Maitreyi Uwach

Sushil Sidharth

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
500.00 425 +


  • Year: 2019

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788194004080

मैत्रेयी पुष्पा को पढ़ते हुए मुंशी प्रेमचंद का वह अविस्मरणीय भाषण याद आता रहता है जिसमें उन्होंने सौंदर्य का मेयार बदलने का आह्नान किया था। मनोरंजन और बेचैनी केबीच एक निर्णायक रेखा खींची थी। मैत्रेयी ने सौंदर्य की व्याख्या नहीं कीउसका मेयार बदल दिया। ऐसे कथानक और पात्र कथा साहित्य में आए कि कुलीनतंत्र में भगदड़ मच गई।अनुभवों की रेशमी चादरों में लिपटे लोग भरोसा नहीं कर पाए कि यह जीवन इसी देश का हैये पात्र इसी समाज के हैं। कायदनमैत्रेयी की रचनाओं का समाजशास्त्रीय अध्ययनहोना चाहिए।

इस अध्ययन में इस पुस्तक में संग्रहीत 39 संवाद अनेक अर्थों में उपयोगी साबित होंगे। यहां मैत्रेयी उवाच की एक ऐसी छटा देखने को मिलेगी जिसमें उनका लेखकविचारकएक्टिविस्ट और स्त्री विमर्शकार खुलकर बात करता है। इससे प्रश्नकर्ताओं और मैत्रेयी जी के बीच एक ऐसी विचारधारा बही है जिसमें पाठक भी स्वयं को रससिक्त पाएंगे।


Sushil Sidharth

सुशील सिद्धार्थ 
 जन्म : 2 जुलाई, 1958, ग्राम भीरा , जिला सीतापुर ( उ.प्र. )
शिक्षा : हिंदी साहित्य में पी-एच डी.
प्रकाशित पुस्तकें : 'प्रीति न करियो कोय', 'मो सम कौन', 'नारद की चिंता (व्यंग्य संग्रह) ० 'बागन- बागन कहै चिरैया', ' एका' (अवधी कविता संग्रह)
संपादित पुस्तकें : 'श्रीलाल शुक्ल संचयिता', 'मेरे साक्षात्कार : शिवमूर्ति', 'मेरे साक्षात्कार : मन्नू भंडारी', 'दस प्रतिनिधि कहानियां : उषाकिरण खान', 'दस प्र तिनिधि कहानियां : ऋता शुक्ल', 'प्रतिनिधि कहानियां : चित्रा मुद्ल', 'हिंदी कहानी का युवा परिदृश्य' ( 3 खंड)
व्यंग्य और आलोचना में सक्रिय
कई समाचार-पत्रों व पत्रिकाओं में स्तंभ लेखन । पर्याप्त मीडिया लेखन
'उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान' से दो बार व्यंग्य और दो बार अवधी कविता हेतु नामित पुरस्कार । आलोचना के लिए 'स्पंदन सम्मान'
'व्यंग्य लेखक समिति' (वलेस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष

Scroll