Sikhon Ka Itihaas (2 Vol.)

Khushwant Singh

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
1,295.00 1166 +


  • Year: 2017

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-908204-4-8

पुस्तक में उस सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि की चर्चा है, जिसके चलते पंद्रहवीं शताब्दी में सिख धर्म अस्तित्व में आया। फारसी, गुरुमुखी और अंग्रेजी के मूल दस्तावेजों पर आधारित अपने विवरणों में लेखक सिखत्व के विकास को चिन्हित करता है और ‘ग्रंथ साहिब’ में इसके पवित्र धर्म-सिद्धांतों के संकलन के बारे में बताता है।
इसमें सिखों के, एक शांतिवादी पंथ से, गुरु गोबिंद सिंह के नेतृत्व में लड़ाकू संप्रदाय ‘खालसा’ में परिवर्तित होने तथा महाराजा रंजीत सिंह द्वारा सिख-शक्ति के समेकन से पहले, मुगलों और अफगानों के साथ उनके संबंधों को विस्तार से वर्णित किया गया है।
खुशवंत सिंह एक मशहूर पत्रकार, कथा-साहित्य की अनेक कृतियों के रचयिता और सिख-इतिहास के विशेषज्ञ हैं। वे ‘इलस्टेªटेड वीकली आॅफ इंडिया’ तथा ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के पूर्व संपादक हैं। 1980 से 1986 तक वे राज्यसभा से सांसद रहे। 1974 में मिली पद्मभूषण की उपाधि उन्होंने भारत सरकार द्वारा अमृतसर के स्वर्ण मंदिर हुई ‘आॅपरेशन ब्लू स्टार’ की कार्रवाई का विरोध करते हुए लौटा दी। वर्ष 2007 में पुनः राष्ट्रपति ने उन्हें पद्मविभूषण की उपाधि से सम्मानित किया।

Khushwant Singh

खुशवंत सिंह
15 अगस्त, 1915 हडाली (अब पाकिस्तान में) में जन्म ।  लाहौर से स्नातक तथा किंग्स कॉलेज, लंदन से एल-एल० बी० ।
1939 से 1947 तक लाहौर हाईकोर्ट में वकालत । विभाजन के बाद भारत की 'राजनयिक सेवा' के अंतर्गत कनाडा में 'इन्फॉर्मेशन अफसर' तथा इंग्लैंड में भारतीय उच्चायुक्त के 'प्रेस अटैची' के पद पर कार्य । कुछ वर्षों तक प्रिंस्टन तथा स्वार्थमोर विश्वविद्यालयों में अध्यापन ।
भारत लौटकर नौ वर्षों तक 'इलस्ट्रेटेड वीकली तथा तीन वर्षों त्तक 'हिन्दुस्तान टाइम्स' का संपादन । 1980 में राज्यसभा के सदस्य मनोनीत ।  1974 में प्राप्त पद्मभूषण की उपाधि वा 'ऑपरेशन ब्लू स्टार ' के विरोधस्वरूप त्याग । 'हिन्दुस्तान टाइम्स', 'वीक' और 'संडे आब्जर्वर' के लिए नियमित स्तंभ लिखे  तथा 'पेंगुइन बुक्स कंपनी इंडिया' के सलाहकार संपादक के रूप में भी कार्य किया।
पैतीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित । प्रमुख हैं : ट्रेन टु पाकिस्तान ० हिस्ट्री  ऑफ सिख्स (दो खंड) ० रंजीत सिंह ०  दिल्ली ० मेरे मित्र : कुरु महिलाएँ कुछ पुरुष ० नेचर वॉच तथा कालीघाट टु कैलकटा । चार कहानी-संग्रहों तथा अनेक लेखमालाओं के अतिरिक्त उर्दू और पंजाबी से कई अनुवाद भी ।
स्मृति-शेष : 20 मार्च, 2014

Scroll