Ath Nadi Katha

Hari Krishna Devsare

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  • Year: 2012

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788189859671

अथ नदी कथा
भारत की नदियों की पवित्रता, ऐतिहासिकता, पौराणिकता और उनके गौरवशाली वरदानों से हम सदियों से जुडे है । आम आदमी के लिए, नदी की यह कथा न केवल रोचक हो सकती है, उसके लिए प्रेरक भी हो सकती है। समय के साथ हमने कितनी ही नदियों की गाथाएँ भुला दी हैं। केवल उँगलियों पर गिने जा सकने वाले नाम ही लोगों को याद हैं। इस पुस्तक में यही प्रयास किया गया है कि भारत को लगभग सभी महत्वपूर्ण? नदियों के सम्मिलित किया जाए। फिर भी क्षेत्रीय महत्त्व की और छोटे यात्रा-पथ वाली नदियों का छूट जाना स्वाभाविक ही है।
इस पुस्तक में सम्मिलित नदियों का यथासंभव पौराणिक माहात्य, उनकी पौराणिक एवं लोक- प्रसिद्ध कथाएँ, उनसे संबद्ध ऋषियों, तपस्वियों की कथाएँ दी गई है । इसी के साथ उनकी उत्पत्ति, की कथाएँ, उद्गम स्थल का भौगोलिक महत्त्व और फिर आगे के यात्रा-पथ का वर्णन है। यात्रा-पथ में नदी के दोनों तटों पर बसे धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं औद्योगिक नगरों के साथ साथ तीर्थों, संगमों, मंदिरों आदि के लोकव्यापी महत्त्व को भी रेखांकित किया गया है। ये सभी विवरण हमारी भावी पीढ़ी, युवा पीढ़ी और प्रौढ़ों-तीनों के लिए समान रूप से महत्त्वपूर्ण हैं।

Hari Krishna Devsare

डॉ.  हरिकृष्ण देवसरे हिंदी के सुपरिचित लेखक हैं। हिंदी बाल-साहित्य पर हिंदी में प्रथम शोध प्रबंध प्रस्तुत कर बाल-साहित्य पर शोध की परंपरा का सूत्रपात करने में डॉ. देवसरे का बाल-साहित्य समीक्षा के क्षेत्र में प्रशंस्य योगदान है। मौलिक लेखक के रूप में डॉ.  देवसरे की बाल-साहित्य संबंधी तीन सौ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने विविध विधाओं में भी पर्याप्त साहित्य लिखा है। ‘खाली हाथ’ (उपन्यास), ‘अगर ठान लीजिए’ (चरित्र-विकास) आदि उनकी कुछ उल्लेखनीय पुस्तकें हैं। उसी क्रम में उनकी ये पुस्तकें हैं--‘अथ नदी कथा’ और ‘पर्वतगाथा’। शोधपरक लेखन डॉ. देवसरे की विशेषता है। मीडिया के लिए भी डॉ. देवसरे की सेवाएँ उल्लेखनीय हैं। लगभग चैबीस वर्ष तक आकाशवाणी में विभिन्न पदों पर कार्य करने के अतिरिक्त आपने दूरदर्शन के लिए दस से अधिक धारावाहिकों, बीस वृत्तचित्रों एवं दस टेलीफिल्मों का लेखन, निर्देशन एवं निर्माण भी किया।
डॉ.  देवसरे कई संस्थाओं से सम्मानित और पुरस्कृत हुए हैं। आपको ‘बच्चों में विज्ञान लोकप्रियकरण’ के लिए राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एक लाख रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने ‘बाल-साहित्य भारती’ पुरस्कार से सम्मानित किया और हिंदी अकादमी, दिल्ली ने ‘साहित्यकार सम्मान’ दिया। आपको पद्मा बिनानी फाउंडेशन की बाल- साहित्य के उन्नयन को समर्पित संस्था ‘वात्सल्य’ द्वारा एक लाख रुपये के ‘प्रथम वात्सल्य पुरस्कार’ द्वारा सम्मानित किया गया। 

स्मृति शेष : 14 नवंबर, 2013

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