Satta Ke Nagaare

Alok Mehta

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-89859-94-7

लोकतंत्र में राजनीति हर ताले की चाबी मानी जाती है। राजनीति का जितना ज्ञान महानगरों में रहने वाले विश्लेषकों, कंप्यूटर पर आंकड़ों की जोड़-तोड़कर चुनावी भविष्यवाणी करने वालों, अर्थशास्त्रियों, राजनयिकों या प्रकाड पत्रकारों को होता है, उससे अच्छी व्यावहारिक समझ सुदूर गांवों में रहने वाले गरीब पिछड़े-अर्द्धशिक्षित भलेमानुष की होती है। गांव की पंचायतों में राजनीति चैपड़ की पकड़ अधिक अच्छी होती है। उन्हें मालूम है कि सत्ता के नगाड़े कब और क्यों बजते हैं। सत्ता के अनंत विस्तार को मरुस्थल भी कहा जा सकता है और अथाह सागर भी। राम राज्य रहा हो या महाभारत काल, ब्रिटिश राज रहे या अमेरिका से अभिभूत रहने वाली सत्ता-व्यवस्था राजनीति का लावा कभी ठंडा नहीं होगा।
पत्रकारिता का दायित्व यही है कि अपने पाठकों को हर समय राजनीति के अमृत और विषय का सही आकलन करके बाता रहे। पिछले वर्षो के दौरान इस कड़वे सच को पेश करते रहने से जहां पाठकों का अधिकाधिक स्नेह और समर्थन मिला, वहीं कई राजनीतिज्ञ नाराज भी होते रहे। लेकिन हमारा कर्तव्य समाज और सत्ता की पहरेदारी करना है। इसलिए किसी की खुशी या किसी की नाराजगी की चिंता नहीं कर सकते। सत्ता के नगाड़े इस तरह बजने चाहिए, जिससे लोकतांत्रिक समाज जागता रहे और अच्छे पके हुए फल उसे मिलते रहें। इस संकलन में पिछले वर्षो के दोरान सत्ता के इर्द-गिर्द चलते रहे घटनाचक्रों पर लिखी गई टिप्पणियां शामिल हैं। एक तरह से यह इतिहास के कुछ पन्नों को संजोकर रखने का प्रयास मात्र है। आज ऐसी टिप्पणियों पर चाहे जैसी खट्ठी-मीठी प्रतिक्रियाएं हों, राजनीति के दूरगामी परिणाम समझाने वालों के लिए ये सदैव उपयोगी साबित हो सकती है। 

Alok Mehta

आलोक मेहता
जन्म : 7 सितंबर, 1952, उज्जैन (म०प्र०)
कार्यक्षेत्र : विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं ने लगभग 37 वर्षों से सेवा । नई दुनिया, हिंदुस्तान समाचार, साप्ताहिक हिंदुस्तान, दिनमान में राजनीतिक संवाददाता रहे । फिर "वायस ऑफ जर्मनी, कोलोन', नवभारत टाइम्स, दैनिक हिंदुस्तान तथा दैनिक भास्कर में संपादक के रूप में दायित्व निभाया। 
संप्रति : आउटलुक साप्ताहिक के संपादक ।
 एडीटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष । भारतीय प्रेस परिषद के पूर्व सदस्य ।
रेडियों तथा टी०वी० चैनलों पर नियमित रूप से कार्यक्रमों का प्रसारण ।
दुनिया के 35 से अधिक देशों की यात्राएँ की ।
प्रमुख पुस्तकें : पत्रकारिता की लक्ष्मणरेखा, चिडिया फिर नहीं चहकी (कहानी-संग्रह), भारत से पत्रकारिता, राइन के किनारे, स्मृतियां ही स्मृतियां, राव के बाद कौन, आस्था का आँगन, सिंहासन का न्याय, अफगानिस्तान : बदलते चेहरे इत्यादि ।
सम्मान-पुरस्कार : माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय का पहला गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का पत्रकारिता भूषण पुरस्कार, भारत सरकार का भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार, हिंदी अकादमी का साहित्यकार-पत्रकार सामान, इंदिरा  प्रियदर्शिनी पुरस्कार, राष्ट्रीय तुलसी सामान, राष्ट्रीय  सद्भावना पुरस्कार ।

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