Bhartiya Sahitya Par Mahabharat Ka Prabhav

Dr. Chandrakant Bandiwadekar

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  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 9788189982232

भारतीय साहित्य पर महाभारत का प्रभाव
‘रामायण’ और ‘महाभारत’ भारतीय सभ्यता और संस्कृति के मूलाधार हैं। जीवन के आदर्श और यथार्थ का इतना व्यापक और विश्वसनीय अनुभव विश्व में अन्यत्र असंभव है। इनमें जहाँ पूर्ववर्ती गतिशील मनीषा का अक्षय कोष है, वहीं पर परवर्ती चिंतन-सरणियों को प्रेरित और प्रभावित करने की विलक्षण क्षमता है। 
‘महाभारत’ के संबंध में कहा जाता है--"जो महाभारत में नहीं है, वह भारत में भी नहीं है।" अर्थात् भारतीय सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, आध्यात्मिक आदि विशेषताओं का सर्वस्व ‘महाभारत’ में विद्यमान है। लोककथाओं से लेकर शिष्ट साहित्य की विविध विधाओं तक ‘महाभारत’ के जीवंत प्रतिबिंब को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। 
‘गीता’ के आध्यात्मिक चिंतन से लेकर विभिन्न सामाजिक घटनाओं और पात्रों से सभी भारतीय भाषाओं के साहित्य ने अपना उपजीव्य ग्रहण किया है। मिथकीय संभावनाओं की व्यापकता के कारण भारतीय साहित्य की विभिन्न विधाओं में युगबोधी संवेदना को अभिव्यक्त करने के लिए प्रभूत लेखन किया गया है।
‘महाभारत’ पर आधारित विभिन्न भारतीय भाषाओं के साहित्य को जाँचने-परखने पर यह रोचक तथ्य सामने आता है कि इस विपुल लेखन में भौगोलिक अंतराल और भाषा-भेद के होने पर भी हमारी चिंतन धारा में अद्भुत समता है। यह हमारी सांस्कृतिक एकता और भावात्मक अखंडता का प्रमाण है।

Dr. Chandrakant Bandiwadekar

चंद्रक्रांत बांदिवडेकर
वरिष्ठ आलोचक
नाम: चंद्रकांत महादेव बांदिवडेकर
जन्मतिथि: 4 नवंबर, 1932
शैक्षणिक अर्हताएँ: बी० ए०, पुणे विश्वविद्यालय, 1954 (मराठी/संस्कृत)  ०  एम.ए., मुंबई विश्वविद्यालय, 1956 (हिंदी/संस्कृत) ० पी-एच.डी., मुंबई विश्वविद्यालय, 1964 (हिंदी और मराठी के सामाजिक उपन्यासों का तुलनात्मक अध्ययन: 1920-1947)
पद: अवकाशप्राप्त प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, मुंबई विश्वविद्यालय (1988-92) ० अवकाश- प्राप्त टैगोर प्रोफेसर आफ कंपेरेटिव लिटरेचर, मुंबई विश्वविद्यालय (1984-88) ० ऐमेरिटस फेलो, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन, दिल्ली (1993-95)
प्रकाशित लेखन: हिंदी में समीक्षात्मक मौलिक ग्रंथ--बारह ० मराठी में--समीक्षात्मक मौलिक ग्रंथ--छह ० हिंदी/मराठी में संपादित ग्रंथ--ग्यारह ० हिंदी/मराठी में अनूदित ग्रंथ--सात ० 250 से अधिक आलेख प्रतिष्ठित हिंदी/मराठी पत्रिकाओं में प्रकाशित ० पचास से अधिक राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय परिसंवादों में आलेखवाचन एवं सहभाग ० बीस ग्रंथों में प्रकाशित लेख ० पंद्रह ग्रंथों की प्रस्तावनाएँ।
पुरस्कार/सम्मान: महाराष्ट्र साहित्य परिषद पुरस्कार, पंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार, अखिल भारतीय हिंदी संस्थान, लखनऊ की ओर से ‘साहित्य भूषण पुरस्कार’ आदि अनेक पुरस्कारों से सम्मानित।

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