Dus Pratinidhi Kahaniyan : Bhishm Sahni

Bhishm Sahni

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  • Year: 2016

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789385054662

'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ 'किताबघर' की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।

इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।

'किताबघर' गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए अग्रज कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कथाकार भीष्म साहनी ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'वाङ्चू',  'साग-मीट', 'पाली', 'समाधि भाई रामसिंह', 'फूलां', 'सँभल के बाबू', 'आवाजें', 'तेंदुआ', 'ढोलक' तथा 'साये'।

हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात कथाकार भीष्म साहनी की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Bhishm Sahni

भीष्म साहनी जन्म : 8 अगस्त, 1915 जन्म-स्थान : रावलपिण्डी शिक्षा : एम०ए० ,पी-एच० डी० वर्षों तक दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य में अध्यापन-कार्य किया । 1980 में अवकाश ग्रहण किया । अब तक छह उपन्यास, पाँच नाटक, नौ कहानों-समग्र प्रकाशित हुए है । सात माल (1957 से 1963) मास्को में अनुवाद-कार्य, टाल्सटॉय की अनेक कृतियों का हिन्दी में अनुवाद किया । 1965-67, में 'नई कहानी' पत्रिका का संपादन । 1976 में 'तमस' उपन्यास पर साहित्य अकादमी पुरस्कार । इसके अतिरिक्त शिरोमणि लेखक (पंजाब) और लोटस (अफ्रो-एशियायी लेखक संध) आदि पुरस्कारों से सम्मानित ।
स्मृति-शेष : 11 जुलाई, 2003

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