Geeton Ki Aankhmicholi

Sher Jung Garg

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  • Year: 2006

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Amarsatya Prakashan

  • ISBN No: 978-81-88466-12-2

Sher Jung Garg

शेरजंग गर्ग
जन्म: 29 मई, 1937, देहरादून (उत्तराखंड)
शिक्षा: एम० ए०, पी-एच० डी० । पिछले लगभग पैंतालीस वर्षों से पत्रकारिता, साहित्यिक लेखन, प्रसारण, प्रबंधन एवं प्रशासन के विविध क्षेत्रों में कार्य । 
प्रकाशित कृतियाँ: ‘चंद ताज़ा गुलाब तेरे नाम’, ‘क्या हो गया कबीरों को’ (कविताएँ), ‘स्वातंत्रयोत्तर हिंदी कविता में व्यंग्य’, ‘व्यंग्य के मूलभूत प्रश्न’ (आलोचना), ‘बाज़ार से गुज़रा हूँ’, ‘दौरा अंतर्यामी का’ (व्यंग्य), ‘सुमन बाल गीत’, ‘अक्षर गीत’, ‘नटखट गीत’, ‘गुलाबों की बस्ती’, ‘शरारत का मौसम’, ‘पक्षी उड़ते फुर-फुर’, ‘पशु चलते हैं धरती पर’, ‘गीतों के इंद्रधनुष’, ‘गीतों के रसगुल्ले’, ‘यदि पेड़ों पर उगते पैसे’, ‘गीतों की आँखमिचैली’, ‘नटखट पप्पू का संसार’ (श्री ब्रह्मदेव के साथ), ‘भालू की हड़ताल’, ‘सिंग बर्ड सिंग’ (बाल-साहित्य), ‘चहक भी ज़रूरी: महक भी ज़रूरी’ (सुश्री प्रभाकिरण जैन के साथ), ‘ग़ज़लें ही ग़ज़लें’, ‘नया ज़माना नई ग़ज़लें’, ‘मुक्तक एवं रुबाइयाँ’, ‘ग़ज़लें रंगारंग’, ‘कवियों की शायरी’, ‘बीरबल ही बीरबल’ (संपादित), ‘हिंदी कार्यकुशलता’, गोपाल कृष्ण कौल द्वारा संपादित ‘ग़ज़ल सप्तक’ में एक कवि। लोकप्रिय गीतकारों, यथा दुष्यंत कुमार, गोपालदास नीरज, वीरेंद्र मिश्र, गिरिजा कुमार माथुर आदि के संकलनों एवं ‘हिंदी ग़ज़ल शतक’ शृंखला का संपादन।
 हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा साहित्यकार सम्मान एवं श्रेष्ठ बाल-साहित्य के लिए दो बार पुरस्क्रित। प्रथम 'गोपालप्रसाद व्यास व्यंग्यश्री पुरस्कार' से सम्मानित । 
'काका हाथरसी हास्य रत्न सम्मान' से अलनक्रित। 
पूर्व निदेशक, हिंदी भवन, नई दिल्ली ।

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