Dus Pratinidhi Kahaniyan : Balram

Balram

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  • Year: 2013

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789382114468

'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार बलराम ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'शुभ दिन', 'गोआ में तुम', 'शिक्षाकाल', 'पालनहारे', 'सामना', 'कलम हुए हाथ ', 'कामरेड का सपना ', 'मालिक के मित्र', 'अनचाहे सफर' तथा 'पहला सबक' ।
हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक बलराम की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Balram

बलराम
उत्तर प्रदेश में बिठूर के पास स्थित गांव भाऊपुर में 15 नवंबर, 1951 को जन्मे बलराम एम.ए. अधूरा छोड़कर हिंदी दैनिक 'आज' में फीचर संपादक हो गए, जहां से 'रविवार' और 'करंट' साप्ताहिक के लिए उत्तर प्रदेश की रिपोर्टिंग भी करते रहे । फिर टाइम्स ऑफ़ इंडिया की पत्रिका 'सारिका' के संपादक मंडल से संबद्ध हुए। दिल्ली आकर यहीं से हिंदी में एम.ए. किया । बाद में 'नवभारत टाइम्स' के चीफ-सब एडीटर बने । 'भूमिका', 'शिखर' और 'शब्दयोग' के बाद समाचार पाक्षिक 'लोकायत' का संपादन । कृतियां : कलम हुए हाथ, गोआ में तुम, मृगजल, अनचाहे सफ़र तथा सामना (कथा संग्रह), जननी- जन्मभूमि और आवागमन (उपन्यास), माफ करना यार (आत्मकथा), औरत की पीठ पर (रिपोर्ताज), हिंदी कहानी का सफर, आंगन खड़ा फकीर, आधे-अधूरे परिचय (आलोचना), वैष्णवों से वार्ता (इंटरव्यूज) तथा धीमी-धीमी आंच (संस्मरण) आदि प्रकाशित । कारा (उपन्यास) शीघ्र प्रकाश्य । संपादन : दुनिया की प्रमुख भाषाओँ की कथाओं के अनुवाद और संचयन 'विश्व लघुकथा कोश', 'भारतीय लघुकथा कोश' और 'हिंदी लघुकथा कोश' प्रकाशित । दर्जनाधिक अन्य पुस्तकों का भी संपादन किया ।
सम्मान : केंद्रीय हिंदी संस्थान से सृजनात्मक लेखन और पत्रकारिता के लिए 'गणेशशंकर विद्यार्थी स्रम्मान' । हिंदी अकादमी से 'साहित्यकार सम्मान' । संस्मरण के लिए बिहार से 'नई धारा रचना सम्मान' । उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से रिपोर्ताज के लिए' अज्ञेय पुरस्कार' । मध्य प्रदेश से प्रेमचंद पुरस्कार । दिल्ली और उत्तर प्रदेश शासन से कुछ साहित्यिक कृति पुरस्कार भी मिले ।

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