Sant Naamdev

Hari Krishna Devsare

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  • Year: 2015

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Vandana Book Agency

  • ISBN No: 978-81-89424-70-1

नामदेव महाराष्ट्र के संतों में सबसे वरिष्ठ थे। मराठी भाषा में ‘अभंग’ नामक छंद में रचना करने वाले प्रथम संत कवि नामदेव ही थे। उनका कार्यक्षेत्र केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं था। उन्होंने अपनी भक्ति-रचनाओं ‘अभंगों’ के द्वारा उत्तर भारत में पंजाब तक भक्ति-मार्ग का प्रचार किया। माधव गोपाल देशमुख लिखते हैं ‘‘नामदेव एक सामासिक शब्द है और उसका अर्थ है नाम ही देव है।’’ संत नामदेव ने अपनी संपूर्ण रचना में नाम ही महिमा जितने ढंग से और जैसे वर्णन की है, वह शायद ही किसी और संत ने की हो-
नाम में ही नारायण है। वह भक्तों के अधीन है।
भक्ति न मांगकर। नाम में ही चारों मक्ति हैं।
नाम न भूलो। वही स्वर्ग में निशान है।
नामा कहते हैं ऐसे प्राणी। नारायण में जाकर समान हो जाते हैं।

जो वाणी से नाम लेता है, उसे यमदेव वंदन करते हैं।
कालादिक उसे समान रूप से वंदन करते हैं।
ऐसा नाम श्रेष्ठ है सबमें वरिष्ठ है।
(नाम के) अच्छे उच्चारण से स्वर्ग गूंजता है।
उस नाम-महिमा का वर्णन ब्रह्मा करने गए।
उन्हें आदि-अंत की उपमा ही नहीं सूझी
नामा कहता है कि पाठ से, नामा की ही राह से 
प्रत्यय प्रकट होता है विट्ठल हरि।।

—इसी पुस्तक से

Hari Krishna Devsare

डॉ.  हरिकृष्ण देवसरे हिंदी के सुपरिचित लेखक हैं। हिंदी बाल-साहित्य पर हिंदी में प्रथम शोध प्रबंध प्रस्तुत कर बाल-साहित्य पर शोध की परंपरा का सूत्रपात करने में डॉ. देवसरे का बाल-साहित्य समीक्षा के क्षेत्र में प्रशंस्य योगदान है। मौलिक लेखक के रूप में डॉ.  देवसरे की बाल-साहित्य संबंधी तीन सौ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने विविध विधाओं में भी पर्याप्त साहित्य लिखा है। ‘खाली हाथ’ (उपन्यास), ‘अगर ठान लीजिए’ (चरित्र-विकास) आदि उनकी कुछ उल्लेखनीय पुस्तकें हैं। उसी क्रम में उनकी ये पुस्तकें हैं--‘अथ नदी कथा’ और ‘पर्वतगाथा’। शोधपरक लेखन डॉ. देवसरे की विशेषता है। मीडिया के लिए भी डॉ. देवसरे की सेवाएँ उल्लेखनीय हैं। लगभग चैबीस वर्ष तक आकाशवाणी में विभिन्न पदों पर कार्य करने के अतिरिक्त आपने दूरदर्शन के लिए दस से अधिक धारावाहिकों, बीस वृत्तचित्रों एवं दस टेलीफिल्मों का लेखन, निर्देशन एवं निर्माण भी किया।
डॉ.  देवसरे कई संस्थाओं से सम्मानित और पुरस्कृत हुए हैं। आपको ‘बच्चों में विज्ञान लोकप्रियकरण’ के लिए राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एक लाख रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने ‘बाल-साहित्य भारती’ पुरस्कार से सम्मानित किया और हिंदी अकादमी, दिल्ली ने ‘साहित्यकार सम्मान’ दिया। आपको पद्मा बिनानी फाउंडेशन की बाल- साहित्य के उन्नयन को समर्पित संस्था ‘वात्सल्य’ द्वारा एक लाख रुपये के ‘प्रथम वात्सल्य पुरस्कार’ द्वारा सम्मानित किया गया। 

स्मृति शेष : 14 नवंबर, 2013

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