Mere Saakshatkaar : Kedar Nath Singh

Kedarnath Singh

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  • Year: 2008

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170165361

मेरे साक्षात्कार : केदारनाथ सिंह
कवि केदारनाथ सिंह के साक्षात्कारों की यह किताब कविता के ज़रिए समकालीन जीवन में झाँकने की एक कोशिश है । इनसे गुज़रना अपने समय की बदलती हुई सौंदर्य-चेतना के खुले-अधखुले गलियारों से गुज़रना है । विगत पच्चीस वर्षों के लंबे अंतराल में लिए गए ये इंटरव्यू कवि की विकास-यात्रा को समझने की कुंजी भी देते हैं और उन मोड़ों-घुमावों की प्रामाणिक जानकारी भी, जिनसे होकर उसकी सृजन-यात्रा अविराम चलती रही है । यह एक रचनाकार की विश्व-दुष्टि के बनने और आकार ग्रहण करने की लंबी प्रक्रिया का दस्तावेज़ है-एक ऐसा कच्चा माल, जिसमें समकालीन कविता के इतिहास के रंग-रेशे तलाशे जा सकते हैं ।
कवि केदारनाथ सिंह की कविताएँ समय के साथ संवाद करती हुई कविताएं हैं। यही वजह है कि उनकी कविताओं में एक तरह की प्रश्नाकुलता दिखाई देती है। ऐसी प्रश्नाकुलता, जो कहीं गहरे पैठकर पाठक को बेचैन करती है। यह देखना भी एक दिलचस्प अनुभव होगा कि अपनी कविताओं में निरंतर प्रश्न उपस्थित करने वाला कवि स्वयं प्रश्नों का सामना कैसे करता है ।
समकालीन सर्जन-परिवेश में दिलचस्पी रखने वाले पाठकों के लिए एक संग्रहणीय दस्तावेज़ है यह किताब ।

Kedarnath Singh

केदारनाथ सिंह
जन्म : 1934 चकिया (बलिया), उत्तर प्रदेश।  
शिक्षा  : आरंभिक शिक्षा गाँव में, बाद की शिक्षा-हाईस्कूल से एस.ए. तक वाराणसी में। 'आधुनिक हिंदी कविता में बिंब-विधान' विषय पर सन् 1964 में पी-एच.डी. प्राप्त की
विधिवत् काव्य-लेखन 1952-53 के आसपास शुरु किया। सन् 1954 में पाल एलुआर की प्रसिद्ध कविता 'स्वतंत्रता' का अनुवाद किया जिसके जरिए नई सौंदर्य-दृष्टि और समकालीन काव्य-चेतना से पहला परिचय हुआ। कुछ समय तक बनारस से निकलने वाली अनियतकालिक पत्रिका 'हमारी पीढ़ी' से संबद्ध रहे। पहला कविता-संग्रह 'अभी बिलकुल अभी' सन् 1960 में प्रकाशित । उसी वर्ष प्रकाशित 'तीसरा सप्तक' के सहयोगी कवियों में से एक। 
पेशे से अध्यापक। कार्यक्षेत्र का प्रसार महानगर से ठेठ ग्रामांचल तक। उदय प्रताप कॉलेज, वाराणसी; सेंट एंड्रईज कॉलेज, गोरखपुर; उदित नारायण कॉलेज, पडरौना तथा गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर से संबद्ध रहे। सन् 1976 जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में 23 वर्षों तक अध्यापन । 
अनेक पुरस्कारों से सम्मानित, जिनमें प्रमुख हैं : साहित्य अकादेमी पुरस्कार, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान (मध्य प्रदेश), जाशुआ सम्मान (आंध्र  प्रदेश), कुमारन आशान पुरस्कार (केरल), 'जीवन भारती' सम्मान (उड़ीसा), दयावती मोदी पुरस्कार तथा व्यास सम्मन।  काव्यपाठ के लिए अमरीका, रूस, कज्जकिस्तान, लंदन, पेरिस, इटली आदि देशों की यात्राएँ। 
प्रकाशित कृतियाँ : 'अभी बिलकुल अभी', 'जमीन पक रही है', 'यहाँ से देखो', 'अकाल में सारस', 'उत्तर कबीर और अन्य कविताएँ' एवं  'बाघ'। 'समकालीन रूसी कविताएँ' (साहित्य अकादेमी) तथा 'कविता दशक' (हिंदी अकादेमी)

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