

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