Mahan Vibhutiyon Ka Adhura Bachpan

Vinod Kumar Mishra

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 9788189982768

महान् विभूतियों का अधूरा बचपन
विश्व की अनेक महान् विभूतियाँ बचपन में ही गंभीर विकलांगता का शिकार हो गई थीं। विकलांगता अपने साथ शारीरिक कष्ट के अतिरिक्त मनोवैज्ञानिक व सामाजिक दुःख भी लाती है। इन विभूतियों ने विकलांगता का सामना एक सामान्य चुनौती की भाँति किया और समस्त संसार उनकी उपलब्धियों व योगदानों के समक्ष नतमस्तक हो गया।
दूसरी ओर एक आम अच्छा-भला व्यक्ति मामूली समस्याओं से झुँझला जाता है और लक्ष्य पूरा न हो पाने  के लिए परिस्थितियों को अधिक दोष देने का प्रयास करता है।
प्रस्तुत पुस्तक न केवल इन महान् व्यक्तियों का उदाहरण देते हुए आम बच्चों को चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करती है वरन् यह भी बताती है कि किस प्रकार आम बच्चों व विकलांग बच्चों के बीच सम्मानजनक समन्वय होना चाहिए।
वास्तव में विकलांगता बहुत कुछ परिस्थितियों पर निर्भर करती है और यदि परिस्थितियाँ अनुकूल बना दी जाएँ तो विकलांगता का प्रभाव न्यूनतम हो जाता है। अतः यह आवश्यक है कि भौगोलिक परिस्थितियों के साथ-साथ सामाजिक व्यवस्था को भी अनुकूल बनाया जाए ताकि विकलांगजनों व शेष समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो और उनकी अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित हो।

Vinod Kumar Mishra

विनोद कुमार मिश्र
जन्म : 12 जनवरी, 1960 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले  में। साढ़े तीन वर्ष की आयु में पोलियोग्रस्त ।स्कूली शिक्षा राँची में । रुड़की विश्वविद्यालय से 1983 में इलेक्ट्रॉनिक्स व दूरसंचार इंजीनियरिंग में स्नातक । बिजनेस प्रबंध में स्नातकोत्तर उपाधि । संप्रति वरिष्ठ तकनीकी प्रबंधक, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, साहिबाबाद ( भारत सरकार का उद्यम) । समाज-सेवा में प्रारंभ से ही रूचि ।  विकलांग व्यक्तियों के लिए कानून बनवाने हेतु लम्बा संघर्ष।  1994 में सांसद श्री प्रेम के जरिए लोकसभा में विकलांगों के कल्याणार्थ निजी विधेयक पेश कराया । 1993 में भारतीय विकलांग संस्थान द्वारा 'विकलांग भूषण' की उपाधि । 1996 में भारत सरकार द्वारा उत्कृष्ट विकलांग कर्मचारी के रूप में चयन । 3 दिसम्बर, 1996 को राष्ट्रपति पदक मिला । 1984 से कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों के क्षेत्र में कार्य । राष्ट्रीय  दैनिक पत्रों व पत्रिकाओं में नियमित लेखन और दूरदर्शन पर विकलांगों के कार्यक्रम 'साथ-साथ' में नियमित रूप से हिस्सेदारी । अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं से संबद्ध ।
प्रकाशित रचनाएँ :-
०  विकलांगता : समस्याएँ व समाधान
० अपंगता से मुकाबला
० कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइतियाँ : एक आंदोलन 
० भारत में विकलांगों की स्थिति और विकलांग कानून, 1995
० विकलांगता की समस्या और विकलांग कानून, 1995 (ब्रेल में)

आगामी कृतियाँ-
० Disabled Dignitories Of World
० तूफान में जलते दीए

Project Reports-
० Assessing Market Opportunities Of Mobile Communication In India.
० Solar Energy & Its Economic Viability
० Study Of Impact Of Globalisation & Recession In South Asian Countries On Indian Export Market.

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