Vishay Purush

Mastram Kapoor

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  • Year: 1997

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 1100220011112

विषय-पुरुष 
स्त्री और पुरुष दोनो स्वतंत्रचेता व्यक्ति होने के नाते कभी विषयी के रूप ने काम करते हैं तो कभी विषय बनते हैं । किसी से प्यार करते समय है विषयी होते है और प्यार किए जाने की चाह में वे विषय बनते हैं । किंतु विषयी अथवा विषय बनना उनकी स्वतंत्र चेतना का अधिकार हैं । भय या प्रलोभन से किसी पर यह भूमिका लादना अनैतिक ही नहीं, अश्लील भी है । दुर्भाग्य से मानव-समाज ने स्त्री को हमेशा विषय के रूप ने ही स्वीकार किया, उसे विषयी बनने के अधिकार से वंचित रखा और यह काम पुरुष-समाज ने किया भय और प्रलोभन दिखाकर जिसने धर्म का भय और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रलोभन भी शामिल है ।
स्त्री-स्वतंत्रता के दमन की पुरुष-प्रवृति की प्रतिक्रिया ने लिखा गया यह उपन्यास सशक्त कहानी के साथ-साथ एक वैचारिक प्रयोग भी है । हमेशा विषयी की भूमिका निभाने वाले को (अथवा इसका वा करने वाले को) जब विषय बनना पाता है तो उसको क्या दशा होती है, यही इस उपन्यास का विषय है ।

Mastram Kapoor

मस्तराम कपूर
जन्म : 22 दिसंबर, 1926, सकड़ी (हिमाचल प्रदेश)
प्रमुख रचनाएँ :-
उपन्यास : विमथगामी, रास्ता बंद, कान चालू, नाक का डॉक्टर, एक सदी बाँझ तथा बिषय-पुरुष ।
कहानी-संग्रह : एक अदद औरत, ग्यारह पत्ते, ब्रीफकेस, हेनी और अन्य कहानियाँ (प्रेस में) ।
नाटक : पत्नी ऑन ट्रायल, सॉप आदमी नहीं होता ।
कविता : कूडेदान से साभार ।
विचार-प्रधान : हम सब गुनहगार समसामयिक प्रतिक्रियाएँ, पं० चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी', साहित्यकार का संकट, अस्तित्ववाद से गांधीवाद तक, राष्ट्रीय एकता का संकट और साम्प्रदायिक शक्तियां, मंडल रिपोर्ट : वर्णव्यवस्था से समाजवादी व्यवस्था की ओर, साम्यवादी विश्व का विघटन और समाजवाद का भविष्य ।
पैम्फलेट : हिन्दूवाद आत्महत्या की ओर, नर-नारी समता के मायने, साम्प्रदायिक दंगों का समाजशास्त्र, अंग्रेजी हटाओ' आंदोलन की प्रासंगिकता, भ्रष्टाचार : उपभोगवादी संस्कृति का ब्रह्मराक्षस, वर्तमान सभ्यता का संकट और गांधी-लोहिया ।
बाल-साहित्य : निर्भयता का वरदान, दंड का पुरस्कार, सहेली, बेजुबान साथी, मुँहमाँगा इनाम, पहला पडाव, बीजू की दादी, पारस की खोज (कहानी-संग्रह);
नीरू और हीरू, सपेरे की लड़की, भूतनाथ, सुनहरा मेमना (उपन्यास); एक थी चिड़िया (चित्रकथा) स्पर्धा, बच्चों के नाटक, बच्चों के एकांकी पाँच बाल-नाटक (नाटक) ।
अनुवाद : ग्यारह तुर्की कहानियां, आंध्र प्रदेश : लोक संस्कृति और साहित्य, डॉ० आंबिडकर : एक चिंतन, सरदार पटेल : व्यवस्थित राज्य के निर्माता, एशिया के बाल-नाटक, स्वामी और उसके दोस्त आदि ।

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