Dus Pratinidhi Kahaniyan : Sudha Arora

Sudha Arora

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789382114598

'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार सुधा अरोड़ा ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'महानगर की मैथिली', 'सात सौ का कोट', 'दमनचक्र', 'दहलीज पर संवाद', 'रहोगी तुम वहीं', 'बिरादरी बाहर', 'जानकीनामा', 'यह रास्ता उसी अस्पताल को जाता है', ‘कांसे का गिलास' तथा 'कांच के इधर-उधर'।
हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक सुधा अरोड़ा की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Sudha Arora

सुधा अरोड़ा
जन्म : 4 अक्तूबर, 1946, लाहौर (अब पश्चिमी पाकिस्तान) ।
1967 में उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम.ए. और शिक्षायतन कॉलेज से बी.ए. ऑनर्स किया । दोनों  बार प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान । 1968 से 1971 तक कलकत्ता के डिग्री कॉलेज से अध्यापन ।
करीब 11 कहानी-संग्रहों में पैंसठ कहानियां प्रकाशित । 1965-2012 तक में अब तक की लिखी गई संपूर्ण कहानियां दो खंडों में संकलित । एकांकी ऑड मैन आउट उर्फ बिरादरी बाहर' और साझा कविता-संग्रह 'रचेंगे हम साझा इतिहास' सन् 2012 में प्रकाशित । 'रहोगी तुम वही' संकलन का अनुवाद उर्दू में, उपन्यास 'यहीं कहीं था घर' का अनुवाद पंजाबी में, 'आम औरत : जिंदा सवाल' का अनुवाद मराठी में 'उंबरठ्याच्या अल्याड पल्याड' नाम से प्रकाशित । कहानियां  लगभग सभी भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त अंग्रेजी, फ्रेंच, पोलिश, चेक, जापानी, डच, जर्मन, इतालवी तथा ताजिकी भाषाओं में अनूदित और इन भाषाओं के सकलनों नें प्रकाशित । पहली कहानी 'मरी हुई चीज' ज्ञानोदय सितंबर, 1965 से प्रकाशित । 'महानगर की मैथिली, 'काला बाजार' और 'रहोगी तुम वही' उनके चर्चित कथा-संग्रह ।
सन 1993 से सुधा अरोड़ा प्रताडित महिलाओं की सहायता के लिए गठित संस्था 'हेल्प' से जुडी और तब से अब तक लगातार महिलाओं के लिए कार्यरत । स्त्री-विमर्श पर दो पुस्तकें- 'आम औरत : जिंदा सवाल' और 'एक औरत की नोटबुक' चर्चित । उनके स्त्री-विषयक आलेख कई भाषाओं में अनुदीत । 
सुधा अरोड़ा कई बार नियमित स्तंभ-लेखन तथा 1995 के बाद  फिल्म और टेलीविजन से भी जुडों । टी. वी. धारावाहिक और कर्ड रेडियो नाटकों के अलावा 'बवंडर' फिल्म की पटकथा ।
1978 में 'युद्धविराम' को उ.प्र. हिंदी संस्थान का विशेष सम्मान । 2008 से साहित्य क्षेत्र का भारत निर्माण सम्मान।  2010 का प्रियदर्शिनी सम्मान । 2011 से वीमेंस अचीवर अवार्ड तथा 2012 में महाराष्ट्र साहित्य अकादमी सम्मान ।

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