Dus Pratinidhi Kahaniyan : Madhu Kankaria

Madhu Kankria

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789382114499

'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार मधु कांकरिया ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'बस…दो चम्मच औरत', 'नंदीग्राम के चूहे', 'चिड़िया ऐसे मरती है', 'अठारह साल का लड़का', 'काला चश्मा', 'चिडिया ऐसे जीती है', 'पोलिथिन में पृथ्वी' तथा 'अन्वेषण'।
हमेँ विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक मधु कांकरिया की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Madhu Kankria

मधु कांकरिया जन्म : 23 मार्च, 1957, कोलकाता । शिक्षा : एम.ए. (इकोनोमिक्स), कोलकाता यूनिवर्सिटी, कंप्यूटर विज्ञान से डिप्लोमा । रचनाएं उपन्यास : खुले गगन के लाल सितारे, सलाम आखिरी, पत्ता खोर, सेज पर संस्कृत, सूखते चिनार । कहानी-संग्रह : बीतते हुए, ...और अंत मेँ ईशु, चिड़िया ऐसे मरती है, भरी दोपहरी के अंधेरे (प्रतिनिधि कहानियां) । सामाजिक विमर्श : अपनी धरती अपने लोग । पुरस्कार/सम्मान : कथाक्रम पुरस्कार (2008), हेमचन्द्र साहित्य सम्मान पुरस्कार, समाज गौरव सम्मान टेलीफिल्म : रहना नहीं देश विराना है, प्रसार भारती

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