Madhumeh Evam Chikitsa

Jagnnath Sharma

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 978-81-88118-20-5

सन् 1967 की बात है। उन दिनों मैं अखिल भारतीय संस्थान, नई दिल्ली के मेडीसन विभाग में कार्य कर रहा था। फारमकाॅलाॅजी में एम. डी. करने के पश्चात् मेडीसन में भी एम. डी. करने की योजना थी। उन दिनों रोगियों से बातचीत करने पर लगता था कि दिल्ली के नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी विशेष जानकारी नहीं थी। कारण भी स्पष्ट था। उन दिनों न तो हिंदी में स्वास्थ्य संबंधी पुस्तकें उपलब्ध थीं और न पत्र-पत्रिकाओं से इस प्रकार की जानकारी मिल पाती थी। हां, अंग्रेजी की पत्र-पत्रिकाओं में यदा-कदा लेख छप जाया करते थे। 
अतः मन में निरंतर यह बात खटकती रहती थी कि इस कमी को कैसे दूर किया जाय। संयोगवश उन्हीं दिनों श्री रतनलाल जी जोशी से परिचय हुआ। वे उन दिनों ‘दैनिक हिंदुस्तान’ समाचार-पत्र के प्रधान संपादक थे। बस, उन्हीं से प्रेरणा प्राप्त कर मैंने ‘दैनिक हिंदुस्तान’ समाचार-पत्र में स्वास्थ्य संबंधी लेखन प्रारंभ किया जो आगे चलकर ‘रोगियों के प्रश्नोत्तर’ नाम से स्थायी स्तंभ के रूप में लगभग बीस साल तक चलता रहा।
मेरी ऐसी मान्यता है कि आयुर्विज्ञान संबंधी साहित्य का जब तक हिंदी में मौलिक सृजन नहीं होगा, तब तक इस विज्ञान को जन-मानस से नहीं जोड़ा जा सकता। अनुवादित ग्रंथों से जानकारी तो मिल जाती है, परंतु मौलिकता नहीं आ पाती।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संगठित हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में मैंने सदैव अनुभव किया है कि स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान हिंदी के माध्यम से ही जन-जन तक पहुंचाया जा सकता है।
इसी परिवेश में प्रस्तुत पुस्तक ‘मधुमेह एवं चिकित्सा’ की रचना की गई हे, जिससे लोगों को लाभ होगा, ऐसा विश्वास है।

Jagnnath Sharma


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