Hanste Nirjhar Dahakti Bhatthi

Vishnu Prabhakar

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170166276

हँसते निर्झर, दहकती भट्ठी
देश-विदेश में, नगरों में और प्रकृति के प्रांगण में जब-जब भी और जहाँ-जहाँ भी मुझे की यात्रा करने का अवसर मिला है, उस सबकी चर्चा मैंने प्रस्तुत पुस्तक में की है । इसमें जानकारी देने का प्रयत्न इतना नहीं है, जितना अनुभूति  का वह चित्र प्रस्तुत करने का है, जो मेरे मन पर अंकित हो गया है । इन अर्थों में ये सब चित्र मेरे अपने है । कहीं मैं कवि हो उठा लगता हूँ, कहीं दार्शनिक, कहीं आलोचक, कहीं मात्र एक दर्शक । मैं जानता हूँ कि हुआ मैं कुछ नहीं हूँ ।  मुझे मात्र दर्शक रहना चाहिए था, लेकिन मन की दुर्बलता कभी-कभी इतनी भारी हो उठती है कि उससे मुक्त होना असंभव हो जाता है । शायद यही किसी लेखक की असफलता है । मेरी भी है । लेकिन एक बात निश्चय ही कही जा सकती है कि इस पुस्तक में विविधता की कमी पाठकों को नहीं मिलेगी । कहीं विहँसते निर्झर, मुस्कराते उद्यान उनका स्वागत करेंगे तो कहीं विगत के खंडहर उनकी ज्ञानपिपासा को शांत करेंगे, कहीं उन्हें भीड के अंतर में झाँकने की दृष्टि मिलेगी तो कहीं नई सभ्यता का संगीत भी वे सुनेंगे। वे पाएंगे कि कहीं वे मेरे साथ कंटकाकीर्ण दुर्गम पथों पर चलते-चलते सुरम्य उद्यानों से पहुँच गए हैं, कहीं विस्तृत जलराशि पर नावों में तैर रहे हैं, कहीं पृथ्वी के नीचे तीव्रगामी रेलों से दौड रहे हैं तो कहीं वायु के पंखों पर सवार होकर विद्युत् और मेघों द्धारा निर्मित तूफान को झेल रहे है । मुझे विश्वास है कि इससे जो अनुभूति उन्हें प्राप्त होगी, वह निरी निराशाजनक ही न होगी ।

—विष्णु प्रभाकर

Vishnu Prabhakar

विष्णु प्रभाकर विष्णु जी का जन्म 21 जून, 1912, को जिला मुजफ्फरनगर (उ०प्र०) के एक गॉव में हुआ था । विष्णु प्रभाकर हिन्दी में नाटक के क्षेत्र में विशिष्ट प्रतिभासंपन्न रचनाकार के रूप में प्रतिष्ठित हैं । बांग्ला उपन्यासकार शरतचन्द्र के जीवन पर 'आवारा मसीहा' के कृतित्व ने विष्णु जी को भारत के महान जीवनीकार के रूप में भी प्रस्तुत किया है । बचपन हिसार (हरियाणा) में गुजरा। वहीं शिक्षा प्राप्त की और सरकारी नौकरी से जिन्दगी की शुरुआत की । कुछ दिन आकाशवाणी में अधिकारी भी रहे । कुछ समय पश्चात नौकरी छोड़ स्वतन्त्र लेखन अपनाया । मौलिक लेखन के अतिरिक्त उन्होंने साठ से अधिक पुस्तकों का संपादन किया । उनकी अनेक पुस्तके पुरस्कृत हैं । पुरस्कार तथा सम्मान : इंटरनेशनल ह्यूमनिस्ट अवार्ड (1975); सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार (1976), राष्ट्रीय एकता पुरस्कार (1980), मूर्तिदेवी पुरस्कार, भारतीय ज्ञानपीठ (1988); शलाका सम्मान, हिन्दी अकादमी, दिल्ली (1988), केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार (1993); पाब्लो नेरूदा सम्मानम्, इण्डियन राइटर्स एसोसिंएशन; विशिष्ट साहित्यकार सम्मान, उ० प्र० हिन्दी संस्थान; शरत् पुरस्कार, बंग साहित्य परिषद्, भागलपुर; सूर पुरस्कार, साहित्य कला परिषद्, तुलसी पुरस्कार, हरियाणा साहित्य अकादमी और संस्थान सम्मान, नागरी प्रचारिणी सभा, प्रयाग एवं अन्य कई पुरस्कार।
 स्मृति-शेष : 11 अप्रैल, 2009

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