Dus Pratinidhi Kahaniyan : Mudrarakshash

Mudra Rakshes

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170167242

'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।

इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।

किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार मुद्राराक्षस ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'जले मकान के कैदी', 'दिव्य दाह', 'युद्ध', 'विस्थापित', 'एहसास', 'फरार मल्लावाँ माई राजा से बदला लेगी', 'नी', 'पैशाचिक', 'मुजरा' तथा 'एक बंदर की मौत' ।

हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक मुद्राराक्षस की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Mudra Rakshes

मुद्राराक्षस
वास्तविक नाम-सुभाषचन्द्र। 
जन्म : 21 जून, 1933, लखनऊ के गाँव बेहटा में। 
1951 से लेखन, कविताएं, कहानियां, आलोचना। 
1976 में सस्कारी नौकरी से इस्तीफे के बाद से स्वतंत्र लेखन। 
अखबारों में समाज, अर्थतंत्र और इतिहास संबंधी टिप्पणियों के लिए विख्यात भी और विवादित भी। 
नौ नाटक, नौ उपन्यास, चार कहानी-संग्रह, दो आलोचना ग्रंथ, चार व्यंग्य-संग्रह के अतिरिक्त इतिहास और समाज पर अनेक पुस्तकें प्रकाशित।
साहित्य के अलावा ललितकलाओं और रंगचर्या के लिए भी विख्यात। 
स्वयं गायक, अभिनेता
सामाजिक आंदोलनों में भागीदारी। 

स्मृति-शेष : 13 जून, 2016

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