Pakistan Mein Waqt Se Mulaqat

Shyam Vimal

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
300.00 270 + Free Shipping


  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 9788189982966

लेकिन पैसा हर जगह वह काम नहीं करता जो काम मीठी हमबोली कर जाती है। यही तो हुआ मेरे साथ मैं मुलतानी बोली में उन सज्जनों से परिचय व बातचीत कर रहा था, बदले में जहां उन्होंने मुझे कोल्ड ड्रिंक पेश किया, वहां उन्होंने मोची के तयशुदा पॉलिश के दस रुपए नहीं लिए। मोची तक ने मना कर दिया लेने सै। मैं हिंदू पकिस्तान के इस नगर में पराया नहीं माना गया-हमवतनी माना। उनके इस प्रेम ने मुझे अभिभूत कर दिया। जूती पहनकर लौट लिया पैदल अपने डेरे पर। 
इस पैदल चलने में मुझे फायदा यह था कि मैं पहले के देखे हुए इलाके में अपनी उन जगहों को, गलियों को पहचान सकूं जिनसे मैं कई दफा गुजरा होऊंगा। मुझे ऐसा लगता रहा, मैं वक्त के खोल में कैद हूँ और पारदर्शी बुलबुले समान उस खौल का सुरक्षाकवच पहने हूँ और वर्तमान में उस पार के अतीत को निहारने में कामयाब हो रहा हूं। चलते-देखते एक जगह कामयाबी मिल गई। भीड़ से भरे उस गली के मुहाने को अंदाज से पहचान लिया कि हां, यह वही गली है जहाँ मेरी भरजाई का ननिहाल है-होता था ।

Shyam Vimal

श्याम विमल
जन्म नाम: श्याम सुंदर शर्मा। सिरायकी (पंजाबी रूप) भाषी।
जन्म: शुजाबाद (ज़िला मुलतान, पाकिस्तान) में 19 फरवरी, 1931(सर्टिफिकेट में--3 मार्च, 1931)
संस्कृत-हिंदी-अंग्रेज़ी में डिग्रियों के अतिरिक्त मराठी भाषा- प्रशिक्षण में पश्चिम क्षेत्रीय भाषा केंद्र, डेक्कन कालेज, पुणे से डिप्लोमा।
सात वर्ष पत्रकारिता (नवभारत टाइम्स में)। लगभग पैंतीस वर्ष सरकारी विद्यालयों में अध्यापन। अब स्वतंत्र लेखन। 
प्रकाशित कृतियाँ: इसे मिलाकर छह उपन्यास। एक कहानी-संग्रह। तीन कविता-संग्रह। दो व्यंग्य-संग्रह। दो पुस्तकें आत्मीय एवं साहित्यिक संस्मरण की। एक पाकिस्तान-यात्रा पर ‘पाँचवाँ धाम’। मराठी में दो अपने उपन्यासों तथा संस्कृत में अपने हिंदी उपन्यास का अनुवाद। हिंदी के आठ कवियों की अस्सी कविताओं का मराठी में अनुवाद तथा संपादन। कालिदासकृत ‘ऋतुसंहार’ का हिंदी रूपांतरण (द्वैभाषिक) और सैकड़ों फुटकर लेखादि।
सम्मान-पुरस्कार: साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली द्वारा ‘व्यामोहः’ पर संस्कृत में राष्ट्रीय अनुवाद पुरस्कार (1997) ०  मराठी कविताओं की पांडुलिपि ‘उन्हाचे तुकडे’ पर शिक्षा-संस्कृति मंत्रालय का प्रतिस्पद्र्धा पुरस्कार (1982) ०  अ० भा०  साहित्य परिषद्, दिल्ली, तृतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन, गाजियाबाद तथा लायंस क्लब, नोएडा-दिल्ली द्वारा सम्मानित।

Scroll