Tab Aur Ab

Alok Mehta

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788189859459

तब और अब
अखबार  के बारे  में सामान्यत यह धारणा होती है कि सुबह होने के दो घंटे बाद उसकी उपयोगिता नहीं रहती । खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के युग से छपे हुए शब्दों के महत्त्व पर भी सवाल उठने लगे हैं। लेकिन इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाए तो पता चलेगा कि छपे हुए शब्दों से हर दिन इतिहास का एक नया पन्ना बनता है । राजाओं के दरबार रहे हो या ब्रिटिश शासन अथवा आजादी के बाद बनी लोकतांत्रिक सरकारों ने पिछले 60 वर्षों से राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक बदलाव पर विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करके रखा होगा । फिर भी ऐसी हजारों घटनाएं, तथ्य, अंतर्कथाएँ हैं, जो किसी सरकारी या गैरसरकारी दस्तावेजो से नहीं मिलेगी । इंटरनेट तो हाल के वर्षों में आया है और उसमें हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं के अखबारों या पत्रिकाओं में प्रकाशित महत्त्वपूर्ण बाते उपलब्ध नहीं होगी। 
इस पुस्तक की टिप्पणियों तात्कातिक परिस्थितियों से प्रभावित रही हैं और आज के संदर्भ में संभव है, उन पर दूसरे ढंग से सोचने की स्थिति बनती है। तब भी पुरानी घटनाएँ और परिस्थितियाँ नई सुबह के लिए सबक देती हैं । इस पुस्तक की अधिकांश टिप्पणियाँ नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तानम दैनिक भास्कर और आउटलुक साप्ताहिक में रहते हुए लिखी गई हैं और कुछ टिप्पणियाँ संपादकीय रूप में होने के कारण संक्षिप्त हैं । इस दृष्टी से यह अपने पत्रकारीय कास का लेखा- जोखा भी है और पाठको के लिए अधिक उपयोगी संदर्भ सामग्री भी ।

Alok Mehta

आलोक मेहता
जन्म : 7 सितंबर, 1952, उज्जैन (म०प्र०)
कार्यक्षेत्र : विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं ने लगभग 37 वर्षों से सेवा । नई दुनिया, हिंदुस्तान समाचार, साप्ताहिक हिंदुस्तान, दिनमान में राजनीतिक संवाददाता रहे । फिर "वायस ऑफ जर्मनी, कोलोन', नवभारत टाइम्स, दैनिक हिंदुस्तान तथा दैनिक भास्कर में संपादक के रूप में दायित्व निभाया। 
संप्रति : आउटलुक साप्ताहिक के संपादक ।
 एडीटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष । भारतीय प्रेस परिषद के पूर्व सदस्य ।
रेडियों तथा टी०वी० चैनलों पर नियमित रूप से कार्यक्रमों का प्रसारण ।
दुनिया के 35 से अधिक देशों की यात्राएँ की ।
प्रमुख पुस्तकें : पत्रकारिता की लक्ष्मणरेखा, चिडिया फिर नहीं चहकी (कहानी-संग्रह), भारत से पत्रकारिता, राइन के किनारे, स्मृतियां ही स्मृतियां, राव के बाद कौन, आस्था का आँगन, सिंहासन का न्याय, अफगानिस्तान : बदलते चेहरे इत्यादि ।
सम्मान-पुरस्कार : माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय का पहला गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का पत्रकारिता भूषण पुरस्कार, भारत सरकार का भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार, हिंदी अकादमी का साहित्यकार-पत्रकार सामान, इंदिरा  प्रियदर्शिनी पुरस्कार, राष्ट्रीय तुलसी सामान, राष्ट्रीय  सद्भावना पुरस्कार ।

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