Bharat : Tab Se Ab Tak

Bhagwan Singh

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  • Year: 2016

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-89859-05-3

भगवान सिंह ने कविता, कहानी, व्यंग्य, आलोचना, उपन्यास, भाषा-समस्या जिस भी विषय पर लिखा है, उसमें उनका एक नया तेवर रहा है। उनका एक उपन्यास तो हिंदी के सबसे चर्चित और विवादित उपन्यासों में आता है। परंतु इतिहास पर उनका लेखन जितना विचारोत्तेजक और क्रांतिकारी माना गया है, उसकी तुलना उनके अन्य किसी विधा में किए गए लेखन से नहीं की जा सकती। व्यावसायिक इतिहासकार न होते हुए भी उन्होंने प्राचीन इतिहास की जड़ीभूत मान्यताओं को खंडित करते हुए इसकी गहनता, व्याप्ति और दिशा सभी को बदला है और इतिहासकारों, पुरातत्त्वविदों और मनस्वी पाठकों के बीच उसका स्वागत हुआ है।
प्रस्तुत संग्रह में भी इतिहास पर लिखे गए उनके कुछ ऐसे लेख हैं, जिन्होंने पाठकों और श्रोताओं को उद्वेलित और प्रेरित किया है और उनको पुनर्विचार के लिए बाध्य किया है। साथ ही कुछ ऐसे नए लेख भी हैं, जो इससे पहले कहीं प्रकाशित नहीं हुए हैं। इनके कारण निबंधों का समग्र फलक बहुत व्यापक हो गया है। जहां कुछ लेखक एक ऐसे अतीत में ले जाते हैं, जहां प्रकाश की कोई अन्य किरण आज तक पहुंच नहीं पाई थी और जिससे आज के दस-बीस हजार या इससे भी पहले की मानसिक ऊहापोह पर हलका और कुछ रंगीनी-भरा प्रकाश पड़ता है, वहीं ऐसे लेख भी हैं, जो ठीक आज की समस्याओं या वर्तमान के अतीत और वर्तमान दोनों की, तीखी पड़ताल करते हैं।

Bhagwan Singh

भगवान सिंह
जन्म: 1 जुलाई, 1931, गगहा, गोरखपुर, किसान परिवार।
शिक्षा: एम.ए. हिंदी, गोरखपुर।
कृतियां: काले उजले पीले, 1964 (उपन्यास) ०  अपने समानान्तर, 1970 (कविता-संग्रह) ०  महाभिषग, 1973 (उपन्यास) ०  आर्य-द्रविड़ भाषाओं की मूलभूत एकता, 1973 (भाषाशास्त्रा) ०  हड़प्पा सभ्यता और वैदिक साहित्य, 1987 (इतिहास) ०  अपने अपने राम, 1992 (उपन्यास) ०  उपनिषदों की कहानियां 1993 ०  पंचतंत्र की कहानियां 1995 (पुनर्लेखन) ०  परमगति, 1997 (उपन्यास) ०  उन्माद 1999 (उपन्यास) ०  शुभ्रा, 2000 (उपन्यास) ०  द वेदिक हड़प्पन्स, 1995 (इतिहास) ०  इंद्रधनुष के रंग, 1996 (आलोचना) ०  भारत: तब से अब तक, 1996 (इतिहास) ०  भारतीय परंपरा, 2011 ०  प्राचीन भारत के इतिहासकार, 2011 ०  कोसंबी: कल्पना से यथार्थ तक (2012)।
गतिविधि: अध्ययन-लेखन। मौलिक इतिहास चिंतन में विशिष्ट नाम।
सम्मान: हिंदी अकादमी का पहला पुरस्कार 1986-87 में ‘हड़प्पा सभ्यता और वैदिक साहित्य’ पर तथा दूसरा पुरस्कार 1999-2000 में ‘उन्माद’ पर।

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