Mahamana Pandit Madan Mohan Malviya

Chandrika Prasad Sharma

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 978-81-88121-58-8

महामना पं. मदनमोहन मालवीय एक प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक थे। वे राष्ट्रवाद को सर्वोच्च स्थान देते थे। हिंदू धर्म का गहन अध्ययन करने वाले पं. मालवीय देश की जनता को राष्ट्रवाद का परम हितैषी एवं शुभेच्छु मानते थे।
वे संस्कृत और हिंदी के प्रकांड पंडित थे। उनका ज्ञान अपरिमित था। वे हिंदू संस्कारों के परम विद्वान् थे। उनको वाणी का अद्भुत वरदान प्राप्त था। उनकी भाषणकला पर सभी मुग्ध हो जाते थे।
पूज्य मालवीय जी को वेदों, शास्त्रों तथा अन्य महान् ग्रंथों का ज्ञान था। वे हिंदू समाज को संसार में नामवर बनाना चाहते थे। काशी हिंदू समाज को संसार में नामवर बनाना चाहते थे। काशी हिंदू विश्वविद्यालय का निर्माण कराके उन्होंने एशिया में सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय की स्थापना की। देश की स्वतंत्रता के लिए वे गांव-गांव घूमे थे। चैरी-चैरा के मुकदमे पर विजय पाकर उन्होंने ब्रिटिश शासन का मुंह काला कर दिया था। वे इतने लोकप्रिय थे कि जनता उन्हें बहुत अधिक मान-सम्मान देती थी।
—चन्द्रिकाप्रसाद शर्मा

Chandrika Prasad Sharma

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