Hindi : Kal Aaj Aur Kal

Prabhakar Shrotiya

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-7016-673-3

यह पुस्तक आजादी के बाद उत्पन्न राष्ट्रभाषा की बहुचर्चित समस्या को निराले अंदाज में उठाती है। डाॅ. श्रोत्रिय समस्या की तह तक गए हैं। उन्होंने हिंदी से संबंधित लगभग सभी पक्षों को छुआ है। आज जब भारत में अंग्रेजी का दबदबा बढ़ता जा रहा है, यह पुस्तक हमें इससे उत्पन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खतरों से सावधान करती है।
डाॅ. श्रोत्रिय जब अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में भाग लेने के लिए धुर उत्तर के देश नार्वे में आमंत्रित हुए, तब वहां दिए गए वक्तव्य और सोच को लेकर लिखा उनका लेख अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ में हिंदी के स्वरूप और समस्या पर नई रोशनी डालता है।
‘वागर्थ’ और ‘ज्ञानोदय’ के संपादकीय के रूप में उन्हांेने हिंदी के प्रश्न कई तरह से उठाए हैं, वे भी इस पुस्तक में शामिल हैं।
इस तरह यह पुस्तक एक लंबे समय से अब तक हिंदी के संबंध में व्यक्त उनके विचारों की प्रतिनिधि पुस्तक है।

Prabhakar Shrotiya

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