Bhartiya Naari Aur Pashchimikaran

Shanti Kumar Syal

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 9788189982959

भारतीय नारी और पश्चिमीकरण 
पश्चिम की उपभोक्तावादी संस्कृति और सभ्यता के दुष्प्रभाव ने भारतीय समाज में नारी समाज के यथार्थ को बदल दिया है। पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित नारी स्वयं वंदनीय न मानकर स्वयं को पुरुषों के समान बनने के लिए आंदोलनरत है। सदियों से पीडित नारी का सब्र का बांध टूट गया है। प्राचीन परंपराओं की पकड़ से बाहर आ गई है। अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही है। आज की शिक्षित नारी अत्याचार के विरोध में बलपूर्वक खड़ी हो रही है। आधुनिक माहौल में तमाम लड़कियां घर की देहरी लांघकर स्वावलंबी हो रही है । आधुनिक भारतीय नारी अन्याय और अत्याचार को चुपचाप नहीं सहती, बल्कि उसका प्रतिकार कर समाज  में अपने लिए अलग जगह बनाती है। आज की नारी स्वतंत्रता चाहती है। वह पुरुष की अधीनता में रहना नहीं चाहती। वह पुरे प्राणवेग के साथ जाग उठी है।
पश्चिमीकरण से नारी की दुनिया बदल रही है । उसके सपने, उसकी इच्छाएं, आकाक्षाएं, उसके जीने और सोचने का ढंग बदल रहा है। वह अब जानने लगी है कि अपने सपनों को कैसे पूरा किया जा सकता है । अब वह अपनी तरह अपनी शर्तों पर जीना चाहती है। वर्तमान युग में शिक्षित एवं अशिक्षित नारियां अकेलेपन की शिकार होने लगी हैं। यह समस्या आधुनिक युग की देन है। नारी घर की चारदीवारी को लांघकर पुरुषों से बराबरी करने, नौकरी करने निकली है किन्तु वह अपनी लज्जा, संस्कृति, सदाचारिता को पीछे छोड़ आई है। इस नारी स्वतंत्रयुग की नारियां पश्चिमी दौड़ में दौड़ती हुई, अपनी संस्कृति की मान-मर्यादा को पीछे छोड़ती हुई कहीं अंधकारमय युग में खो न जाएं... ।

Shanti Kumar Syal

शान्ति कुमार स्याल
जन्म : अक्तूबर, 1953, गांव पंडोगा, जिला ऊना, (हिमाचल प्रदेश)
कृतियां : गौरवशाली भारतीय वीरांगनाएं, महिलाओँ के कानूनी- धार्मिक-सामाजिक अधिकार, प्रगतिशील नारी, नारी अधिकार, नारीत्व, नारी-मुक्ति संग्राम, नारी सौंदर्य, नारी शोषण और उनसे बचाव, कामकाजी महिलाओं की समस्याओ और समाधान, स्वतंत्रता संग्राम की क्रांतिकारी छात्राएं, नारी बनाम नारी, पुरुष बनाम नारी, आदर्श रूप में नारी, नारी हिंसा : एक अभिशाप, नारी अपराध : समस्याएं और समाधान, भारतीय नारी और पश्चिमीकरण (नारी विमर्श); देवधाम हिमाचल, देवमाला का हिमाचल, विनय हमारी सुन लीजिए (संस्कृति); बुनियादी  पत्रकारिता (पत्रकारिता); हास्य लहरी (हास्य); प्रयोजनमूलक मानक हिन्दी, राजभाषा हिंदी और उसका स्वरूप, भाषा, समाज और संस्कृति (भाषा); अमर कथा, प्रकाश और रंगों की दुनिया, आहार और स्वास्थ्य, सौर ऊर्जा के उपयोग, आजाद हिन्द फौज के गीत (दो भाग), स्वस्थ जैसे रहें, क्रान्तिकारी छात्राएं (दो भाग) ( बाल-साहित्य ) ।

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