Kavi Ne Kaha : Jitendra Shrivastava

Jitendra Shrivastva

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  • Year: 2016

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789385054570

पिछली सदी के आखिरी दशक में एक धमक की तरह काव्य-परिदृश्य पर उपस्थित हुए कवि जितेन्द्र श्रीवास्तव आज नयी सदी की कविता के सर्वाधिक प्रशंसित और अनिवार्य कवि हैं। बाजारू प्रलोभनों से बचाकर हिंदी कविता को विश्वसनीय बनाए रखने के प्रति सर्जनात्मक सजगता जितेन्द्र को अपने समकालीनों में अलग पहचान दिलाती है। हमेशा करुणा, प्रेम और उम्मीद का पक्ष लेती हुई जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविता अपने आसपास पसरी हुई त्रासदी, अन्याय और दुःख के राजनीतिक तात्पर्यों का साहसिक उद्घाटन भी करती चलती है। जैसा कि होना चाहिए--गहन रूप से राजनीतिक होकर भी जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविता अपने स्वभाव में मानवीय, मार्मिक और भावनात्मक रूप से आर्द्र बनी रहती है।
जितेन्द्र के लिए, कविता मनुष्य की नैसर्गिक संवेदनाओं को परिमार्जित करने का माध्यम है। मानवीय जिजीविषा के बहुविधि संस्तरों से साक्षात्कार के क्रम में उनकी कविता को कलात्मक मेयार की कठिनतर ऊँचाइयों तक पहुँचते हुए देखा जा सकता है। नयी सदी की कविता के भाषिक और संवेदनात्मक आचरण को उदाहरणीय बनाने में जिन थोड़े कवियों का योगदान है, उनमें जितेन्द्र श्रीवास्तव अलग से ध्यान खींचते हैं।
स्त्री, दलित, उत्पीड़ित और मार्जिनलाइज्ड समाज के तमाम अंतरंग जीवन-प्रसंगों से निर्मित जितेन्द्र की कविता का वितान बहुआयामी तो है ही, इसकी हदें इतिहास से लेकर भविष्य के अनिश्चय भरे अँधेरों तक व्याप्त हैं। जहाँ तक विमर्शों का प्रश्न है कविता में कला का सौंदर्य बचाते हुए जितेन्द्र को पूरे काव्यात्मक संतुलन के साथ, विमर्शों में कारगर हस्तक्षेप करते हुए देखा जा सकता है।
कविता के प्रति पाठकों की घटती हुई अभिरुचि के प्रतिकूल माहौल में भी जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविता अनेक तरह के सांस्कृतिक समूहों और आर्थिक-राजनीतिक रुझानों के पाठकों में समान प्रशंसा और प्रतिष्ठापूर्वक पढ़ी जाती है। उम्मीद की जाती है कि उनकी कविताओं का यह चयन पाठकों की संवेदना को स्पंदित करने में सफल रहेगा।
--कपिलदेव

Jitendra Shrivastva

जितेन्द्र श्रीवास्तव 
जन्म: उ.प्र. के देवरिया जिले की रुद्रपुर तहसील के एक गाँव सिलहटा में।
शिक्षा: बी.ए. तक की पढ़ाई गाँव और गोरखपुर में करने के बाद जे.एन.यू., नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए., एम.फिल. और पी-एच.डी.। एम.ए. और एम.फिल. में प्रथम स्थान।
प्रकाशित कृतियाँ: ‘इन दिनों हालचाल’, ‘अनभै कथा’, ‘असुंदर सुंदर’, ‘बिल्कुल तुम्हारी तरह’ (कविता-संग्रह) ० ‘भारतीय समाज की समस्याएँ और प्रेमचंद’, ‘भारतीय राष्ट्रवाद और प्रेमचंद’, ‘शब्दों में समय’, ‘आलोचना का मानुष-मर्म’ (आलोचना) ० ‘प्रेमचंद: स्त्री-जीवन की कहानियाँ’, ‘प्रेमचंद: दलित जीवन की कहानियाँ’, ‘प्रेमचंद: स्त्री और दलित विषयक विचार’, ‘प्रेमचंद: हिंदू-मुस्लिम एकता संबंधी कहानियाँ और विचार’ (सभी भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली से शीघ्र प्रकाश्य) (संपादन) ० भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली से प्रकाशित ‘गोदान’, ‘रंगभूमि’, ‘धु्रवस्वामिनी’ की भूमिकाएँ लिखी हैं।
हिंदी के साथ-साथ भोजपुरी में भी लेखन-प्रकाशन। कुछ कविताएँ अंग्रेजी, मराठी, उर्दू, उड़िया और पंजाबी में अनूदित। लंबी कविता ‘सोनचिरई’ की कई नाट्य प्रस्तुतियाँ।
पुरस्कार-सम्मान: हिंदी अकादमी, दिल्ली का कृति सम्मान, उ.प्र. हिंदी संस्थान का रामचंद्र शुक्ल पुरस्कार, भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार, उ.प्र. हिंदी संस्थान का विजयदेवनारायण साही पुरस्कार, भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता का युवा पुरस्कार, डॉ. रामविलास शर्मा आलोचना सम्मान और परंपरा ऋतुराज सम्मान।
जीविका: अध्यापन। कार्यक्षेत्र पहाड़, गाँव और अब महानगर। राजकीय महाविद्यालय बलुवाकोट, धारचूला (पिथौरागढ़), राजकीय महिला महाविद्यालय, झाँसी और आचार्य नरेन्द्रदेव किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बभनान, गोण्डा (उ.प्र.) में अध्यापन के पश्चात् इन दिनों इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के मानविकी विद्यापीठ में अध्यापनरत।

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