Dus Pratinidhi Kahaniyan : Narendra Kohli

Narendra Kohli

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170167785

'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार नरेन्द्र कोहली ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'परिणति', 'किरचें', 'दृष्टि -देश में एकाएक', 'शटल', 'नमक का कैदी', 'निचले फ्लैट में', 'नींद आने तक', 'संचित भूख', 'संकट' तथा 'छवि' ।
हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक नरेन्द्र कोहली की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Narendra Kohli

नरेन्द्र कोहली
नरेन्द्र कोहली अपने समकालीन साहित्यकारों से पर्याप्त भिन्न है । उन्होंने प्रख्यात कथाओं पर आधृत उपन्यास लिखे हैं, किंतु वे सर्वथा मौलिक हैं । वे आधुनिक हैं, किंतु पश्चिम का अनुकरण नहीं करते। भारतीयता की जडों तक पहुँचते हैं, किंतु पुरातनपंथी नहीं हैं ।
1960 ई० में नरेन्द्र कोहली की कहानियाँ प्रकाशित होनी आरंभ हुई थीं । 1965 ई० के आसपास वे व्यंग्य लिखने लगे थे । हिंदी का व्यंग्य साहित्य इस बात का साक्षी है कि अपनी पीढ़ी में उनकी-सी मौलिकता, प्रयोगशीलता, विविधता तथा प्रखरता और कहीं नहीं है ।
नरेन्द्र कोहली ने राम-कथा से सामग्री लेकर चार खंडों में एक बृहदाकार उपन्यास लिखा 'अभ्युदय' । किसी भी भाषा में संपूर्ण राम-कथा पर लिखा गया यह प्रथम उपन्यास है ।
'अभिज्ञान' कृष्ण-कथा से संबंधित है । कथा राजनीतिक है । निर्धन और अकिंचन सुदामा को सामर्थ्यवान श्रीकृष्ण सार्वजनिक रूप से अपना मित्र स्वीकार करते हैं, तो सामाजिक, व्यवसायिक और राजनीतिक क्षेत्रों में सुदामा की साख तत्काल बढ़ जाती है ।
नरेन्द्र कोहली ने महाभारत-कथा की सामग्री से अपने उपन्यास 'महासमर' की रचना की । उन्होंने जैसे महाभारत को अपने युग में  पूर्णतः जीवंत कर दिया । उन्होंने अपने इस उपन्यास में जीवन को उसकी विराटता के साथ अत्यंत मौलिक ढंग से प्रस्तुत किया है ।
पिछले दस वर्षों में लोकप्रियता के नए कीर्तिमान स्थापित करने वाली रचना 'तोड़ो, कारा तोड़ो' नरेन्द्र कोहली की नवीनतम उपन्यास-श्रृंखला है, जिसका संबंध स्वामी विवेकानंद की जीवन-कथा से है । स्वामी विवेकानंद का जीवन निकट अतीत की घटना है । उनके जीवन की प्राय: घटनाएं सप्रमाण इतिहासांकित है । यहां उपन्यासकार के लिए अपनी कल्पना अथवा अपने चिंतन को आरोपित करने की सुविधा नहीं है । उपन्यासकार को वही कहना होगा, जो स्वामी जी ने कहा था । अपने नायक के व्यक्तित्व और चिंतन से तादात्म्य ही उसके लिए एकमात्र मार्ग है ।

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