Kavi Ne Kaha : Vijendra

Vijendra

Availability: In stock

Seller: KGPBOOKS

Qty:
150.00 135 + Free Shipping


  • Year: 2008

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788189859817

कवि ने कहा : विजेन्द्र
विजेन्द्र हमारे समय के विशिष्ट और बडे समर्थ कवि हैं । उनमें नवीनता के साथ अपनी जातीय स्मृतियों को कविता से कलात्मक ढंग से गूँथने का विरल कौशल है । अतः वे कविता अपने समय की लिखकर अपनी महान् काव्य-परंपरा को भी अपने अंदर सहेजे-समेटे रहते हैं । निराला और त्रिलोचन की परंपरा में उन्हें देखने के पीछे एक तर्क यह भी है कि वे सृजन और व्यवहार को अलग-अलग नहीं मानते । उनका काव्य उनकी जीवनचर्या से अलग नहीं है ।
विजेन्द्र की काव्य भाषा सदा नए विवाद उठाती रही है, क्योंकि यह लोक-चेतन कवि सदा भाषा के बने-बनाए ढाँचों को तोड़ता रहा है। उनकी भाषा लोक और जनपदों की और सहज भ्रमण करती है । इसलिए उनकी कविता में लोक संस्कृति की विकासोन्मुख छवियों और बिंब बराबर दिखाई पडते हैं । इससे विजेन्द्र की कविता का संसार व्यापक और विस्तृत ही नहीं हुआ, बल्कि उसमें अपने समय के बहुआयामी यथार्थ को कहने की शाक्ति भी पैदा हुई है ।
विजेन्द्र जैसे कवि की अनन्य सहजता अलग से पहचानी जाती है । इस कवि ने एक लंबी तनाव-भरी संघर्षपूर्ण यात्रा तय की है । उनके अब तक छपे दस संकलनों की कविताओं को मिलाकर पढ़ने से एक ऐसी रचना-प्रक्रिया से हमारा सामना होता है जो एक साथ बहुआयामी और विकसनशील है । ज्यों-ज्यों कवि उग्र और अनुभव में परिपक्व होता गया है उसकी संवेदना भी त्यों-त्यों अधिक सघन और समृद्ध होती गई है ।

Vijendra

विजेन्द्र
जन्म : 10 जनवरी, 1935, गाँव-धरमपुर, (उ०प्र०)
शिक्षा : काशी हिंदू विश्वविद्यालय
राजस्थान की विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में अध्यापन कार्य । 1993 में एन०डी०बी० राजकीय काँलेज, नोहर, राजस्थान से प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त
प्रकाशित कृतियाँ : 'त्रास' (1966), 'ये आकूतियाँ तुम्हारी' (1980), 'चैत की लाल टहनी' (1982), 'उठे गूमड़े नीले' (1983), 'धरती कामधेनु से प्यारी' (1990), 'ऋतु का पहला फूल' (1994), 'उदित क्षितिज पर' (सानेट-संग्रह,  1996), 'घना के पाँखी' (2000), 'पहले तुम्हारा खिलना' (2004), 'वसंत के पार' (2006) (सभी कविता-संग्रह); 'अग्नि पुरुष' (2006), 'क्रोन्च वध' (2006) (काव्य- नाटक); 'कविता और मेरा समय' (2000, आलोचना); सौन्दर्यशास्त्र : 'भारतीय चित्त और कविता' (2006), 'आधी रात के रंग' (कविता-अंग्रेजी-हिंदी-बहुरंगीय  स्वरचित चित्रों पर कविताओं का संग्रह 2006)
पुरस्कार-सम्मान : राजस्थान साहित्य अकादमी का सर्वोच्च मीरा पुरस्कार, वहीँ से विशिष्ट साहित्यकार के रूप से सम्मानित । प्रथम पहल सम्मान से अलंकृत । के०के० बिड़ला फाउंडेशन के बिहारी पुरस्कार से सम्मानित

Scroll