Shaayad Vasant

Pranav Kumar Bandhopadhyaya

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  • Year: 2002

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Jagat Ram & Sons

  • ISBN No: 9788188125074

शायद बसंत
उत्तर कोरिया सामाजिक या आर्थिक रूप में एक बहुख्यात देश तो नहीं है, लेकिन उसकी राजनीति और व्यवस्था की अपनी पहचान है । जापानी और अमेरिकी सामरिक शक्तियों के विरुद्ध रक्तिम संघर्षों ने उस देश को जख्मी जरूर किया है, लेकिन वहाँ अब स्थापित है आत्मविश्वास से भरपूर एक प्रगतिशील राष्ट्र । वहाँ सामान्य रूप में पर्यटकों के जाने को अनुमति अवश्य नहीं है, किंतु मित्र देशों के कुछ बुद्धिजीवी समय-ममय पर आमंत्रित किए जाते रहे है । ऐसे ही एक अवसर पर कवि-कथाकार प्रणवकुमार वंद्योपाथ्याय उत्तर कोरिया  की यात्रा पर जाकर वहाँ के पहाडों, दर्रों, नगरों और गाँवों में घूमते रहे । उस यात्रा की साहित्यिक फसल है शायद वसंत, जो अनौपचारिक डायरी के पन्नों से निकलकर अब प्रस्तुत है एक पुस्तक के रूप में ।
उत्तर कोरिया पर हिंदी में यह पहली पुस्तक है, जो पाठकों को उस देश की भूमि, पहाड़, समुन्द्र और मनुष्य की आंतरिक बनावट से एक अगम्य अनुभव के साथ परिचित कराती है ।

Pranav Kumar Bandhopadhyaya

रणव कुमार वंद्योपाध्याय की अन्य रचनाएँ-

कविता : नरक की क्रांति में मैं ० मृत शिशुओं के लिए प्रार्थना ० काली कविताएं ० मुर्दागाड़ी ० नक्सलबाड़ी ० कालपुरुष ० लालटेन और कवि जमाल हुसेन ० मेघना ० सपने में देश
उपन्यास : खबर (तीन खंडों में) ० गोपीगंज संवाद ० आदिकाण्ड ० अमृतपुत्र ० पदातिक ० पंचवटी
कथा-संग्रह : अथवा ० ईश्वर बाबू अनुपस्थित थे ० बर्फ के रंग का शरीर ० बारूद की सृष्टिकथा ० आत्मज ० स्थानीय समाचार ० प्रणव कुमार वंद्योपाध्याय की विशिष्ट कहानियों
नाटक : फैसले का दिन
आत्मकथा : विदा बंधु विदा
डायरी : दिसंबर 1979
यात्रा-वृतांत : बहुत दूर बहुत पास ० शायद वसंत
रिपोर्ताज : क्रिस्टोबल मिरांडा
निबंध : इत्यादि 
संपादन : दलित प्रसंग ० भाषा, बहुभाषिता और हिंदी
इनके अतिरिक्त पश्यंती का संपादन टेलीविज़न के लिए फिल्मों का निर्देशन ० कैनवास पर चित्रांकन भी ।

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