Parvat-Gatha

Hari Krishna Devsare

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  • Year: 2009

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 9788188121991

पर्वत गाथा
पर्वतों और मनुष्य का रिश्ता आदिकाल से चला आ रहा है। पर्वतों पर उगने वाले वन, उनसे प्राप्त होने वाले खनिज, वनोपज आदि मनुष्य के उपयोग की वस्तुएँ रही हैं। आज भी आदिवासी और गाँवों के लोग वनोपजों से अपनी जीविका अर्जित करते हैं। पर्वतों के जंगलों से लकड़ी मिलती है। पर्वतों से देश की जलवायु अत्यधिक प्रभावित होती है। यदि भारत के उत्तर में हिमालय न होता तो मानसूनी हवाएँ सीधे मध्य तथा उत्तरी एशिया में पहुँचकर पानी बरसातीं और भारत एक रेगिस्तान बन जाता। हिमालय पर्वत सर्दियों में उत्तरी एशिया से आने वाली बेहद ठंडी हवाओं से भी भारत की रक्षा करता है।
पर्वत मनुष्य के जीवन में विभिन्न रूपों में जुड़े रहे हैं और उनका महत्त्व आज भी है। ‘महानता’ के अर्थ में ‘पर्वत’ के अलावा कोई दूसरी उपमा नहीं दी जाती। आज मनुष्य ने पर्वतों को काटकर रास्ते बनाने में सफलता पा ली है।
जीवन में सफलता की ऊँचाइयों की तुलना पर्वत शिखरों से की गई है। हमारे देश में अनेक गौरवशाली पर्वत हैं और उनके प्रति लोगों में अटूट आस्था है। उन पर्वतों पर लोग पूजा करते हैं, मेले लगते हैं और मन की मुराद पूरी करते हैं। भारत के ऐसे ही पूज्य, गौरवशाली, इतिहास- प्रसिद्ध और धार्मिक आस्था के प्रतीक पर्वतों की गाथा है यह पुस्तक।

Hari Krishna Devsare

डॉ.  हरिकृष्ण देवसरे हिंदी के सुपरिचित लेखक हैं। हिंदी बाल-साहित्य पर हिंदी में प्रथम शोध प्रबंध प्रस्तुत कर बाल-साहित्य पर शोध की परंपरा का सूत्रपात करने में डॉ. देवसरे का बाल-साहित्य समीक्षा के क्षेत्र में प्रशंस्य योगदान है। मौलिक लेखक के रूप में डॉ.  देवसरे की बाल-साहित्य संबंधी तीन सौ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने विविध विधाओं में भी पर्याप्त साहित्य लिखा है। ‘खाली हाथ’ (उपन्यास), ‘अगर ठान लीजिए’ (चरित्र-विकास) आदि उनकी कुछ उल्लेखनीय पुस्तकें हैं। उसी क्रम में उनकी ये पुस्तकें हैं--‘अथ नदी कथा’ और ‘पर्वतगाथा’। शोधपरक लेखन डॉ. देवसरे की विशेषता है। मीडिया के लिए भी डॉ. देवसरे की सेवाएँ उल्लेखनीय हैं। लगभग चैबीस वर्ष तक आकाशवाणी में विभिन्न पदों पर कार्य करने के अतिरिक्त आपने दूरदर्शन के लिए दस से अधिक धारावाहिकों, बीस वृत्तचित्रों एवं दस टेलीफिल्मों का लेखन, निर्देशन एवं निर्माण भी किया।
डॉ.  देवसरे कई संस्थाओं से सम्मानित और पुरस्कृत हुए हैं। आपको ‘बच्चों में विज्ञान लोकप्रियकरण’ के लिए राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एक लाख रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने ‘बाल-साहित्य भारती’ पुरस्कार से सम्मानित किया और हिंदी अकादमी, दिल्ली ने ‘साहित्यकार सम्मान’ दिया। आपको पद्मा बिनानी फाउंडेशन की बाल- साहित्य के उन्नयन को समर्पित संस्था ‘वात्सल्य’ द्वारा एक लाख रुपये के ‘प्रथम वात्सल्य पुरस्कार’ द्वारा सम्मानित किया गया। 

स्मृति शेष : 14 नवंबर, 2013

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