Vishnugupta Chanakya

Virendra Kumar Gupt

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  • Year: 2018

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Amarsatya Prakashan

  • ISBN No: 9788188466528

विष्णुगुप्त चाणक्य
"वत्स यवन ! मैं सत्यान्वेषी अध्येता और अध्यापक हूँ। यही मेरी मूल वृत्ति और साधना है ।
इसी सत्य-शोध की साधना के बीच अनायास ही चन्द्रगुप्त मुझे मिला, नंद-वंश के विनाश और नए साम्राज्य के निर्माण का संकल्प मुझे मिला; संकल्प की पूर्ति मिली और इस विशाल आर्य साम्राज्य का महामंत्रित्व मिला । पर सदैव ये सब मेरे लिए माध्यम ही रहे, सत्य ही लक्ष्य रहा ।"
-(इसी उपन्यास से)

Virendra Kumar Gupt

वीरेन्द्र कुमार गुप्त
जन्म : 1928
1950 से लेखनरत । पहली रचना एक नाटक 'सुभद्रा-परिणय' 1952 में प्रकाशित । स्फुट कविताएँ। दो प्रबंध काव्य 'प्राण-द्वंद्व' एवं 'राधा कुरुक्षेत्र में' । सात उपन्यास, जिनमें तीन ऐतिहासिक: चिंतनपरक लेख । जैनेन्द्र कुमार से लंबा संवाद 'समय और हम' । प्रेम-पत्रों का संकलन 'प्रसिद्ध व्यक्तियों के प्रेम-पत्र' ।
अंग्रेजी में दो पुस्तकें 'Ahimsa In India's Destiny' तथा 'The Inner Self'
लगभग दस पुस्तकों का अंग्रेजी से अनुवाद। 
बाल-साहित्य का भी सृजन ।

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