Yaksha Prashn

Shivji Shrivastva

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  • Year: 2002

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 9788188118069

यक्ष-प्रश्न
शिवजी श्रीवास्तव नवें दशक के चर्चित कथाकारों में से हैं। 'वर्तमान साहित्य' द्वारा आयोजित कृष्ण प्रताप स्मृति कहानी प्रतियोगिता में उनकी कहानियों 'जाल', 'माँद' एवं 'अजगर' ने क्रमश: 1988, 1989 एवं 1990 में लगातार तीन वर्षों तक पुरस्कार जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया । उनके एक रेडियो नाटक 'ऐसे तो घर नहीं बनता मम्मी' को आकाशवाणी द्वारा आयोजित अखिल भारतीय रेडियो नाटय-लेखन प्रतियोगिता--1992-1993 में हिंदी वर्ग में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ । यह उस वर्ष का सर्वोच्च पुरस्कार था ।
'यक्ष-प्रश्न' में युग की विसंगतियों से जूझते ईमानदार आदमी की कहानियाँ हैं । वस्तुत: हर युग की अपनी समस्याएं होती हैं; अपने यक्ष-प्रश्न होते हैं, जो पिछले युग से भिन्न होते है । इस युग में उपभोक्तावादी संस्कृति के विस्तार, सर्वग्रासी भ्रष्टाचार, परंपराओं की जकडन, सांप्रदायिकता इत्यादि ने आदमी को नितांत अकेला कर दिया है । इस संग्रह में आदमी के इसी अकेलेपन की व्यथा-कथा की कहानियां हैं । सामाजिक सरोकारों से जुडी इन कहानियों के विषय जिंदगी के बीच से उठाए गए है इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति कहीं न कहीँ अपने को इन कहानियों में पाता है। वस्तुत: इस संग्रह की प्रत्येक कहानी अपने में एक यक्ष-प्रश्न है, जो संवेदनशील पाठक के लिए चिंतन के नए आयाम उपस्थित करती है ।

Shivji Shrivastva

शिवजी श्रीवास्तव
जन्म : 19 जनवरी, 1955, जिला झाँसी (उ०प्र०)
शिक्षा : एम०ए० (हिंदी), पी-एच०डी०
संप्रति : रीडर, हिंदी विभाग, श्री चित्रगुप्त पी०जी० कॉलेज मैनपुरी (उ०प्र०)
पुरस्कार-
'वर्तमान साहित्य' द्वारा आयोजित कृष्ण प्रताप स्मृति कहानी प्रतियोगिता--1988, 1989 एवं 1990 में क्रमश: 'जाल', 'माँद' एवं 'अजगर' कहानियां पुरस्कृत ० अखिल भारतीय रेडियो नाटय-लेखन प्रतियोगिता--1992-93 में रेडियो नाटक 'ऐसे तो घर नहीं बनता मम्मी' पुरस्कृत (द्वितीय पुरस्कार)
प्रकाशन-
निष्कर्ष, वर्तमान साहित्य, कथा-दशक, कथा समवेत,
देशकाल संपदा इत्यादि प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में
समय-समय पर कहानियाँ, नाटक एवं समीक्षात्मक लेख प्रकाशित

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