Dus Pratinidhi Kahaniyan : Vishnu Prabhakar

Vishnu Prabhakar

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170162162

'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ 'किताबघर' की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
'किताबघर' गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए अग्रज कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कथाकार विष्णु प्रभाकर ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'बँटवारा', 'क्रान्तिकारी', 'पर्वत से भी ऊँचा', 'ठेका', 'पिचका हुआ केला और क्रान्ति', 'चितकबरी बिल्ली', 'एक मौत समन्दर किनारे', 'एक और कुन्ती', 'पैड़ियों पर उठते पदचाप' तथा 'पाषाणी'।
हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात कथाकार विष्णु प्रभाकर की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Vishnu Prabhakar

विष्णु प्रभाकर विष्णु जी का जन्म 21 जून, 1912, को जिला मुजफ्फरनगर (उ०प्र०) के एक गॉव में हुआ था । विष्णु प्रभाकर हिन्दी में नाटक के क्षेत्र में विशिष्ट प्रतिभासंपन्न रचनाकार के रूप में प्रतिष्ठित हैं । बांग्ला उपन्यासकार शरतचन्द्र के जीवन पर 'आवारा मसीहा' के कृतित्व ने विष्णु जी को भारत के महान जीवनीकार के रूप में भी प्रस्तुत किया है । बचपन हिसार (हरियाणा) में गुजरा। वहीं शिक्षा प्राप्त की और सरकारी नौकरी से जिन्दगी की शुरुआत की । कुछ दिन आकाशवाणी में अधिकारी भी रहे । कुछ समय पश्चात नौकरी छोड़ स्वतन्त्र लेखन अपनाया । मौलिक लेखन के अतिरिक्त उन्होंने साठ से अधिक पुस्तकों का संपादन किया । उनकी अनेक पुस्तके पुरस्कृत हैं । पुरस्कार तथा सम्मान : इंटरनेशनल ह्यूमनिस्ट अवार्ड (1975); सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार (1976), राष्ट्रीय एकता पुरस्कार (1980), मूर्तिदेवी पुरस्कार, भारतीय ज्ञानपीठ (1988); शलाका सम्मान, हिन्दी अकादमी, दिल्ली (1988), केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार (1993); पाब्लो नेरूदा सम्मानम्, इण्डियन राइटर्स एसोसिंएशन; विशिष्ट साहित्यकार सम्मान, उ० प्र० हिन्दी संस्थान; शरत् पुरस्कार, बंग साहित्य परिषद्, भागलपुर; सूर पुरस्कार, साहित्य कला परिषद्, तुलसी पुरस्कार, हरियाणा साहित्य अकादमी और संस्थान सम्मान, नागरी प्रचारिणी सभा, प्रयाग एवं अन्य कई पुरस्कार।
 स्मृति-शेष : 11 अप्रैल, 2009

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