Himalaya Gaatha-1 (Dev Parampara)

Sudarshan Vashishath

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  • Year: 2017

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Suhani Books

  • ISBN No: 9788190423205

हिमालय गाथा-1 (देव परंपरा)
महापंडित राहुल सांकृत्यायन के बाद संस्कृति पर लेखन और यात्रा-वृत्तांत जैसे साहित्य की धीरे-धीरे कमी होती गई । बहुत ही कम ऐसे साहित्यकार रहे, जिन्होंने आसपास की संस्कृति पर कलम चलाई । ऐसे बिरले साहित्यकारों में सुदर्शन वशिष्ठ एक ऐसा नाम है, जिसने सशक्त कथाकार और कवि होने के साथ-साथ संस्कृति-लेखन में भी बराबर पैठ बनाए रखी। आठवें दशक के आरंभ से लेकर इनके सांस्कृतिक लेख सामने आते रहे । 'धर्मयुग', 'साप्ताहिक हिंदुस्तान', 'कादम्बिनी', 'संस्कृति', 'योजना' जैसी पत्रिकाओं तथा सभी समाचार-पत्रों के सांस्कृतिक पृष्ठों में ये बराबर लिखते रहे। कुल्लू के मलाणा गणतंत्र को यही सबसे पहले सामने लाए । 'धर्मयुग' के फागुन अंक में 'फागुन में मलाणा' लेख छपा ।
‘आँखिन देखी' और उसका कथात्मक शैली में वर्णन वशिष्ठ के संस्कृति-लेखन की विशिष्टता रही है । पढ़ते हुए ऐसा लगता है, आप यह उत्सव स्वयं देख रहे हैं । सरल और स्पष्ट भाषा से रोचकता के साथ संस्कृति के गंभीर पहलुओं का विश्लेषण, उनकी वैज्ञानिक व्याख्या, पुरातन को आधुनिकता के साथ जोड़ना इनकी लेखनी की विशेषता रही है ।  संस्कृति का कोई ऐसा पहलू अछूता नहीं रहा है, जिस पर वशिष्ठ ने लेखनी न चलाई हो। इतिहास और परंपरा, धर्म और संस्कृति, मंदिर और पुरातत्त्व, मेले और उत्सव, लोक-परंपरा और लोक-वार्ता कोई पक्ष ऐसा नहीं है, जो अछूता रहा हो । लेखक की यायावर प्रवृत्ति ने हिमाचल के दूरस्थ क्षेत्रों की यात्राएँ की ।
यदि इनके अभी तक प्रकाशित हजारों लेखों और दर्जनों पुस्तकों को देखा जाए तो इन्हें दूसरा राहुल कहा जा सकता है । राहुल जी ने बहुत जगह पूरे के पूरे गजेटियर उतार डाले । वशिष्ठ ने ऐसा नहीं किया । इन्होंने संस्कृति को बहुत करीब से देखा । जो देखा, वह लिखा । संस्कृति को निष्पक्ष नजरिए से देखा, परखा, समझा है और फिर लेखनीबद्ध किया है । आशा है, यह संस्कृति श्रृंखला पाठकों, शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगी ।

Sudarshan Vashishath

सुदर्शन वशिष्ठ
जन्म  : 24 सितंबर, 1949, पालमपुर (हि०प्र०) के एक गाँव में
प्रकाशान : 'अंतरालों में घटता समय’, 'सेमल के फूल', 'पिंजरा', 'हरे-हरे   पतों का घर', 'संता  पुराण', 'कतरनें' (कहानी-संग्रह); चुनिंदा कहानियों के तीन संग्रह प्रकाशित; 'आतंक', 'सुबह की नींद’ (उपन्यास) 'युग परिवर्तन, 'अनकहा' (काव्य-संकलन); 'अर्द्धरात्रि का सूर्य’ , 'नदी और रेत’ (नाटक); 'व्यास की धारा', 'कैलास पर चाँदनी', 'पर्वत से पर्वत तक', 'रंग बदलते पर्वत', 'पर्वत मंथन', 'हिमाचल', 'हिमाचल की लोककथाएँ', 'ब्राह्यणत्व : एक उपाधि', 'पुराण गाथा', 'देव संस्कृति' (संस्कृति शोध तथा यात्रा) 'हिमाचल संदर्भ कोष' (आठ खंडों में शीघ्र प्रकाशित)
दो काव्य-संकलन, चार कहानी-संग्रहों का संपादन । तीन पत्रिकाओं  तथा चार दर्जन से ऊपर सरकारी पुस्तकों का संपादन देश की वर्तमान तथा विगत शीर्षस्थ पत्र-पत्रिकाओँ में रचनाएँ प्रकाशित
जम्मू अकादमी, हिमाचल अकादमी, साहित्य कला परिषद दिल्ली सहित कई स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा साहित्य-सेवा के लिए सम्मानित

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