Deshbhakat Bane

Jagat Ram Arya

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  • Year: 2016

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Himachal Pustak Bhandar

  • ISBN No: 978-81-88123-42-1

हम अपने सुंदर देश को दिल से प्यार करते हैं। इसके बीते हुए दिन, इसकी पुरानी शान भी हमें प्यारी है। इसके दुःख हमारे दुःख हैं। इसका दर्द हमारा अपना दर्द है। जैसे हम अपने जीवन वृक्ष को फलता-फूलता देखना चाहते हैं वैसे ही हम कामना करते हैं कि हमारा देश भी फले और फूले।
इसके लिए हम अपना तन-मन-धन बलिदान करने को तैयार हैं। हमने भारतमाता की सहनशीलता को देखकर क्षमा करने की प्रेरणा ली है। हम केवल इसे प्रेम ही नहीं करते अपितु हर क्षेत्र में इसकी उन्नति के लिए कंधा भी लगाएंगे। हमारे शरीर की रग-रग में रक्त का एक-एक कण इसी मातृभूमि की नदियों का दिया हुआ रस है और इसके खेतों में उपजे हुए अनाजों से हमारा शरीर बलवान बना है। यह हमारी जन्मदायिनी मां है। यही हमारा भगवान है। हम इसके चरणों में अपना सिर झुकाते हें। इसका प्यार पाने के लिए हम इसकी वंदना करते हैं और दिन-रात पवित्र मन से इसी का स्मरण करते हैं। भारत माता की जय हो।

Jagat Ram Arya

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