Dus Pratinidhi Kahaniyan : Ramdarash Mishra

Ramdarash Mishra

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170167211

'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार रामदरश मिश्र ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'सीमा', 'सड़क', 'एक औरत एक जिदगी', 'खँडहर की आवाज', 'मां, सन्नाटा और बजता हुआ रेडियो’, 'निर्णयों के बीच एक निर्णय', 'मुर्दा मैदान', 'अकेला मकान', 'शेष यात्रा' तथा 'दिन के साथ' ।
हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक रामदरश मिश्र की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Ramdarash Mishra

रामदरश मिश्र

जन्म : 15 अगस्त, 1924 को गोरखपुर (उ० प्र०) जिले के डुमरी गांव में
शिक्षा : एम०ए०, पी-एच०डी०

सर्जनात्पक रचनाएँ : 'पथ के गीत', 'बैरंग-बेनाम चिट्ठियाँ', 'पक गई है धूप’, 'कंधे पर सुरज', 'दिन एक नदी बन गया', 'मेरे प्रिय गीत', 'जुलूस कहाँ जा रहा है?', 'रामदरश मिश्र की प्रतिनिधि कविताएँ', 'आग कुछ नहीं बोलती', 'शब्द सेतु', 'बारिश में भीगते बच्चे', 'ऐसे में जब कभी', 'आम के पत्ते (काव्य-संग्रह) ० 'हंसी ओठ पर आँखें नम हैं', 'बाजार को निकले हैं लोग' (ग़ज़ल-संग्रह) 'पानी के प्राचीर' , 'जल टूटता हुआ', 'बीच का समय', 'सूखता हुआ तालाब', 'अपने लोग', 'रात का सफर', 'आकाश की छत', 'आदिम राग' (बीच का समय), 'बिना दरवाजे का मकान', ‘दूसरा घर', 'थकी हुई सुबह', 'बीस बरस' (उपन्यास) ० 'खाली घर', 'एक यह', 'दिनचर्या', 'सर्पदंश', 'वसंत का एक दिन', 'इकसठ कहानियां', 'अपने लिए', 'मेरी प्रिय कहानियां', 'चर्चित कहानियां', 'श्रेष्ठ आंचलिक कहानियां', 'आज का दिन भी', 'फिर कब आएँगे ?', 'एक कहानी लगातार', 'विदूषक', 'दिन के साथ', 'मेरी तेरह कहानियाँ', 'दस प्रतिनिधि कहानियां', (कहानी-संग्रह) ० 'कितने बजे है', 'बबूल और कैक्टस', 'घर-परिवेश' (ललित निबंध-संग्रह) ० 'तना हुआ इंद्रधनुष', 'भोर का सपना', 'पडोस की खुशबू' (यात्रा-वर्णन) ० 'सहचर है समय', 'फुरसत के दिन' (आत्मकथा) ० 'स्मृतियों के छंद', 'अपने-अपने रास्ते' (संस्मरण) ० 'बूँद-बूँद नदी', 'दर्द की हंसी', 'नदी बहती है' (चुनी हुई रचनाएँ)।

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