Svadeshi Chikitsa Paddhati

Om Prakash Sharma

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  • Year: 2018

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 978-81-88121-54-0

स्वदेशी चिकित्सा-पद्धति
मनुष्य को परमेश्वर की सर्वश्रेष्ट रचना माना गया है । किसी समय वह भी पूर्ण स्वस्थ और सब प्रकार के सुखों से परिपूर्ण रहा होगा, लेकिन आज स्थिति सर्वथा विपरीत है । आज पूरे विश्व में एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं मिलेगा, जिसे कोई कष्ट न हो तथा जो शोक, सन्ताप और चिन्ता से मुक्त हो अथवा निराश न हो । इसका एकमात्र कारण है- प्रकृति की उपेक्षा ।  प्रकृति कभी अन्याय का पक्ष नहीं लेती । जो भी उसके नियमों को भंग करता है, वह उसे दपिडत करती है ।
मनुष्य को हर प्रकार की व्याधि और रोग से मुक्त रहने का अधिकार प्राप्त है; लेकिन इसके लिए उसे प्रकृति के स्वभाव को समझना चाहिए । उसे अपने शरीर के स्वभाव के अनुकूल अपनी दिनचर्या का पालन करना चाहिए । बुहिमान् व्यक्ति वही होता है, जो किसी विपति में फंसने से पहले ही अपना बचाव कर ले । यदि फिर भी असावधानीवश अथवा किसी अन्य कारणवश वह बीमार हो जाये, तो प्रकृति-प्रदत्त पदार्थों के उपयोग से पुन : स्वस्थ व समान्य हो सकता है ।
प्रकृति ने हमारे देश पर ऐसी कृपा की  है कि यहां अनेक प्रकार की उपयोगी ज़डी-बूटियां ( औषधियां) पैदा होती हैं, जो घर-घर में विभिन्न प्रकार से प्रयोग में लायी जाती हैं ।
आज साधारण व्यक्ति डॉक्टरों की ऊंची फीस व महंगी दवाओ का प्रयोग करने में असमर्थता अनुभव कर रहा है तथा अंग्रेजी दवाइयों के दुष्प्रभाव से ग्रसित है। तब स्वदेशी चिकित्सा-पद्धति की उपयोगिता से कौन इनकार कर सकता है ? स्वदेशी चिकित्सा-पद्धति के सहारे आप दैनिक जीवन में काम आने वाली अनेक वस्तुओ से नाना प्रकार के जटिल रोगों की अचूक चिकित्सा कर सकते हैं।
'स्वदेशी चिकित्सा-पद्धति' पुस्तक में प्रत्येक रोग के लिए अनेक अचूक इलाज बताये गये हैं, जिनकी सहायता से साधारण व्यक्ति भी कठिन से कठिन रोगों की चिकित्सा स्वय कर सकता है ।
पुस्तक में रोगों के निदान और चिकित्सा के साथ ही उपयोगी योगासनों व प्राणायाम का भी समावेश किया गया है ।

Om Prakash Sharma

ओमप्रकाश शर्मा
जन्म: 27 नवम्बर, 1932, दिल्ली।
शिक्षा: दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.कॉम. एवं एम.ए. (हिन्दी)।
योगदान: अनेक अंगरेजी पुस्तकों के हिन्दी अनुवाद और कई अन्य हिन्दी पुस्तकों का संकलन एवं सम्पादन।
प्रस्तुति: हस्तरेखाओं पर तीन विश्वप्रसिद्ध पुस्तकों का अनुवाद, जिनके लेखक हैं: सेंट जर्मेन, विलियम बैनहम तथा कीरो ०  एमिल लुडविग की पुस्तक नेपोलियन बोनापार्ट की जीवनी ०  प्रथम अश्वेत दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति नेलसन मैण्डेला की आत्मकथा ‘लांग वाक टु फ्रीडम’ का हिन्दी अनुवाद।
अन्य: उर्दू शायरी में विशेष रुचि तथा कुछ महत्त्वपूर्ण साहित्यिक ग्रंथों का प्रणयन।

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