Yatra Ke Panne

Rahul Sankrityayan

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  • Year: 2018

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Jagat Ram & Sons

  • ISBN No: 9788188125746

यात्रा के पन्ने
कालजयी व्यक्तिव के स्वामी महापंडित राहुल सांकृत्यायन  की प्रस्तुत पुस्तक 'यात्रा के पन्ने' से उनके द्वारा की गई तिब्बत-यात्राओं को शामिल किया गया है । अपनी प्रमुख कर्मस्थली तिब्बत से लेखक का अत्यंत गहरा एवं भावनात्मक लगाव रहा है । तिब्बत की पहली, दूसरी तथा तीसरी यात्राओं का विवरण इस पुस्तक में आने  से राहुल जी के यात्रा-साहित्य की यह एक उल्लखनीय कृति बन गई है । 'यात्रा  के पन्ने' में जहाँ राहुल जी तिब्बत के सर्वस्व को अपनी चेतस दृष्टि से जान और पहचान पाए है, वहीं इन यात्राओं में उनकी जन-प्रतिबद्धता की झलक भी दिखाई पड़ती हैं । इतिहास-दृष्टि के आलोक में आधुनिक जीवन-दृष्टि को वैज्ञानिक विस्तार देती उनकी यात्राएं पाठक को समृद्ध करने में सक्षम है । तिब्बत की शताब्दियों की स्मृति, निर्माण और ध्वंस को यहीं महसूस किया जा सकता है ।
इस पुस्तक में संकलित लेखक के पत्रों का भी विशिष्ट महत्त्व हैं । पेरिस, जर्मनी, लंका तथा स्वदेश से लिखे उनके पत्रों में न केवल लेखक का 'वर्तमान' रचा-बसा है बल्कि अपन समय तथा समाज का दस्तावेजीकरण भी हुआ है । इन संकलित पत्रों को इतिहास के संभवत: सर्वाधिक प्रामाणिक दस्तावेज माना जा सकता है ।
'यात्रा के पन्ने' पुस्तक का एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष है स्वदेशी यात्राओं का । राहुल जी की इस प्रस्तुति में राजस्थान तथा बिहार के अनेक ऐतिहासिक नगरों का यात्रा-वर्णन है, जो इन स्थलों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक निधियों को सामने लाता है

Rahul Sankrityayan

राहुल सांकृत्यायन
9  अप्रैल,1893 : याम पंदहा, जिला आजमगढ़ (उ०प्र०) में जन्म ।  जन्म नाम पडा - 'केदारनाथ पाण्डे । 
1907 : निजामाबाद से मिडिल की परीक्षा । 
1910 : अयोध्या, हरिद्वार, केदार-बद्रीनाथ की यात्रा ।
1912-13 : परसा मठ (जिला छपरा) के महन्त के बुलावे पर उत्तराधिकारी की नियुक्ति । नाम रखा गया 'रामउदारदास'
1913-14 : दक्षिणा भारत की यात्रा ।
1915 : आर्य मुसाफिर विद्यालय में दाखिला और आर्यसमाज के प्रचारक बनने की तैयारी । 
1917-21 : पंजाब से बंगाल तक घुमक्कडी की ।
1921 : असहयोग आंदोलन के दोरान राजनीति में प्रवेश । 
1922 : राजनीतिक कार्य के लिए पहली जेल-यात्रा ।
1923-25 : बाईसवीं सदी की रचना ।
1927 : श्रीलंका के लिए प्रस्थान ।
1928 : विद्यालंकार । बिहार, श्रीलंका द्वारा 'त्रिपिटिकाचार्य' की उपाधि ।
1929 : तिब्बत की पहली यात्रा ।
1930 : महापंडित की उपाधि । श्रीलंका में प्रव्रज्या ग्रहण  का रामोदर सांकृत्यायन से राहुल सांकृत्यायन  बने ।
1934 : तिब्बत की दूसरी यात्रा । 
1936 : तिब्बत की तीसरी यात्रा ।
1938 : तिब्बत की चौथी यात्रा ।
1940-42 : हजारीबाग जेल में ।
1944 : ईरान में प्रवास ।
1945-47 : भाषा-नीति के कारण कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासन । 
1950 : मसूरी में निवास । आठ वर्ष तक वहीं रहे ।
1955 : पुन: कम्युनिस्ट पार्टी में ।
1961 : स्मृति-लोप का आधात ।
1963 : भारत सरकार द्वारा पद्मभ्रूषण से सम्मानित । 
4 अप्रैल, 1963 : दार्जिलिंग में महाप्रयाण। 

इतिहास, पुरातत्त्व, धर्म, संस्कृति, विज्ञान और दर्शन, राज़नीति, आत्मकथा, जीवनियां, यात्रा, नाटक, उपन्यास तथा कहानी लेखन के अलावा संकलन, अनुवाद तथा संपादन के कार्यों में अदभुत योगदान । कृतियों की संख्या लगभग डेढ़ सौ है ।

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