Swatantra Bharat Mein Proud Shiksha

Hiralal Bachhotia

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  • Year: 2016

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 978-81-89982-85-0

अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होना और सबसे बढ़कर लोकतंत्र में अपनी भूमिका को समझने में एक पढ़ा-लिखा नागरिक या कम से कम एक साक्षर व्यक्ति ही कामयाब हो सकता है। स्वाधीनता आंदोलन के आयामों में हिंदी प्रचार-प्रसार, स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग, भाईचारा आदि समान निरक्षरता को मिटाना भी एक रचनात्मक कार्यक्रम था। बुनियादी तालीम में कार्यानुभव या करके सीखना पर पर्याप्त जोर दिया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ ही साक्षरता समाज शिक्षा का अभिन्न अंग बन गया।
स्वतंत्र भारत में समाज शिक्षा का विस्तार प्रौढ़ शिक्षा के रूप में हुआ और धीरे-धीरे प्रौढ़ शिक्षा ने एक आंदोलन का रूप ले लिया। इसमें कम से कम कुछ लोगों और समर्पित समूहों के योगदान के साथ पढ़ना सिखाने की परंपरित वर्णमाला पद्धति के स्थान पर नई वैज्ञानिक पद्धति—चित्रा-वर्ण-विधि का अनुसरण कर कम समय में साक्षर बनाने का विकल्प सर्वाधिक सफल रहा और पढ़ना-लिखना सीखने-सिखाने की क्रिया को रोचक गतिविधि बनाने का प्रयत्न किया गया। दुनिया के अन्य देशों में आंदोलन के रूप में ही निरक्षरता पर चोट की गई। क्यूबा आदि के उदाहरणों से हम परिचित ही हैं—भारत में भी कमोबेश यही वातावरण निर्मित हुआ और निरक्षरता से निपटने के अनेक आयाम उद्घाटित हुए। देश में एक सकारात्मक वातावरण बना। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय की 14 प्रतिशत साक्षरता केरल में तो शत-प्रतिशत ही हो गई। यह एक लंबी लड़ाई का परिणाम है जिसमें योजनाब; तरीके से आलोचनाओं के बावजूद उत्तरोत्तर उपलब्धियां प्राप्त करने में सफलता मिली। अब सभी जान गए हैं कि विकास सुफल प्राप्त करने, योजनाओं का लाभ लेने में साक्षरता का योगदान कितना जरूरी है। कमोबेश यही स्वतंत्र भारत में प्रौढ़ शिक्षा की उपलब्धता की कहानी है। इसका एक पहलू यह भी रहा कि आम आदमी साक्षरता के सहारे कुछ तो आगे बढ़ा और अपनी मंजिल को पहचान सका।

Hiralal Bachhotia

हीरालाल बाछोतिया
प्रकाशित कृतियाँ :- अभी भी, जनहित और अन्य कविताएं, (कविता); विद्रोहिणी शबरी (मिथक काव्य); एक और मीनाक्षी, कस्तूरी गंध, नेकी की राह, आँगन का पेड़, फल हमारा है (उपन्यास); नहीं रुकती है नदी, भारत से बाहर भारत (यात्रा-यायावरी); हिंदी शिक्षण : संकल्पना और प्रयोग, राजभाषा हिंदी और उसका विकास, प्रौढ शिक्षा : संकल्पना और प्रयोग, हिदीं भाषा : प्रकृति, प्रयोग और शिक्षण (भाषा; भाषिकी); निराला साहित्य का अनुशीलन, आकाशधर्मी आचार्य : पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी (प्र. हिंदी अकादमी, दिल्ली); हिंदी की अन्य गद्य विधाएँ (प्र. हिंदी अकादमी, दिल्ली), सतपुडा के स्वर, अस्मिता (काव्य-संकलन), अनुस्वा (साहित्यिक त्रैमासिकी) (संपादन) ।

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