Yathartha Se Samvad

B.L. Gaur

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  • Year: 2014

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-83233-43-4

बेख़ौफ अंगारे
साहित्य को अब रास नहीं आता निरा रस 
उससे भी ज़रूरी है कलमकार में साहस 
ये काम अदब का है–अदब करना सिखाए 
उनको जो बनाए हैं हरिक काम को सरकस
दम घुट रहा अवाम का, फनकार बचा लो
सब मूल्य तिरोहित हुए, दो-चार बचा लो
सच्चे की शुबां पर हैं जहां शुल्म के ताले
हर ओर लगा झूठ का दरबार, बचा लो
संपादकीय ऐसे हैं ऐ दोस्त, तुम्हारे
जैसे अंधेरी रात में दो-चार सितारे
गुणगान में सत्ता के जहां रत हैं सुखनवर
तुम ढाल रहे शब्द में बेख़ौफ अंगारे
मैं ख़ुश हूं बड़े यत्न से धन, तुमने कमाया
उससे भी अधिक ख़ुश हूं कि फन तुमने कमाया
मेरी ये दुआ है कि सलामत रहो बरसों
सदियों रहे ज़िंदा जो सृजन तुमने कमाया।
—बालस्वरूप राही

B.L. Gaur

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