Antheen Akash

Vishwanath Prasad Tiwari

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170166849

अंतहीन आकाश
प्रस्तुत पुस्तक में लंदन, मॉरिशस और रूस यात्रा के संस्मरण है । जितने ही मनोरम उतने ही ज्ञानवर्द्धक और गंभीर तथा चिंतनपूर्ण । रचनाकार की सजग और सचेत दृष्टि से बारीक से बारीक चीज भी बच नहीं पाती और उन छोटी-छोटी चीजों की डोर पकड़कर यह सभ्यता और संस्कृति, इतिहास और मनोरचना की अथाह गहराइयों में प्रवेश करता है तथा आग्रहमुक्त होकर उनका संतुलित विश्लेषण करता है । इन संस्मरणों में देखे गए स्थानों का भूगोल, इतिहास, समाज, साहित्य तथा वहाँ के लोगों की आकृति-प्रकृति, संस्कृति और विकृति-सब कुछ मिल जाएगी । लेखक की भाषा उसकी स्पष्ट दृष्टि की तरह ही पारदर्शी है-सहज और सर्जनात्मक । लंदन, मॉरिशस और रूस तीनों स्थानों के संस्मरण अलग-अलग स्वाद देने वाले हैं, मगर इन्हें देखने वाली आँखें भारतीय हैं । बल्कि यह कहा जाए तो ज्यादा उपयुक्त होगा कि एक भारतीय लेखक ही विदेश के परिवेश को इस प्रकार देख सकता है । इस यात्रावृत्त में रूस पर तो विपुल सामग्री है-विशेष रुप से वहाँ के साहित्य और जन-जीवन पर । डॉ० विश्वनाथ प्रसाद तिवारी के इन संस्मरणों में उनकी सहज सवेदनशीलता और प्रखर चिंतन साथ-साथ दिखाई पड़ती है । प्रसिद्ध कवि, आलोचक और 'दस्तावेज' के यशस्वी संपादक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी की यह गद्य-रचना अंतहीन क्षितिज में दिलचस्पी रखने वाले जिज्ञासुओ के लिए अवश्य ही पठनीय है ।

Vishwanath Prasad Tiwari

विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
जन्म : 1940 ई०, कुशीनगर जनपद के एक गांव रायपुर भैंसही-भेडिहारी, (उ०प्र०) ।
पद : गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से आचार्य एवं अध्यक्ष पद से 2001 ई० में अवकाश ग्रहण ।
प्रकाशित पुस्तकें : 'आधुनिक हिंदी कविता', 'समकालीन हिंदी कविता', 'रचना के सरोकार', 'कविता क्या है' , 'गद्य के प्रतिमान', 'आलोचना के हाशिए पर' (आलोचना); 'चीजों को देखकर', 'साथ चलते हुए', बिस्तर दुनिया के लिए', आखर अनंत', 'फिर भी कुछ रह जाएगा' (कविता-संस्मरण); 'आत्म की धरती', 'अंतहीन आकाश' (यात्रा-संस्मरण); 'एक नाव के यात्री' (लेखक के संस्मरण); 'मेरे साक्षात्कार' (साक्षात्कार)।
विदेश यात्राएँ : इंग्लैंड, मॉरिशस, रूस, नेपाल, अमेरिका, नीदरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, लक्जमबर्ग, बेल्जियम, चीन, थाईलैंड ।
पुरस्कार : बिड़ला फाउंडेशन, दिल्ली द्वारा 2010 का 'व्यास' सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 2007 में 'हिंदी गौरव' सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 2000 में 'साहित्य भूषण' सम्मान, भारत मित्र संगठन, मास्को, रूस द्वारा बर्ष 2003 में 'पुश्किन' सम्मान, 'दस्तावेज' पत्रिका को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 1988 और 1995 में 'सरस्वती' सम्मान ।
संपादन : गोरखपुर से 'दस्तावेज' साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका का संपादन । यह पत्रिका रचना और आलोचना को विशिष्ट पत्रिका है, जो 1978 से अब तक नियमित निकल रही है ।
अनुवाद : अनेक देशी-विदेशी भाषाओं में रचनाओं के अनुवाद हुए हैं । रूसी, नेपाली, अंग्रेजी, मलयालम, पंजाबी, मराठी, बंगला, उर्दू आदि में भी रचनाएं अनूदित ।
संप्रति : उपाध्यक्ष, साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली ।

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