Taaki Desh Mein Namak Rahe

Asghar Wajahat

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  • Year: 2014

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-83233-92-2

ताकि देश में नमक रहे पुस्तक में कुल 42 लेख संकलित हैं, जिन्हें दो खंडों में विभाजित किया गया है। पहले खंड के अंतर्गत साहित्यिक लेख हैं, जब कि दूसरे खंड में सामाजिक-सांस्कृतिक लेख संकलित हैं। साहित्यिक लेखों में सिर्फ साहित्यिक विधाओं या सरोकारों की ही बात नहीं की गई है बल्कि कई ऐसी साहित्यिक विभूतियों पर भी लेखक ने पूरी आत्मीयता से लिखा है, जिन्होंने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया। मुज़फ्फर अली के साथ बिताए ख़ूबसूरत दिन हों या बेगम अख़्तर, शैलेन्द्र और शहरयार के लिए मन में मौजूद दीवानगी का अहसास, प्रमोद जोशी और ब्रजेश्वर मदान जैसे अपनी तरह की विशिष्ट-सामान्य शख़्सियतों की बातें हों या कुर्रतुलऐन हैदर और मंटो जैसे अपने पूर्ववर्ती रचनाकारों के प्रति आदर-भाव प्रकट करना हो, हर लेख में असग़र वजाहत कुछ न कुछ ऐसा ज़रूर दे जाते हैं जिसे पाठक अपने मन से कभी विस्मृत नहीं कर सकता। 
पुस्तक के दूसरे खंड में संकलित लेख हालांकि सामाजिक-सांस्कृतिक सरोकारों से जुड़े हैं लेकिन उनका वैचारिक धरातल अत्यंत विस्तृत है। इनमें भाषा से जुडे़ सवाल, सिनेमा और साहित्य के अंतर्संबंध, आने वाले समय में हिंदी सिनेमा की दशा-दिशा का आकलन, भारतीय गणतंत्र से जुड़े दशकों पुराने अनुत्तरित सवाल और लगातार छीजते जा रहे सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति गहन चिंताएं मौजूद हैं। असग़र वजाहत इन लेखों के जरिए वर्तमान समय के जटिल सवालों को न केवल उभारते हैं बल्कि उनसे मुठभेड़ कर उनकी तहों में जाकर कारण भी तलाशते हैं। 
इन विविध लेखों को क्रमिक रूप से पढ़ने पर हम अतीत से शुरू कर वर्तमान को पार करते हुए भविष्य के संभावित सवालों से भी रूबरू हो सकते हैं। यह असग़र वजाहत के लेखन की कलात्मकता ही है कि वह छोटे तथा मामूली से दिखने वाले मुद्दे या सवाल से अपनी बात शुरू कर उसे पूरे समाज और व्यवस्था के लिए एक ज़रूरी सवाल का स्वरूप प्रदान कर देते हैं।
भूमिका से 

Asghar Wajahat

असग़र वजाहत
असग़र वजाहत के अब तक पाँच उपन्यास, छह नाटक, पाँच कथा-संग्रह, एक नुक्कड़ नाटक-संग्रह और एक आलोचनात्मक पुस्तक प्रकाशित हो चुके हैं। वर्ष 2007 में ‘आउटलुक’ हिंदी साप्ताहिक पत्रिका ने उन्हें दस सर्वश्रेष्ठ लेखकों में शुमार किया था। उनकी कृतियों का अनुवाद अनेक भारतीय और विदेशी भाषाओं में हो चुका है। अंग्रेज़ी भाषा में अनूदित उनका कहानी-संग्रह ‘लाइज़: हाफ टोल्ड’ प्रकाशित हो चुका है। अंग्रेज़ी के अतिरिक्त उनकी रचनाओं के अनुवाद इतालवी, जर्मन, रूसी और हंगेरियन भाषाओं में हो चुके हैं।
वर्ष 2007 में बीबीसी हिंदी डॉट कॉम में वे अतिथि संपादक भी रहे। प्रसिद्ध हिंदी पत्रिकाओं ‘हंस’ (भारतीय मुसलमानः वर्तमान और भविष्य-विशेषांक) और ‘वर्तमान साहित्य’ (प्रवासी साहित्य-विशेषांक) का अतिथि संपादन किया।
वे पिछले तीस वर्षों से हिंदी फिल्मों के लिए पटकथाएँ भी लिख रहे हैं। उन्होंने मुजफ्फर अली की चर्चित फिल्म ‘आगमन’ की पटकथा लिखी थी। आजकल वे प्रख्यात फिल्म निर्देशक राजकुमार संतोषी के लिए भी एक पटकथा पर काम कर रहे हैं, जो उनके नाटक ‘जिस लाहौर नहीं देख्या...’ पर आधरित है।
इसके अलावा उन्होंने कुछ वृत्तचित्रों का भी निर्माण किया है, जिसमें 1984 में उर्दू ग़ज़लों के विकास पर बनाई गई डॉक्यूमेंट्री भी शामिल है।
असग़र वजाहत को हाउस ऑफ लॉडर्स में उनके उपन्यास ‘कैसी आगी लगाई’ के लिए कथा यू० के० सम्मान से भी नवाज़ा जा चुका है।

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