Nimaadi Lokokti Kosh

Dr. Manjula Joshi

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  • Year: 2008

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 978-81-89982-11-9

निमाड़ी लोकसाहित्य में लोकोक्तियों का श्रेष्ठतम स्थान है। ये संपन्न वाचिक परंपरा की परिचायक हैं। इनमें ‘गागर में सागर’ भरने की अद्भुत क्षमता है। इन कहावतों का जन्म कब कहां और कैसे हुआ, इसके संबंध में प्रामाणिक रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता। ऐसी लोकमान्यता है कि लोक मनीषा की कोख से लोकोक्तियों का जन्म हुआ। निमाड़ी जनमानस उठते-बैठते अहर्निश बात-बात पर ‘सूत्र-वाक्य’ के रूप में इन कहावतों का प्रयोग करता है। जिसे पढ़कर, सुनकर, गुनकर अच्छे-अच्छे ‘एजुकेटेड’ की बुद्धि चकरा जाती है। सीधे-सादे, भोले-भाले, सच्चे, सरल, माटी से जुड़े अनपढ़ या कम पढ़े लिखे लोगों का जीवनानुभव से जुड़ा सच, अभिव्यकित का पैनापन, अकाट्य तर्क प्रस्तुत करता है, सौ टंच (खरा सोना) है जिसे चुनौती देने का साहस हम में नहीं है।

Dr. Manjula Joshi

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