Mushkil Kaam (Paperback)

Asghar Wajahat

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  • Year: 2016

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-82114-66-6

मुश्किल काम
लघुकथा के संबंध में फैली भ्रांतियों को तोड़ती असग़र वजाहत की लघुकथाएँ अपनी विशिष्ट शैलियों तथा व्यापक कथ्य प्रयोगों के कारण चर्चा में रही हैं। वे पिछले पैंतीस साल से लघुकथाएँ लिख रहे हैं। उनकी लघुकथाएँ इन अर्थों में अन्य लघुकथाओं से भिन्न हैं कि उनकी लघुकथाएँ  किसी विशेष शैली के सामने समर्पण नहीं करती है। पंचतंत्र की शैली से लेकर अत्याधुनिक अमूर्तन शैलियों की परिधि को अपने अंदर समेटे असग़र वजाहत की लघुकथाएँ पाठक का व्यापक अनुभव जगत् से साक्षात्कार कराती हैं। प्रस्तुत लघुकथाएँ सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक विषयों तक फैली हुई हैं। सामाजिक प्रतिबद्धता इन लघुकथाओं की एक विशेषता है, जो किसी प्रकार के अतिरिक्त आग्रह से मुक्त है। इन लघुकथाओं के माध्यम से मानवीय संबंधों, सामाजिक विषमताओं और राजनीतिक ऊहापोह को सामने लाया गया है।
निश्चित रूप से प्रस्तुत लघुकथाएँ हिंदी लघुकथा की विकास-प्रक्रिया को समझने में भी सहायक सिद्ध होती हैं।

Asghar Wajahat

असग़र वजाहत
असग़र वजाहत के अब तक पाँच उपन्यास, छह नाटक, पाँच कथा-संग्रह, एक नुक्कड़ नाटक-संग्रह और एक आलोचनात्मक पुस्तक प्रकाशित हो चुके हैं। वर्ष 2007 में ‘आउटलुक’ हिंदी साप्ताहिक पत्रिका ने उन्हें दस सर्वश्रेष्ठ लेखकों में शुमार किया था। उनकी कृतियों का अनुवाद अनेक भारतीय और विदेशी भाषाओं में हो चुका है। अंग्रेज़ी भाषा में अनूदित उनका कहानी-संग्रह ‘लाइज़: हाफ टोल्ड’ प्रकाशित हो चुका है। अंग्रेज़ी के अतिरिक्त उनकी रचनाओं के अनुवाद इतालवी, जर्मन, रूसी और हंगेरियन भाषाओं में हो चुके हैं।
वर्ष 2007 में बीबीसी हिंदी डॉट कॉम में वे अतिथि संपादक भी रहे। प्रसिद्ध हिंदी पत्रिकाओं ‘हंस’ (भारतीय मुसलमानः वर्तमान और भविष्य-विशेषांक) और ‘वर्तमान साहित्य’ (प्रवासी साहित्य-विशेषांक) का अतिथि संपादन किया।
वे पिछले तीस वर्षों से हिंदी फिल्मों के लिए पटकथाएँ भी लिख रहे हैं। उन्होंने मुजफ्फर अली की चर्चित फिल्म ‘आगमन’ की पटकथा लिखी थी। आजकल वे प्रख्यात फिल्म निर्देशक राजकुमार संतोषी के लिए भी एक पटकथा पर काम कर रहे हैं, जो उनके नाटक ‘जिस लाहौर नहीं देख्या...’ पर आधरित है।
इसके अलावा उन्होंने कुछ वृत्तचित्रों का भी निर्माण किया है, जिसमें 1984 में उर्दू ग़ज़लों के विकास पर बनाई गई डॉक्यूमेंट्री भी शामिल है।
असग़र वजाहत को हाउस ऑफ लॉडर्स में उनके उपन्यास ‘कैसी आगी लगाई’ के लिए कथा यू० के० सम्मान से भी नवाज़ा जा चुका है।

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