Sunder Padavalee

Ramesh Chnadra Mishra

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  • Year: 1992

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Jagat Ram & Sons

  • ISBN No: 111-11-1111-111-1

विचित्र विरोधाभास है कि इस घोर वैज्ञानिक युग में भी मध्यकाल के भक्त कवि अधिक प्रासंगिक होते जा रहे हैं। ...सुंदरदास इस धारा के बहुत प्रमुख कवि हैं। इनकी कविताओं में भकित मूलक विशेषताएं तो हैं ही, कुछ उनका अपना निजी संसार भी है। पदावली में। मूलतः भक्तिपरक कविताएं हैं। ...जहां कवि ने लौकिक संबंध-बिंबों और प्राकृतिक परिवेश के माध्यम से भक्ति भाव की अभिव्यकित की है, वहां कविता अधिक प्रभविष्णु हो उठी है। ‘अब आयो है फागुन ऋतु वसंत’ जैसी कविताओं में लौकिक बिंब अपनी छवि बिखेरते हुए पाठकों के भीतर रागात्मक अनुभव का संचार कराते हैं। डाॅ. रमेशचंद्र मिश्र ने संत-काव्य परंपरा में आने वाले अनेक कवियों का गहन अध्ययन किया है। उनके द्वारा सुंदर की कविताओं का भाष्य प्रभावशाली है। मिश्र जी इन रचनाओं के भाष्य में कविताओं से लगातार जूझे हैं। आशा है मिर जी का सुंदर-पदावली संबंधी अध्ययन संत-साहित्य के अध्ययन में बहुत महत्वपूर्ण आयाम जोड़ेगा।

Ramesh Chnadra Mishra


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