Mere Saakshatkaar : Narendra Kohli

Narendra Kohli

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  • Year: 2008

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788189859558

मेरे साक्षात्कार : नरेन्द्र कोहली
ऐसा कभी-कभी ही होता है कि आपका कोई पाठक, मित्र, समीक्षक, छात्र या कोई वास्तविक जिज्ञासु किसी प्रयोजन से या मात्र अपनी जिज्ञासा-शांति के लिए अपने सतह को कुछ छीलकर आपको तह तक नहीं तो कम से कम आपकी त्वचा के नीचे तक जानना चाहता है । वह लेखक के मानसिक संसार को उघाड़ना चाहता है । और मैंने प्रायः देखा है कि उस प्रकार की जिज्ञासा लिए हुए प्रश्नों का उत्तर मेरे पास भी बना-बनाया, तैयार नहीं होता । मुझे भी स्वयं अपने आप को टटोलना पाता है । अपने मानसिक संसार को पढ़ना पड़ता है । आश्चर्य होता से कि मैं तो स्वयं ही अपने आप को नहीं जानता था । नहीं जानता था कि मेरा 'स्व' क्या है । वे ऐसे प्रश्न होते हैं, जिनके माध्यम से लेखक स्वयं अपना आविष्कार करता है । अपने 'स्व' से परिचित होता है । उन प्रश्नों का उपकार मानता है कि उन्होंने उसे स्वयं अपने आप से परिचित कराया ।
मेरा प्रयत्न है कि इस पुस्तक के माध्यम से कुछ ऐसे ही साक्षात्कार अपने पाठकों तक पहुंचा सकूँ । समय है कि वे उस लेखक नरेन्द्र कोहली को कुछ जान सकें, जो सामने पड़ने पर, मिलने-जुलने पर सामान्यत: आपसे मिलता नहीं है । वह नरेन्द्र कोहली अपने एकांत से है, जो सामान्यता सार्वजनिक रूप से सामने आना नहीं चाहता । आत्मीय जनों से मिलना और बात है और राह चलते लोगों को दिखना और । फिर भी...
-नरेन्द्र कोहली

Narendra Kohli

नरेन्द्र कोहली
नरेन्द्र कोहली अपने समकालीन साहित्यकारों से पर्याप्त भिन्न है । उन्होंने प्रख्यात कथाओं पर आधृत उपन्यास लिखे हैं, किंतु वे सर्वथा मौलिक हैं । वे आधुनिक हैं, किंतु पश्चिम का अनुकरण नहीं करते। भारतीयता की जडों तक पहुँचते हैं, किंतु पुरातनपंथी नहीं हैं ।
1960 ई० में नरेन्द्र कोहली की कहानियाँ प्रकाशित होनी आरंभ हुई थीं । 1965 ई० के आसपास वे व्यंग्य लिखने लगे थे । हिंदी का व्यंग्य साहित्य इस बात का साक्षी है कि अपनी पीढ़ी में उनकी-सी मौलिकता, प्रयोगशीलता, विविधता तथा प्रखरता और कहीं नहीं है ।
नरेन्द्र कोहली ने राम-कथा से सामग्री लेकर चार खंडों में एक बृहदाकार उपन्यास लिखा 'अभ्युदय' । किसी भी भाषा में संपूर्ण राम-कथा पर लिखा गया यह प्रथम उपन्यास है ।
'अभिज्ञान' कृष्ण-कथा से संबंधित है । कथा राजनीतिक है । निर्धन और अकिंचन सुदामा को सामर्थ्यवान श्रीकृष्ण सार्वजनिक रूप से अपना मित्र स्वीकार करते हैं, तो सामाजिक, व्यवसायिक और राजनीतिक क्षेत्रों में सुदामा की साख तत्काल बढ़ जाती है ।
नरेन्द्र कोहली ने महाभारत-कथा की सामग्री से अपने उपन्यास 'महासमर' की रचना की । उन्होंने जैसे महाभारत को अपने युग में  पूर्णतः जीवंत कर दिया । उन्होंने अपने इस उपन्यास में जीवन को उसकी विराटता के साथ अत्यंत मौलिक ढंग से प्रस्तुत किया है ।
पिछले दस वर्षों में लोकप्रियता के नए कीर्तिमान स्थापित करने वाली रचना 'तोड़ो, कारा तोड़ो' नरेन्द्र कोहली की नवीनतम उपन्यास-श्रृंखला है, जिसका संबंध स्वामी विवेकानंद की जीवन-कथा से है । स्वामी विवेकानंद का जीवन निकट अतीत की घटना है । उनके जीवन की प्राय: घटनाएं सप्रमाण इतिहासांकित है । यहां उपन्यासकार के लिए अपनी कल्पना अथवा अपने चिंतन को आरोपित करने की सुविधा नहीं है । उपन्यासकार को वही कहना होगा, जो स्वामी जी ने कहा था । अपने नायक के व्यक्तित्व और चिंतन से तादात्म्य ही उसके लिए एकमात्र मार्ग है ।

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