Pustak Sameeksha Ka Paridrishya

Vishwanath Prasad Tiwari

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  • Year: 2005

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-7016-750-1

हिंदी पुस्तकों की समीक्षा पर एकाग्र प्रस्तुत चयन में इस विषय के अनेक आयामों के संस्पर्श और आस्वाद का गहरा अनुभव मिलता है। यह अनुभव पाठक-लेखक, समीक्षक-प्रकाशक और संपादक को समांतर रूप से इसलिए छूता है, क्योंकि पुस्तक-समीक्षा के संसार में ये सब निकटतम और घनिष्ठतम ‘पड़ोसी’ हैं। भावनात्मक और सक्रियात्मक दोनों ही रूप में अभिन्न। पुस्तक-समीक्षा का आधुनिक परिदृश्य एक सत बहस और पूछताछ से आच्छादित है और संभवतः इसीलिए यह विषय साहित्य के हाशिए पर रहने वाला विमर्श न रहकर अब केंद्र में आ गया है।
किताबघर प्रकाशन द्वारा संचालित वार्षिक ‘आर्य स्मृति साहित्य सम्मान’ के वर्ष 2005 के आयोजन में पुस्तक समीक्षा की स्थिति की गहराई से पड़ताल करने के उपक्रम में अनेक गंभीर एवं कतिपय रोचक कथ्य-तथ्य सामने आए। कुल मिलाकर उक्त विषयक स्थिति को चिंतामयी ही चिन्हित किया गया। साथ ही, यह विचार भी सामने आए कि पुस्तक के प्रकाशन के उपरांत होने वाले इस सर्वप्रथम संस्कार (समीक्षा) की पवित्रता को कैसे पुनस्र्थापना मिले तथा इसके भावी रूप-स्वरूप को किस प्रकार मिल आकार और आकृति। इन आलेखों में पाठक पाएंगे कि पुस्तक का समीक्षात्मक परिचय ही पाठक के मनोभाव में विश्वसनीयता जगा सकता है।
संभवतः हिंदी की यह अकेली और पहली ऐसी पुस्तक है, जिसका विषय किताब के जीवन से सीधे जुड़ा हैं। अर्थात् किताब की चिंता में तल्लीस एवं एक किताब। मुद्रित शब्द पर आए-छाए संकटों के बीच विश्वसनीय पुस्तक-समीक्षा ही एक ऐसा अस्त्र हो सकता है, जिसके सहारे शब्दों के सार्वजनिक प्रहरी सीना तानकर, दृश्यलिप्त दुनिया को यह दिखा सकते हैं कि अंततः शब्द ही ब्रह्म है।

Vishwanath Prasad Tiwari

विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
जन्म : 1940 ई०, कुशीनगर जनपद के एक गांव रायपुर भैंसही-भेडिहारी, (उ०प्र०) ।
पद : गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से आचार्य एवं अध्यक्ष पद से 2001 ई० में अवकाश ग्रहण ।
प्रकाशित पुस्तकें : 'आधुनिक हिंदी कविता', 'समकालीन हिंदी कविता', 'रचना के सरोकार', 'कविता क्या है' , 'गद्य के प्रतिमान', 'आलोचना के हाशिए पर' (आलोचना); 'चीजों को देखकर', 'साथ चलते हुए', बिस्तर दुनिया के लिए', आखर अनंत', 'फिर भी कुछ रह जाएगा' (कविता-संस्मरण); 'आत्म की धरती', 'अंतहीन आकाश' (यात्रा-संस्मरण); 'एक नाव के यात्री' (लेखक के संस्मरण); 'मेरे साक्षात्कार' (साक्षात्कार)।
विदेश यात्राएँ : इंग्लैंड, मॉरिशस, रूस, नेपाल, अमेरिका, नीदरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, लक्जमबर्ग, बेल्जियम, चीन, थाईलैंड ।
पुरस्कार : बिड़ला फाउंडेशन, दिल्ली द्वारा 2010 का 'व्यास' सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 2007 में 'हिंदी गौरव' सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 2000 में 'साहित्य भूषण' सम्मान, भारत मित्र संगठन, मास्को, रूस द्वारा बर्ष 2003 में 'पुश्किन' सम्मान, 'दस्तावेज' पत्रिका को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 1988 और 1995 में 'सरस्वती' सम्मान ।
संपादन : गोरखपुर से 'दस्तावेज' साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका का संपादन । यह पत्रिका रचना और आलोचना को विशिष्ट पत्रिका है, जो 1978 से अब तक नियमित निकल रही है ।
अनुवाद : अनेक देशी-विदेशी भाषाओं में रचनाओं के अनुवाद हुए हैं । रूसी, नेपाली, अंग्रेजी, मलयालम, पंजाबी, मराठी, बंगला, उर्दू आदि में भी रचनाएं अनूदित ।
संप्रति : उपाध्यक्ष, साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली ।

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