Saara Jahaan Hamaara

Shanker Bam

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  • Year: 2014

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Jagat Ram & Sons

  • ISBN No: 978-81-88125-14-2

हमारे पुराने ऋषि-मुनियों ने हजारों बरस पहले ही, जबकि दुनिया के तमाम देश असभ्य और पिछडे हुए थे, मानवता का उदात्त नारा बुलंद किया था ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ यानी सारा संसार ही एक बड़े परिवार की तर है। जिस प्रकार परिवार के सभी सदस्य एक होकर रहते हैं, आपस में लड़ते-झगड़ते नहीं, उसी तरह दुनिया के सभी लोगों को एक होकर प्रेम, शान्ति और सौहार्द से रहना है, सबके सुख में अपना सुख समझना है, तभी अखिल मानव जाति का कल्याण संभव हो सकेगा अन्यथा विनाशकारी महायुद्धों की लपेट में आकर वह नष्ट हो जाएगी और एक दिन उसे फिर पत्थर युग में प्रवेश करना पड़ेगा।
हम चाहते है कि सब एक होकर भाईचारे और अमन से रहें। हम सब मिलकर एक कंठ से गाएं-
है यह धरा हमारी,
यह गगन है हमारा
हम एक प्राण हैं सब,
सारा जहां हमारा।
हैं रंग न्यारे-न्यारे,
हैं ढंग न्यारे-न्यार।
परिवार एक के पर,
हम हैं सदस्य सारे।
लो मिल के गीत गाएं,
सबको गले लगाएं।
दुख-दर्द को मिटाकर,
सबको सुखी बनाएं।
आंखों का सबकी तारा,
सारा जहां हमारा।
—इसी पुस्तक से

Shanker Bam

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